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मोदी ने टॉफी दिखाई मेलोनी को लेकिन खाई चित्रा त्रिपाठी ने!

चित्रा त्रिपाठी का एक वीडियो गुलाबी साड़ी में वायरल है। स्टूडियो के भीतर चित्रा हाथ में टॉफी पकड़कर पूछ रही हैं- मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है…? और फिर गप्प से गटक जाती हैं। चित्रा ने स्टूडियो में मेलोडी इसलिए खाई क्योंकि कल ही नरेंद्र मोदी का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह इटली की पीएम मेलोनी के साथ मेलोडी टॉफियों का पैकेट चमकाते हैं।

अब टॉफी चित्रा ने मोदी को खुश करने के लिए खाई या सवालों से भागते प्रधानमंत्री के लिए देश में फैली नकारात्मकता को बहलाने के लिए यह तो वही जाने। आप फिलहाल चित्रा का ये चित्रहार देखिए…


मनोज अभिज्ञान-

कल तक जो आदमी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल का जवाब देने से कतरा गया, वही आज जेब से टॉफी निकाल-निकालकर पूरे देश को नचा रहा है। और जनता भी कम अद्भुत नहीं है। घर में सिलेंडर का दाम देखकर माथा पकड़ लेगी, लेकिन शाम को टीवी पर बहस देखेगी कि टॉफी कौन सी थी? बेरोजगार लड़का नौकरी का फॉर्म भरते-भरते इंस्टाग्राम खोलता है और फिर तीन घंटे तक यही तय करता रहता है कि टॉफी दिखाने का एंगल सही था या नहीं।

कमाल यह नहीं है कि मोदी जी मुद्दे बदल देते हैं। कमाल यह है कि लोग बदल भी जाते हैं। देश में अस्पताल कम पड़ जाएं, स्कूल जर्जर हो जाएं, नौकरियां गायब हो जाएं, लेकिन बहस चलती रहेगी कि टॉफी विदेशी थी या स्वदेशी। विपक्ष भी बड़ा भोला प्राणी है। सरकार मुद्दा फेंकती है, विपक्ष उसे पकड़कर चबाने लगता है। मैं हमेशा कहता हूँ कि नरेंद्र मोदी सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें ऐसा प्यारा विपक्ष मिला। असल ताकत यह समझ लेने में है कि इस देश में आदमी को रोटी से ज्यादा तमाशा चाहिए। फिलहाल तो हालत यह है कि देश के करोड़ों लोग अपनी जेब टटोलते हुए भी उसी आदमी की जेब में झांक रहे हैं कि अगली टॉफी कब निकलने वाली है।

कमाल सिर्फ मोदी में नहीं है, कमाल उस भीड़ में भी है जो हर बार जेब कटने के बाद भी जादूगर से अगला करतब मांगती है। पेट्रोल महंगा, दाल महंगी, फीस महंगी, इलाज महंगा… लेकिन जनता का ध्यान वहीं है कि मेलानी ने टॉफी खाई कि नहीं?

देश की राजनीति अब नीतियों से नहीं, प्रॉप्स से चल रही है। जनता भी ऐसी प्रशिक्षित हो चुकी है कि उसे अस्पताल नहीं चाहिए, बस हर हफ्ते नया तमाशा चाहिए। सत्ता जानती है कि जिस दिन आदमी सवाल पूछने लगेगा, उसी दिन टॉफियां बेअसर हो जाएंगी। इसलिए टॉफी चलती रहनी चाहिए, कैमरा चमकता रहना चाहिए, और जनता अपने खाली बटुए में राष्ट्रवाद का रैपर डालकर खुश होती रहनी चाहिए।


अभी तक मुझे लगता था कि मोदी जी की IT Cell इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को लेकर बकवास किया करती है, सस्ती भद्दी बातें और मीम बनाती है – लेकिन आज समझ आया इस सारी सस्ती बातों के जनक ख़ुद नरेंद्र मोदी हैं
भीषण गर्मी में आम आदमी लाइन में लगा हुआ है
पेट्रोल डीजल गैस की किल्लत है, दाम भी बढ़ रहे हैं
ब्रेड से लेकर दूध तक महंगा हो गया है
खेती का सीज़न सिर पर है, किसान परेशान है
और 75 साल के प्रधानमंत्री मोदी 48 वर्षीय इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी के लिए Melody टॉफ़ी लिए टहल रहे हैं
मतलब क्या ही कहा जाये?! -सुप्रिया श्रीनेत

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