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आज के अखबार:हवा से ज़्यादा प्रदूषित राजनीति, इसके प्रचार की मजबूरी में कुचलते पत्रकारिता के आदर्श

संजय कुमार सिंह

आज दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने और एक्यूआई 400 पार कर जाने की खबर क्रम से टाइम्स ऑफ इंडिया और अमर उजाला में लीड है। इसके अलावा मेरे सात अखबारों की लीड सात अलग खबरें हैं। इनमें बिहार के वैशाली जिले में स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी बंद होने तथा समस्तीपुर के सराय रंजन में सड़क किनारे हजारों वीवीपैट पर्चियां मिलने की खबर देशबन्धु में लीड है। दि एशियन एज की लीड प्रधानमंत्री का यह कहना है कि राजद बिहार में कट्टा से शासन करेगा और राजग स्टार्ट अप के साथ। हेडलाइन मैनेजमेंट के इस खुले खेल में नवोदय टाइम्स में अंदर के पन्ने पर एक शीर्षक है, “नहीं चाहिए कट्टा सरकार : मोदी”। अभी तक भाजपा या राजग की सरकार बनती थी तो डबल इंजन की सरकार होती थी। दूसी सरकारों का विरोध भी होता था लेकिन वह कट्टा सरकार होगी और केंद्र की मोदी सरकार कुछ कर नहीं पाएगी – अजीब किस्म का चुनाव प्रचार है। निश्चित रूप से यह विपक्ष पर प्रधानमंत्री के अनर्गल आरोपों की श्रृंखला में सबसे हास्यास्पद है। इस मामले में चुनाव आयोग के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद नहीं है क्योंकि पहले के आरोप और कारनामे कम नहीं है। वैसे भी, यह तो प्रधानमंत्री और प्रधान प्रचारक का मामला है भाजपा के खिलाफ शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं होती है और जो होती है वह औपचारिक या सिर्फ दिखावा। अनिल मसीह के मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई और मुख्य चुनाव आयुक्त को कानूनी सुरक्षा है। ऐसे में बिहार के कल के मामलों में जो कार्रवाई हुई है वह निचले स्तर के कर्मचारियों व अधिकारियों पर है। डीएम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन पंजाब के तरनतारन उपचुनाव से तीन दिन पहले एसएसपी को निलंबित कर दिया गया है। द टेलीग्राफ की लीड बिहार चुनाव की खबर है।  इसमें बताया गया है कि हैदराबाद के एआईएमआईएम ने सीमंचल के मतों में सेंध लगाई है और इसे भाजपा की बी टीम कहा जाता है।

इस तरह मुख्य रूप से खबर यही है कि भाजपा की चुनावी राजनीति के कारण दिल्ली की हवा खराब है या खराब बनी हुई है तो वह मुद्दा नहीं है। चुनाव चोरी को मुद्दा बनने से रोकने के हर उपाय चल रहे हैं और चुनाव चोरी अगर होती थी तो उसमें कोई कमी नहीं है क्योंकि जो पहले होता था वह हो ही रहा है और औ इसमें बी-टीम की मदद लेना-मिलना शामिल है। दूसरी ओर, बिहार में लोक जनशक्ति पार्टी (पासवान) की एक सांसद शाम्भवी चौधरी का वीडियो वायरल रहा। इसमें उनके दोनों हाथों की तर्जनी पर मतदान करने वाली स्याही के निशान हैं। अव्वल तो ऐसा होना ही नहीं चाहिए और होने का मतलब यह नहीं है कि उन्होंने दो बार मतदान किया। लेकिन केंद्र सरकार समर्थक पार्टी की सांसद से जुड़े होने के कारण मामला गंभीर तो है ही। फिर भी, देश में स्थिति यह है कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों से जुड़े मामलों की जांच नहीं होती है और यह जमाने से चला आ रहा है।  जज की संदिग्ध मौत का मामला हो या रिश्वत देने-लेने का। आप जानते हैं कि यह अमित शाह से जुड़े जज लोया का मामला बहुत पुराना है। दूसरी ओर, दिल्ली दंगे के मामले में पांच चास से ज्यादा समय से जेल में बंद धर्म विशेष के लोगों को जमानत नहीं मिल रही है और पुलिस पूरा जोर लगाए हुए है। ऐसे में पंजाब के उपचुनाव में एसएसपी का निलंबन और सांसद ही नहीं, भाजपा नेताओं के दो वोट और दो निशान के मामले में किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की खबर नहीं है। सांसद के दोनों हाथों की तर्जनी पर वोट का निशान लगे होने के वीडियो में यह देखा जा सकता है कि सांसद को कुछ इशारा किया जा रहा है लेकिन पटना के जिलाधिकारी ने सोशल मीडिया पर कहा है, 182-बाँकीपुर विधान सभा के मतदान केन्द्र संख्या -61, संत पॉल्स प्राईमरी स्कूल, बुद्धा कॉलोनी (मुख्य भाग का उत्तरी कमरा) के पीठासीन पदाधिकारी से पृच्छा की गयी। उनके द्वारा स्पष्ट किया गया कि स्याही लगाने वाले मतदान कर्मी के द्वारा भूलवश दाहिने हाथ के अंगुली पर स्याही लगा दिया गया था। पीठासीन पदाधिकारी के हस्तक्षेप के पश्चात बांये हाथ के अंगुली पर भी स्याही लगायी गयी। यह स्पष्ट किया जा रहा है कि माननीय सांसद श्रीमती शाम्भवी ने 182-बाँकीपुर विधान सभा के मतदान केन्द्र सं0-61 संत पॉल्स प्राईमरी स्कूल, बुद्धा कॉलोनी (मुख्य भाग का उत्तरी कमरा) के मतदाता सूची क्रमांक 275 पर ही मतदान किया है।

