डॉ अरविंद मिश्रा-
फाईनेन्सियल टेक्नोलॉजी (फिनटेक) के दो दिग्गजों के बीच के तकरीबन दो घंटे के पोडकास्ट को तन्मय होकर सुना। मतलब एलॉन मस्क और निखिल कामथ। एक खाटी हिन्दुस्तानी और दूसरा अमेरिकी। एक खरबपति तो दूसरा भी अरबपति। अब दोनों टेक्नोलॉजी शिखर पुरुषों और लक्ष्मी कृपा पात्र धन कुबेरों के बीच चर्चा हुई तो मुख्य विषय भी प्रौद्योगिकी ही होना था। मैंने सोचा अपने फेसबुक मित्रों जिन्होंने इस लंबे पोडकास्ट को नहीं देखा सुना हो उन्हें इसके बारे में बताया जाय।
निखिल कामथ सैंतीस वर्षीय युवा भारतीय अरबपति हैं जिन्हें डिजिटल टेक्नोलॉजी में महारत हासिल है और वे विश्व के चर्चित महापुरुषों के साथ पोडकास्ट करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी पिछले महीनों उनका एक दो घंटे का पॉडकास्ट आया था। उनका यह कार्यक्रम डब्ल्यू टी एफ के नाम से जाना जाता है। डब्ल्यू टी एफ बोले तो ह्वाट द फ*। अजीब सा और अश्लील सा नाम है न। मगर आजकल डिजिटल मीडिया पर युवाओं के ऐसे ही लिंगों – उद्गार हैं।
छोड़िये भी, नाम में क्या रखा है। आईये कामथ और मस्क के बीच हुई चर्चा का सार ग्रहण करें।
एलॉन मस्क ने कहा कि विचार /आइडियाज /प्रत्यय उल्लेखनीय हैं.. भाषा नहीं। अब हमारे पास इंटरनेट पर तत्क्षण किसी भी भाषा के अनुवाद की सुविधा उपलब्ध है। और समूचा विश्व एक ‘सामूहिक चेतना’ (कलेक्टिव कांससनेश) की ओर बढ़ रहा है। और विश्व, मानवता और उसके भविष्य के साथ ही ब्रह्मांड को समझने में हमारी यह सामूहिक चेतना बड़े काम की होगी। उन्होंने खुद अपना उदाहरण देते हुये कहा कि अकेले वे क्या एक अंतरिक्ष यान बना सकते थे। एक अकेला थक जायेगा मिलकर बोझ उठाना ही मानवता की असली शक्ति है। यह एक सामूहिक चेतना का ही प्रतिफल है कि मनुष्य मंगल पर बस्ती बसाने की ओर बढ़ चला है।
दोनों धुरंधरों के सवाल जवाब के बीच एक यह बात भी आई कि मानवता के सामने आज भी अनेक ऐसे सवाल हैं जिन्हें जाना तक नहीं गया है, पूछने की तो बात ही छोड़िये। उन सवालों की खोज जरुरी है। उन्हें पूछा जाना चाहिए। जो, जीवन का अर्थ और मकसद, हमारे वजूद, ब्रह्मांड की उत्पत्ति की जिज्ञासा जैसे अब तक पूछे जा रहे सवालों से अलग हो सकते हैं। आज हमारे पास उत्तर हैं मगर सवालों का टोटा है। सामूहिक चेतना के विस्तार से वे सवाल उद्घाटित हो सकते हैं जो हमारे अस्तित्व के लिये जरुरी होंगे।
उन्होंने अपने सभी उपक्रमों – स्पेस एक्स, टेस्ला और एक्स एआई का उदाहरण देकर सामूहिक चेतना के महत्व को बताया। भविष्य में सौर ऊर्जा की क्रांति का हवाला दिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारनामों का भी विस्तार से जिक्र किया। भविष्य में गहन अंतरिक्ष में एआई सैटेलाइट का खाका खींचा। बताया कि उनकी चालक रहित कार टेस्ला कैसे रीयल टाईम एआई उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। आप्टिमस नामी एआई रोबोट मानव जीवन में क्रांति लाने को उद्यत हैं। वे निजी रोबो की, सहायक रोबो की भूमिका निभायेंगे। और निकट भविष्य में ही हालात ऐसे होने लग जायेंगे कि मनुष्य को काम करने की जरुरत ही नहीं रहेगी। सारा काम धाम रोबो संभालेंगे। मनुष्य ठाठ करेगा। नौकरी एक शौकिया उद्यम होगी।
