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मीडिया हाउसेज़ में इंटर्नशिप की सच्चाई!

मेघा उपाध्याय-

मीडिया छात्रों का सबसे आम सवाल होता है— “क्या मीडिया में नौकरी पाने के लिए इंटर्नशिप ज़रूरी है?”

सच ये है— नहीं, इंटर्नशिप बिल्कुल ज़रूरी नहीं है (हाँ, मदद ज़रूर करती है)। कई फ्रेशर्स बिना किसी इंटर्नशिप अनुभव के भी नौकरी पा जाते हैं, खासकर जब कंपनियाँ कैंपस प्लेसमेंट में आती हैं या उम्मीदवार का इंटरव्यू/टेस्ट अच्छा होता है।

अगर मैं अपने अनुभव की बात करूँ— मैंने भी ABP में बिना एक दिन की इंटर्नशिप और बिना किसी इंटर्नशिप सर्टिफिकेट के जॉइन किया था। एकदम फ्रेशर के तौर पर हर चीज़ नौकरी के दौरान ही सीखी।

तो फिर इंटर्नशिप कितनी मदद करती है?

कभी करती है, कभी ज्यादा नहीं। बड़ी कंपनियाँ कभी-कभी इंटर्न को फुल-टाइम में ले लेती हैं, लेकिन ये बहुत कम होता है। हाँ, किसी बड़े ब्रांड की इंटर्नशिप छोटे या मिड-लेवल मीडिया हाउसेज़ में आवेदन करते समय काम आ सकती है।

सीखने की बात करें तो:इंटर्न बेसिक चीज़ें सीखते हैं, लेकिन फुल-टाइम जॉइन करने वाले फ्रेशर्स भी वही चीज़ें सीखते हैं। न्यूज़रूम इतना व्यस्त होता है कि बहुत गहराई से किसी को सिखाने का समय वैसे भी बहुत कम मिलता है।

अब आते हैं असली मुद्दे पर—इंटर्नशिप का स्टाइपेंड

यही सबसे कड़वी सच्चाई है। कई बड़े मीडिया हाउस हिंदी में ₹10,000 और इंग्लिश में ₹15,000 तक स्टाइपेंड देते हैं। कुछ इससे ज़्यादा भी देते हैं, लेकिन बहुत कम।

हक़ीक़त यह है कि अधिकांश जगहों पर इंटर्न को कुछ नहीं मिलता—नो स्टाइपेंड, फ्री लेबर। आम तौर पर इंटर्नशिप 1–3 महीने की होती है। बिना स्टाइपेंड वाली इंटर्नशिप 3 महीने से ज़्यादा बहुत कम चलती है।

तो वास्तव में नौकरी क्या दिलाती है?

  • आपका कॉलेज/इंस्टीट्यूट ब्रांड
  • आपका इंटरव्यू और टेस्ट
  • आपकी स्किल्स
  • और सबसे अहम… नेटवर्किंग

अगर आप किसी मजबूत संस्था से आते हैं, तो इंटर्नशिप ज्यादा मायने नहीं रखती—इंटरव्यू और परफॉर्मेंस ही सब तय करता है। अगर आप सामान्य कॉलेज से आते हैं, तो इंटर्नशिप मदद करती है—लेकिन उससे भी ज्यादा कनेक्शन काम आते हैं।

नेटवर्क बनाइए। लोगों से जुड़िए। इंडस्ट्री में खुद को लगातार विज़िबल रखिए।

मेरी सलाह

सीखना दोनों जगह होता है—चाहे आप इंटर्नशिप करें या सीधे नौकरी जॉइन करें। विकास इस पर निर्भर करता है कि आपकी सीखने की भूख कितनी है।

ज़्यादा मत सोचिए। काम सीखने की इच्छा हो, तो रास्ता खुद बन जाता है।

मेघा उपाध्याय एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं।

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