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मोदी के पूर्व ऊर्जा मंत्री ने अडानी पॉवर पर 62 हज़ार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया, एबीपी न्यूज़ पर चली खबर, देखें वीडियो

मोदी के कैबिनेट मंत्री रहे आरके सिंह ने लगाया सनसनीखेज आरोप, कोई दूसरा वक्त होता तो मीडिया तूफ़ान मचा देता, सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान लेता, सिंहासन डोलने लगता… अब ऐसा कुछ नहीं होता!

यशवंत सिंह-

आर. के. सिंह (राज कुमार सिंह) मोदी सरकार में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं। वे पहली बार 2014 में लोकसभा के लिए चुने गए (आरा, बिहार से BJP सांसद)। सितंबर 2017 में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया — “बिजली और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय” (Minister of State (Independent Charge) for Power and New & Renewable Energy) का कार्यभार मिला। बाद में 2021 से 2024 तक, मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में, वे केंद्रीय ऊर्जा मंत्री (Cabinet Rank) रहे। यानी वे मोदी सरकार में ऊर्जा क्षेत्र के सबसे प्रमुख जिम्मेदार मंत्री रहे हैं, जिनके अधीन पूरे देश का पावर सेक्टर और बिजली नीति आती थी। इसलिए जब अब वही आर. के. सिंह अदानी पावर पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, तो यह बयान राजनीतिक और प्रशासनिक — दोनों दृष्टियों से बहुत अहम और असहज करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि वे इस क्षेत्र की अंदरूनी कार्यप्रणाली को गहराई से जानते हैं।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आरके सिंह ने कहा कि एनडीए सरकार ने अदाणी समूह के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया है जिसमें कहा गया है कि 25 साल तक बिहार सरकार 6 रुपये 75 पैसे के हिसाब से अदाणी समूह से पावर खरीदेगी। अदाणी पावर लिमिटेड को जो जमीन दिया गया है और जिस रेट पर बिहार के लोगों को पर यूनिट बिजली मिलेगी में उसमें 62 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। इसका खामियाजा सीधे-सीधे बिहार की जनता को भुगतना पड़ेगा। इस घोटाले में बिहार सरकार के मंत्री और अधिकारी शामिल हैं। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। 

पूर्व केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर. के. सिंह ने अदानी पावर लिमिटेड पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बिहार सरकार ने अदानी समूह के साथ 25 साल के लिए बिजली खरीद समझौता (Power Purchase Agreement – PPA) किया है, जिसमें प्रति यूनिट बिजली की दर ₹ 6.75 तय की गई। सिंह के अनुसार यह दर बाज़ार औसत से कई गुना अधिक है, जिससे कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाया गया और जनता को अरबों-खरबों का नुकसान हुआ।

इस खबर का प्रसारण एबीपी न्यूज़ चैनल ने किया है जिसका वीडियो नीचे दिया जा रहा है।

पूर्व केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री आर. के. सिंह ने इस सौदे को “लगभग ₹ 62,000 करोड़ का घोटाला” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ़ नीतिगत चूक नहीं बल्कि सत्ता और कॉर्पोरेट की मिलीभगत से हुआ योजनाबद्ध भ्रष्टाचार है। उनके मुताबिक इस अनुबंध में “लागत आँकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया, ट्रांसमिशन-चार्ज में गड़बड़ी की गई और बिजली आपूर्ति के लिए ऐसी दर तय की गई जो बिहार के उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ डालेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारियों, ऊर्जा विभाग और मंत्रियों ने इस प्रक्रिया को पारदर्शिता से दूर रखकर निजी कंपनी को “संरक्षित लाभ” दिलाया। आर. के. सिंह ने इसे “भारत के सबसे बड़े बिजली घोटालों में से एक” कहा और स्वतंत्र एजेंसी से तत्काल जाँच की माँग की।

इन आरोपों के बाद राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। विपक्ष ने इसे “कॉर्पोरेट घरानों को संरक्षण देने वाली नीति” बताया, जबकि सत्तापक्ष अब तक चुप्पी साधे हुए है। ऊर्जा-नीति विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मामला तथ्यात्मक रूप से सही पाया गया, तो यह न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में बिजली खरीद समझौतों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करेगा।

अभी तक अडानी समूह की ओर से इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। न ही बिहार सरकार या ऊर्जा विभाग ने इस PPA या घोटाले की राशि के संबंध में कोई दस्तावेज सार्वजनिक किया है। इसलिए आरोपों की पुष्टि या खंडन दोनों की स्थिति फिलहाल अस्पष्ट है।

भड़ास के नज़रिए से यह मामला सिर्फ़ एक सौदे या कंपनी का नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की परतें खोलता है जहाँ नीति-निर्माण, राजनीति और पूँजी की साँठ-गाँठ से जनता की जेब काटी जाती है। अगर आर. के. सिंह के आरोप सही साबित हुए तो यह सिर्फ़ एक घोटाला नहीं, बल्कि शासन-व्यवस्था पर जनता के भरोसे की सबसे बड़ी चोट होगी।

स्कैम को समझने के लिए देखें ये वीडियो-

आर. के. सिंह कहिन!

“अडानी के साथ जो एग्रीमेंट साइन किया गया है, जिसके तहत बिहार सरकार 25 साल तक 6.075 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से अडानी की कंपनी से बिजली खरीदेगी, उसमें अडानी को बहुत ही ऊंचे आरंभिक मूल्य पर पावर प्लांट लगाने की अनुमति दी गई है, जिससे बिहार सरकार और जनता दोनों को नुकसान होगा।”

“कुल मिलाकर यह 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का घपला है।”

“आप प्रति वर्ष करीब ढाई हजार करोड़ रुपये ज्यादा दे रहे हैं, जिससे 25 सालों में कुल 62 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। और इस नुकसान का भार जनता पर पड़ेगा — प्रति यूनिट 1.41 रुपये ज्यादा देकर।”

“यह 62 हजार करोड़ रुपये के घाटे का कैलकुलेशन हमने खुद किया है। हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की जांच सीबीआई करे और इस घाटे का स्वतंत्र आकलन किया जाए।”

“एक ह्विसिलब्लोअर ने मुझे पत्र लिखकर इस मामले की पूरी जानकारी दी है और कहा है कि आप केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रहे हैं और बिहार से हैं… इसलिए अपने राज्य में हो रहे इतने बड़े घोटाले का संज्ञान लें।”


ये है अडानी ग्रुप का पक्ष-

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