सुजीत सिंह प्रिंस-
गाजीपुर : मेडिकल कॉलेज से 23 मई 2026, शनिवार के दिन इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां अस्पताल में मरीजों का इलाज होना चाहिए, वहां कथित तौर पर “बाउंसर राज” चल रहा है। पीड़ित मनोज कुमार यादव ने इस मामले में कोतवाली में लिखित तहरीर देकर आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज में तैनात प्राइवेट बाउंसर अभिमन्यु सिंह ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की।
तहरीर के अनुसार, मनोज यादव अपनी चार साल की मासूम बेटी का इलाज कराने जिला अस्पताल स्थित मेडिकल कॉलेज पहुंचे थे। लेकिन इलाज की आस लेकर पहुंचे इस पिता को वहां इंसानियत नहीं, बल्कि डंडों की भाषा सुनाई गई। आरोप है कि बाउंसर अभिषेक सिंह ने सिक्योरिटी गार्ड का डंडा लेकर मनोज यादव को उनकी पत्नी और छोटी बच्ची के सामने पीटना शुरू कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दृश्य इतना भयावह था कि मासूम बच्ची अपने पिता को पिटता देख सहम गई और रोने लगी। एक तरफ बेटी अपने पिता को बचाने के लिए चीख रही थी, दूसरी तरफ अस्पताल परिसर में डंडे बरस रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो अस्पताल नहीं, किसी गुंडागर्दी का अड्डा हो।
सबसे बड़ा सवाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन और प्रिंसिपल आनंद मिश्रा पर उठ रहा है। जब अस्पताल में पहले से सिक्योरिटी गार्ड मौजूद हैं, तो आखिर किस नियम और अधिकार से “बाउंसर” रखे गए? क्या मेडिकल कॉलेज में मरीजों की सुरक्षा के नाम पर दबंगों को खुली छूट दी जा रही है?
पीड़ित का यह भी आरोप है कि उक्त बाउंसर पहले भी कई लोगों के साथ मारपीट कर चुका है। बावजूद इसके, उस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। अब इस घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और सवाल उठ रहा है कि क्या मेडिकल कॉलेज इलाज का केंद्र है या भय और हिंसा का नया ठिकाना?
हालांकि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल आनंद मिश्रा का कहना है कि “जांच टीम गठित कर दी गई है”, लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी, या उस चार साल की बच्ची की आंखों में उतर चुके डर और एक पिता के अपमान का भी न्याय होगा?
यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की पिटाई नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर तमाचा है जहां अस्पताल में मरीज इलाज के लिए नहीं, बल्कि अपमान और हिंसा सहने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
ज्ञात हो कि मेडिकल कालेज का प्रिंसिपल आनंद मिश्रा भयानक भ्रष्टाचारी है और उसकी सेटिंग ऊपर तक इतनी तगड़ी है कि शासन प्रशासन भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता!