बातचीत में एलॉन ने अपने स्टारलिंक सैटेलाइट से इंटरनेट सेवा की चर्चा की जो सुदूर गांवों तक बेहतर पहुंच बनायेगा। हलांकि सैटेलाइट श्रृंखला से निकली लेसर बीम घने शहरों की आबादियों में भले ही रुकावटों का सामना करेगी मगर अनेक कुदरती हादसों – भूकंप ज्वालामुखी, भारी अग्निकांड और जल प्लावन में स्टारलिंक इंटरनेट बहुत काम का होगा। और सबसे बड़ी बात कि इसमें केबल टूटने से इंटरनेट प्रभावित होने जैसी कोई बात नहीं। यह उससे सर्वथा मुक्त है। रेड सी में इंटरनेट केबल टूटने से हुये कनेक्टिविटी व्यवधान का भी जिक्र उन्होंने किया। उन्होंने कहा कि मात्र 550 किमी ऊपरी आकाश में स्टारलिंक की इंटरनेट सैटेलाइट श्रृंखला में ‘लैटेंसी’ काफी कम है।
आगे की चर्चा में शहर की ओर पलायन में कमी आने की संभावना व्यक्त हुई। नौकरी आप्शनल होगी अनिवार्य नहीं। ऐसा परिदृश्य आगामी दशक तक सामने होगा। एलॉन ने धर्म के बिना भी नैतिकता की जरुरत पर जोर दिया। धर्म निरपेक्ष वैश्विक नैतिकता ऐसी हो जिसमें दूसरों के प्रति भावनात्मक आग्रह हो। ट्रीट अदर पीपुल ऐज यू वुड लाईक टू बी ट्रीटेट (सुखद संयोगात ऐसी भावना हमारे शास्त्रों में पहले से ही है – आत्मवत् सर्वभूतेषु’ का सिद्धांत मुख्य रूप से हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म में एक प्रमुख नैतिक सिद्धांत है)।
पोडकास्ट में एक बड़ी चिंता मानव – जनसंख्या के तेजी से घटते जाने की थी। यह अब 2.1 से कम की ओर उद्यत है। तो क्या मानव लुप्त हो जायेगा? शायद ऐसा न हो मगर हमारी सामूहिक चेतना संकुचित होती जायेगी जिसके बल पर मानव ब्रह्मांड विजेता होने का जज्बा पाले हुए है। इसलिये शायद हमारे लिये एक सकारात्मक भविष्य की संभावनायें क्षीण सी लगती हैं। हमें अपनी जनसंख्या अगर बढ़ानी नहीं तो एकदम से नीचे भी नहीं जाने देना चाहिए।
एक भयावह खतरा है एआई के दुरुपयोग का। जैसे प्रोपोगेंडा इंटरनेट पर चलाये जा रहे हैं, खुराफातियों ने यदि वैसा ही एआई को प्रोग्राम करना शुरु किया और जैसा होने लग गया है तो “एआई को झूठ सिखाने” के भयावह परिणाम होंगे। ऐसे में एआई मानवता की सेवा के बजाय उसके दुश्मन के रुप में आयेंगे। सच्चाई, सौंदर्यानुभूति और जिज्ञासा वे मूलभूत मानवीय विशेषतायें हैं जिन्हें एआई में आरोपित करना ही मानवता के लिए कल्याणकारी है।
बातचीत और कई मुद्दों को समेटे हुए थी जिसमें अमेरिका की इमिंग्रेंट नीति, भारतीय बौद्धिकता, एचबी1 वीसा नीति आदि रहे। विश्व के सामने टैलेंटेड लोगों की सदैव कमी रही है, ऐसा एलॉन ने कहा। शायद ट्रंप अमेरिकी टैलेंट के विस्थापन की कीमत पर अब आप्रवासियों को अमेरिका में न आने को लेकर सख्त हैं। मगर यह निर्णय विवेकपूर्ण होना चाहिए। क्योंकि भारतीय अमेरिका के आधुनिक डिजिटल संसार की कमान संभाले हुये हैं और एक से बढ़कर एक भारतीय मूल के दिग्गज यहां कितनी ही वर्ल्ड वाइड वेब कंपनियों के सीईओ हैं। यह बातचीत मुक्त ठहाकों के बीच चलती रही और मैं सोचता रहा कि कहीं मनोविनोदी वृत्ति कुशाग्र बुद्धियुक्त लोगों की एक खास पहचान तो नहीं?


