
महेंद्र मिश्र-
प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया चुनाव में पूरा पैनल जीत गया है। अध्यक्ष पद पर संगीता बरुआ ने चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ ही प्रेस क्लब की पहली महिला अध्यक्ष होने का उन्हें गौरव हासिल हो गया। उन्हें कुल 1019 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर जतिन गांधी ने बाजी मारी और उन्हें 1029 मत हासिल हुए। महासचिव पद पर मेरे पुराने मित्र और इलाहाबाद के साथी अफजल इमाम 948 वोटों के साथ विजयी रहे। जबकि पीआर सुनील कुमार और अदिति राजपूत क्रमश: संयुक्त सचिव और कोषाध्यक्ष के पद पर पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके थे।

मैनेजिंग कमेटी के भी सभी सदस्य भारी मतों से विजयी रहे। सभी जीते पदाधिकारियों और मैनेटिंग कमेटी के सदस्यों को बधाई और शुभकमानाएं। और हम उम्मीद करते हैं कि न केवल सभी लोग मिलकर प्रेस क्लब को सुचारू रूप से संचालित करेंगे बल्कि इस दौर में पत्रकारों के सामने आने वाली चुनौतियों का भी आगे बढ़कर मुकाबला करेंगे। और जरूरत के मुताबिक उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा और उनके ऊपर बढ़ते हमलों का भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। और हमेशा की तरह राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारों के आंदोलन का परचम भी अपने हाथ में उठाएंगे।
हालांकि इस बार संघ के लोगों ने अपना कोई पैनल नहीं दिया था। पिछले पांच सालों में तमाम तरकीबें आजमाने के बावजूद जब वो सफल नहीं हुए तो उन्होंने एक तरह से समर्पण की मुद्रा अपना ली है। हालांकि इस चुनाव में एक दूसरे तरीके से उन्होंने हस्तक्षेप करने की कोशिश ज़रूर की थी लेकिन पैनल और उसके नेतृत्वकारी साथियों ने उसे नाकाम कर दिया।
मैं हमेशा दिल्ली के प्रेस क्लब जाने से कतराती थी. किसी प्रोटेस्ट में तो फिर भी कभी-कभार गई हूं, लेकिन वैसे कभी नहीं जाती थी जिसके लिए प्रेस क्लब जाना जाता है.
तीन साल पहले मेरे एक सीनियर ने हम दो लोगों को खाने के लिए प्रेस क्लब चलने को कहा. मैंने तुरंत मना कर दिया. उन्होंने पूछा कि क्यों. मैंने कहा कि वहां का माहौल देखकर मुझे हिचक होती है.
मुझे लगता था कि प्रेस क्लब महिला पत्रकारों के लिए उपयुक्त नहीं है. लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक बार चलो, नहीं ठीक लगे तो तुरंत निकल लेंगे. मैं गई और मैंने देखा कि वहां महिला पत्रकार भी थीं, तो मुझे थोड़ा सहज महसूस हुआ.
मेरे सीनियर ने तब एक अच्छी बात कही कि ये प्रेस क्लब है और ये सिर्फ़ पुरुष पत्रकारों के लिए नहीं है. तुम भी इसका हिस्सा हो.
मुझे उस दिन समझ आया कि अपना स्पेस क्लेम करना क्यों ज़रूरी है. महिलाएं जाएंगी ही नहीं तो दिखेंगी कैसे. आज प्रेस क्लब को पहली महिला अध्यक्ष मिली है. मुबारक दिन!
वो क्या है ना कि अपना स्पेस क्लेम करना ज़रूरी है.
-सर्वप्रिया सांगवान


