विवेक त्रिपाठी-
“हाथ में कैमरा, कंधे पर टंगा लाइव यू, तेज धूप, भीषण गर्मी, तपती सड़क पर दौड़भाग.. न पानी.. न छाया..” ऐसी होती है कैमरामैन की जिंदगी..
इन चुनौतियों के बावजूद कैमरामैन अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते.. मोर्चे पर डटे रहते हैं.. जान पर खेलकर विजुअल्स बनाते हैं.. फिर भले ही अस्पताल पहुंच जाएं..
आज पुरानी हाईकोर्ट बिल्डिंग के आसपास वकीलों के चेंबर हटाने के दौरान मेरे साथ कवरेज कर रहे कैमरामैन उबैद की भी जान पर बन आई..
दरअसल, भीषण गर्म मौसम में हम दो घंटे से कवरेज कर रहे थे. उबैद को डिहाइड्रेशन हो गया.. उसने मुझे बताया भी नहीं.. मैंने उसको थका और ढीला-ढाला देखकर थोड़ा टाइट किया.. उसने अपनी दिक्कत नहीं बताई और धीरे-धीरे अपना काम करता रहा..
कवरेज के दौरान दौड़-भाग खूब हो रही थी. कुल मिलाकर दो-ढाई किलोमीटर पैदल भी चलना पड़ा.. इधर से उधर.. उबैद पस्त हो गया.. थककर पेड़ की छाया ढूंढकर एक दोपहिया वाहन की गद्दी पर बैठ गया..
मैंने देखा तो समझ गया कि गर्मी लग गई है.. उबैद से मैंने कहा, “पानी लेकर आता हूं..”
मैं पानी की तलाश में पैदल ही चल पड़ा. हाईकोर्ट की बिल्डिंग के आसपास की सारी दुकानें बंद थीं.. संडे की वजह से हाईकोर्ट के सामने कलेक्ट्रेट में भी सन्नाटा था.. पानी ढूंढते हुए मैं राजस्व परिषद के पीछे स्थित रजिस्ट्रार ऑफिस से चलते हुए क्राइस्ट चर्च कॉलेज के ग्राउंड की तरफ बढ़ा.. आसपास कहीं ठेला तो दूर गुमटी तक खुली नहीं थी.. पानी ढूंढते-ढूंढते करीब एक किलोमीटर आगे बढ़ गया.. बुरी तरह से थक गया था.. पानी नहीं मिला.. न ही आगे मिलने की उम्मीद दिखाई दी तो मैं वापस लौटा..
वहीं, जहां उबैद को छोड़कर आया था..
उबैद की हालत बिगड़ गई थी.. बेहोशी की स्थिति में था.. इसी बीच एक वकील के हाथ में पानी की बोतल दिखी.. मैंने उनसे बोतल लेकर उबैद को दो घूंट पानी पिलाया.. लेकिन वो तेज-तेज सांसें ले रहा था.. उसकी आंखें पलट रही थीं.. अपने हाथ से सीने को थपथपा रहा था.. मैंने पूछा, “क्या हुआ!!” उसने कोई रिस्पांस नहीं दिया.. सिर्फ छटपटाता रहा..
इसी बीच स्कूटी से एक पत्रकार साथी आरके अग्रवाल वहां आ गए.. उबैद की हालत देखते ही उन्होंने कहा, “तुरंत अस्पताल चलो..” मेरे कुछ कहने से पहले ही उबैद को स्कूटी पर बैठा लिया.. उबैद ठीक से बैठ नहीं पा रहा था.. बेहोशी जैसी स्थिति के चलते बार-बार लुढ़क जा रहा था तो आरके अग्रवाल ने पास खड़े एक लड़के को उसे पकड़ कर बैठने को कहा.. तीनों लोग तुरंत कुछ ही दूर स्थित बलरामपुर अस्पताल पहुंचे.. उबैद को इमरजेंसी में भर्ती करा दिया..
डॉक्टर ने तुरंत बीपी चेक किया.. ईसीजी किया.. ग्लूकोज़ चढ़ाया, ऑक्सीजन दी, कुछ इंजेक्शन लगाए.. तब जाकर उबैद दो-ढाई घंटे बाद सामान्य हुआ..
साथियों, मौसम बड़ा प्रतिकूल है.. भीषण गर्मी है और काम भी करना है.. ऐसे में सभी पत्रकार साथियों से मेरा निवेदन है कि घर से निकलने से पहले पेट में कुछ डाल लें.. नाश्ता या भोजन जरूर करें..
अपने साथ हमेशा पानी की बोतल जरूर रखें.. ग्लूकोज़ का पैकेट भी रखें जिससे डिहाइड्रेशन न हो.. जल ही जीवन है..


