अयोध्या, 2 अप्रैल 2026: Gautam Adani ने अयोध्या पहुंचकर अपने परिवार के साथ Shri Ram Temple में दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उनके साथ पत्नी Priti Adani, बड़े बेटे Karan Adani और बहू Paridhi Adani भी मौजूद थीं। यह मंदिर भगवान राम की जन्मभूमि पर स्थित है और आस्था, भक्ति तथा भारतीय सभ्यता की निरंतरता का प्रतीक माना जाता है।
अडानी का यह दौरा हनुमान जयंती के अवसर पर हुआ, जिसे उन्होंने बेहद भावनात्मक और गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह स्थल केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक एकता, निरंतरता और बढ़ते आत्मविश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने भगवान राम के आदर्शों—ईमानदारी, कर्तव्य और सेवा—को देश के भविष्य के मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।
मंदिर दर्शन के बाद अडानी Shri Nishulk Gurukul Mahavidyalaya पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों से संवाद किया। यह गुरुकुल 1935 में Swami Tyaganand द्वारा स्थापित किया गया था और Arya Samaj के सिद्धांतों पर आधारित है। यहां पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली के तहत छात्र आवासीय व्यवस्था में शिक्षा ग्रहण करते हैं।
अडानी ने गुरुकुल में एक ऐसे शैक्षणिक माहौल को देखा जहां अनुशासन, जिज्ञासा और मूल्यों के साथ शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा मूल्यों पर आधारित होती है, तो वह केवल व्यक्तियों को नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य को आकार देती है। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की कि Adani Foundation गुरुकुल में एआई आधारित लैब स्थापित करने में सहयोग करेगा, जिससे पारंपरिक शिक्षा और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
करीब 200 छात्रों वाले इस गुरुकुल में निशुल्क शिक्षा दी जाती है, जिससे शिक्षा सभी के लिए सुलभ और समावेशी बनी रहे। परिसर में गौशाला भी है, जो सांस्कृतिक, पर्यावरणीय और ग्रामीण जीवन मूल्यों के समावेश को दर्शाती है। इस संस्थान की ऐतिहासिक विरासत भी समृद्ध रही है, जहां Mahatma Gandhi और Subhas Chandra Bose जैसे महान व्यक्तित्व भी आ चुके हैं।
गुरुकुल में छात्रों द्वारा एक साथ संस्कृत श्लोकों का उच्चारण पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और अनुशासित बनाता है। अडानी ने छात्रों के बीच बैठकर इस अनुभव को महसूस किया और शिक्षकों से विस्तार से चर्चा की।
अडानी ने सेवा की अपनी विचारधारा “सेवा ही साधना है” को दोहराते हुए कहा कि सेवा केवल एक कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रति निरंतर समर्पण है। उनका यह दौरा भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और आधुनिक तकनीकी भविष्य के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।