मेरी जानकारी में गलत हाथ की तर्जनी पर निशान लगा दिए जाने का यह पहला मामला है। मेरा अनुभव यह है कि मतदाता को मालूम न हो, गलत हाथ रख दे तो संबंधित कर्मी तुरंत पकड़लेता है और जब उसका यही काम है तो आम मतदाता छोड़िये सांसद के साथ गलती से भी, ऐसा कैसे हो सकता है। अगर हो गया तो सांसद को दोनों उंगलियों के निशान दिखाते हुए वीडियो बनवाने की जरूरत नहीं थी लेकिन सरकार समर्थकों का मामला अलग है। आप जानते हैं कि फरवरी में दिल्ली और नवंबर में बिहार में वोट करना सामान्य नहीं है। फिर भी भाजपा के एक सांसद ने किया और खुद ही फोटो सार्वजनिक किया। बाद में अपने पैसे से वोट देने जाने की दलील के साथ मानहानि का दावा करने की भी चेतावनी दी चुनाव आयोग ने इस मामले में अभी तक कुछ नहीं कहा है और कहने को तो राहुल गांधी के आरोपों पर भी कुछ नहीं कहा है। दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल ने एसएसपी डॉ. रवजोत कौर ग्रेवाल पर आम आदमी पार्टी के इशारे पर अकाली दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगाया था। लोकसभा चुनाव के समय लगभग ऐसा ही आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविन्द केजरीवाल के साथ था। तब चुनाव आयोग की कार्रवाई तो नहीं ही की थी सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए रिहा किया तो सुप्रीम कोर्ट पर भी आरोप लगे और इलाज के लिए भी इस अवधि का विस्तार नहीं हुआ। दोनों मामले तुलना करने योग्य न भी हों तो तथ्य हैं और ऐसे में आज नवोदय टाइम्स की लीड है, “सभी के लिए सुलभ हो न्याय : मोदी”।

प्रधानमंत्री सब के लिए न्याय सुलभ होने की बात तब कर रहे हैं जब वे बिहार के मतदाताओं को कट्टे का डर दिखाते रहे हैं। यही नहीं, यह आरोप भी लगाया था,  “कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रखकर आरजेडी ने सीएम पद चोरी किया”। यह सूचना उन्हीं की दी हुई है। कांग्रेस तो शिकायत करने की स्थिति में भी नहीं है लेकिन प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को न्याय दिलाने की कोई कोशिश या पहल की हो इसकी जानकारी नहीं है। जाहिर है कि मैं न्यायिक पहल की बात कर रहा हूं, राजनीतिक पहल की नहीं। डबल इंजन वाले उत्तर प्रदेश में बुलडोजर से न्यायिक मामले निपटाए जाने पर प्रधानमंत्री की कोई टिप्पणी याद नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा – समय पर पहुंच योग्य न्याय सामाजिक बराबरी की कुंजी है। कहा जा सकता है कि सरकार ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन यह सब अलग मामला है। ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड दूसरे सभी अखबारों से अलग है। यह पुणे के कोरेगांव पार्क-मुंडवा में लगभग 44 एकड़ महार भूमि विवाद से संबंधित है। हालांकि, यह भूमि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे को आवंटित हुई है और भाजपा तथा समर्थक के बीच का पहला विवाद हो सकता है। इसलिए इसे इंडियन एक्सप्रेस में प्रमुखता मिलने के भी मायने हैं लेकिन यह सब अलग मुद्दा है। द हिन्दू की लीड मणिपुर में कुकी-जो समूहों के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाने की मांग और उसे केंद्र द्वारा खारिज कर दिए जाने की खबर है।

आप जानते हैं कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के साथ राज्य को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। उसे फिर से राज्य का दर्जा देने की मांग वर्षों से लंबित है और इसका विरोध करने वालों में केंद्र सरकार के समर्थक रहे सोन वांगचुक भी हैं और लेह में हिन्सा के बाद सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसी धाराएं लगाई गई हैं कि अभी तक जमानत नहीं हुई है। अब खबर है कि करीब दो वर्ष की हिन्सा और आंदोलन के बाद मणिपुर के दो समूहों ने अब दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने मांग की है तो केंद्र ने इनकार कर दिया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होने और कार्यकाल छोटा होने के लिए विपक्ष की आलोचना भी आज की लीड है। चुनावों में पारदर्शित की बात की जाए तो कल पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि अमित शाह के होटल में सीसीटीवी ढंक दिए जाते हैं तो आज मेरे नौ अखबारों में से किसी में भी यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। द हिन्दू की एक खबर के अनुसार, एर्नाकुलम-बेंगलुरु वंदे भारत ट्रेन का उद्घाटन समारोह सांप्रदायिक हो गया है। इसका कारण यह रहा कि दक्षिण रेलवे ने पहली यात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया में जारी किया था। इसमें स्कूली बच्चों को एक ऐसा गाना गाते हुए दिखाया गया था जो आरएसएस से जुड़ा है। भिन्न क्षेत्रों में आलोचना के बाद इस वीडियों को डिलीट कर दिया गया। मुख्यमंत्री पिनयारी विजयन ने भी इसका विरोध किया और इसे संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन कहा। आरएसएस की बैठकों में गया जाने वाला यह गीत संभवतः वन्देमातरम है। कल आपने यहां पढ़ा कि पूरा गाना भिन्न धर्मों के लोगों के लिए अनुपयुक्त माना गया था लेकिन प्रधानमंत्री की उसपर क्या राय है। ऐसे में रेलवे ने इसे गाते हुए स्कूली बच्चों का वीडियो पोस्ट किया तो असल में क्या हुआ होगा या क्यों विरोध हुआ होगा।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। चैट जीपीटी का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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