न्यूयॉर्क टाइम्स ने दिल्ली के प्रदूषण पर 2 दिसंबर 2025 को फ्रंट-पेज पर “Gasping for clean air” मतलब (साफ हवा के लिए हांफती दिल्ली) नामक शीर्षक से एक गंभीर रिपोर्ट छापी है। NYT ने अपनी पूरी मुख्य स्टोरी दिल्ली की जहरीली हवा और गंभीर प्रदूषण स्तर पर की है।
वरिष्ठ पत्रकार शकील अख्तर NYT की यह रिपोर्ट साझा करते हुए एक्स पर लिखा है-
रूस के राष्ट्रपति पुतिन आज दिल्ली आ रहे हैं और उधर अंतरराष्ट्रीय मीडिया दिल्ली के भयानक प्रदूषण पर पेज वन लीड खबरें छाप रहा है।
गोदी मीडिया क्या करे? वह तो इतना ही कर सकता है कि इन समस्याओं पर बात नहीं करे इन्हें छुपाने की कोशिश करे।
लेकिन वह न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर का खंडन तो नहीं कर सकता और ना ही यह बता सकता है कि प्रदूषण छोटे-छोटे मासूम बच्चों के फेफड़ों के लिए कितना फायदेमंद हो सकता है!
लेकिन हो सकता है हम गलत हों! मीडिया यह बताना शुरू कर दे कि इस प्रदूषण से छोटे बच्चों के फेफड़े कैसे मजबूत हो सकते हैं! गोदी मीडिया कुछ भी कर सकता है!
एक नजर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट पर…
नई दिल्ली। दुनिया के प्रतिष्ठित अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी इंटरनेशनल एडिशन की लीड स्टोरी में दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण को लेकर कड़ी चिंता जताई है। अखबार ने साफ लिखा है कि जैसे ही सर्दियां उतरती हैं, भारत की राजधानी एक बार फिर “जहरीली हवा में हांफने” लगती है।
रिपोर्ट का शीर्षक “Gasping for clean air” है और इसके साथ तीन बड़ी तस्वीरें प्रकाशित की गई हैं—एक में इंडिया गेट के पास धुंध में दौड़ता युवक, दूसरी में धुएँ के गुबार में घिरी सड़क, और तीसरी में स्मॉग के बीच स्कूल जाते बच्चे। NYT कहता है कि सुबह 6 बजे दिल्ली का PM2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से 20 गुना तक ऊपर था, जबकि 7:30 बजे यह 18 गुना और 8 बजे फिर 20 गुना तक पहुंच गया। अखबार के मुताबिक, राजधानी “एक विशाल गैस चैम्बर” जैसी महसूस होती है जहाँ लोग हर पल जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं।
रिपोर्ट में बच्चों को सबसे बड़ा पीड़ित बताया गया है। अखबार लिखता है कि सुबह स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे खतरनाक समय में सड़कों पर निकलते हैं, जब धुंध सबसे घनी और हवा सबसे ज्यादा विषैली होती है। NYT के मुताबिक, “बच्चों की लंबी कतारें बसों के बाहर खड़ी दिखती हैं, लेकिन उनका हर कदम प्रदूषण के नए खतरे के साथ है।”
सरकारी कदमों—जैसे एंटी-स्मॉग गन, पानी का छिड़काव, और वाहनों पर सीमित प्रतिबंध—का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन अखबार लिखता है कि हालात इतने गंभीर हैं कि इन उपायों का असर बहुत कम नजर आता है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, दिल्लीवासी सुबह उठते ही गले में जलन, आंखों में चुभन और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं से जूझते हैं। अखबार ने लिखा है कि “दिल्ली जहरीली धुंध में जागती है और उसी में रात बिताती है।”
अंतरराष्ट्रीय अखबार के इस कवर स्टोरी ने वैश्विक स्तर पर एक बार फिर दिल्ली के प्रदूषण संकट को दुनिया के सामने रख दिया है।


