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कॉकरोच पार्टी के तीन तिलंगे : दूसरी नियुक्ति तो ज्यादा खतरनाक है!

News image showing three men; overlaid headline reads: 'Cockroach Janta Party appoints investigative journalist Saurav Das as chief spokesperson, names filmmaker Vijeta Dahiya and IIT Kanpur alumus Ashutosh Ranka as spokespersons' with The Jamia Times logo in the top-right.

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी संगठनात्मक टीम का विस्तार करते हुए खोजी पत्रकार सौरव दास को पार्टी का मुख्य प्रवक्ता (चीफ स्पोक्सपर्सन) नियुक्त किया है। इसके साथ ही राजनीतिक शोधकर्ता एवं फिल्मकार विजेता दहिया तथा सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ और आईआईटी कानपुर एलुमनी आशुतोष रांका को भी पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया है।

पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि ये तीनों नेता संगठन और उसके आंदोलनों का पक्ष जनता तथा मीडिया के सामने रखेंगे। यह तो रही तीनों प्रवक्ताओं की संक्षिप्त जानकारी, अब इन पर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव ने क्या कुछ लिखा है, नीचे पढ़िए…


तीन तिलंगे : Three Musketeers

-अभिषेक श्रीवास्तव-

आज नियुक्त काक्रोच वाले तीन प्रवक्ताओं का मामला बड़ा दिलचस्प है भाई। एक लड़का सौरव दास है जो कुछ साल तक आरटीआइ करता रहा है और उसके जवाब के आधार पर यहाँ-वहां कहानियाँ लिखता रहा। उसकी अपनी वेबसाइट सहित हर जगह उसे investigative journalist बताया जा रहा है, लेकिन पत्रकारिता में कायदे का उसका खाली एक काम यदि है तो कारवां में जस्टिस चंद्रचूड़ पर लिखी कवरस्टोरी।

अब इसके साथ संकट ये है कि इसे “2024 के चुनाव को रूपांतरित करने वाले 30 युवा भारतीयों” का एक पुरस्कार यंग इंडिया फाउंडेशन नाम की एक संस्था से मिला था। संकट इसलिए क्योंकि इस संस्था का जो प्रायोजक है, वही गुजरात में नरेंद्र मोदी द्वारा उनके कार्यकाल में शुरू किये कुख्यात vibrant गुजरात सम्मेलन का मेजबान भी है। नाम है मारवाड़ी यूनिवर्सिटी, जो खुद को गुजरात की सबसे बड़ी निजी यूनिवर्सिटी बताती है।

खैर, संयोग का क्या, लेकिन एक और दिक्कत यह चर्चा है कि इस लड़के को पिछले दिनों बोस्टन, अमेरिका की एक लेखा फर्म से कुछ लाख रुपये “नागरिक स्वतंत्रता” और “जन स्वास्थ्य” के मद में मिले हैं। बीते पाँच-छह साल में उभरे नए पत्रकारों को विदेश से अंडबंड फेलोशिप या धर्मार्थ दान के मद में खतरनाक एजेंडों के लिए पैसे मिले हैं ये सच है। हो सकता है सौरव को लेकर ये केवल चर्चा हो, लेकिन सेहतमंद नहीं है, हालांकि कुछ लोग स्क्रीनशॉट भी लगाए पड़े हैं। बोस्टन की फर्म का नाम है वाल्टर शुफैन। अब अकाउंट संभालने वाली कंपनी किसके सौजन्य से किसी को पैसा दे रही है, कौन जाने!

बहरहाल, दूसरी नियुक्ति ज्यादा खतरनाक है। नाम है आशुतोष रंका। ये लड़का दुनिया की बिग 4 में शामिल लेखा कंपनी मैकिंसी में काम कर चुका है। मैकिंसी के बारे में आप बहुत कुछ गूगल कर के जान जाएंगे। यह कंपनी बकायदे सरकारें पलटने का काम करती है ठेके पर।

मैकिंसी एंड कंपनी को अक्सर सरकारों के साथ घनिष्ठ संबंधों, हितों के टकराव और निरंकुश सत्ताओं के लिए काम करने के कारण राजनीतिक विवादों का सामना करना पड़ा है। दक्षिण अफ्रीका में सत्ता पर कब्ज़ा, कनाडा में गैर-प्रतिस्पर्धी संघीय अनुबंध, फ्रांस में सलाहकारों पर निर्भरता और चीनी सेना से कथित संबंधों के लिए फर्म की जांच की जा चुकी है।

तीसरा प्रवक्ता विजेता दहिया नाम का युवा है। इसके बारे में मैं ज्यादा नहीं जानता। कहते हैं कि ये ध्रुव राठी की स्क्रिप्ट लिखता है। क्या जाने! हाँ, एक बागी हरयानवी को मैं इंस्टा पर फॉलो करता हूँ, शायद उसका दोस्त है। एक बार देखा था दोनों नाच रहे थे धंदा न्योलीवाला के एक लोकप्रिय गाने पर: you have to raise your voice bro, there is no alternative choice bro! अब ये गाना तो मुझे भी पसंद है, लेकिन पता नहीं था कि इसकी कहानी इतनी लंबी हो जाएगी। बेहतर जानकारी तो Mandeep Punia ही दे पाएगा इनके बारे में।

क्या जाने 6 जून को दिल्ली में क्या होगा, जब काक्रोच प्रमुख आवेगा, लेकिन दूध के जलों को छाछ फूंक फूंक के ही पीना चाहिए। हर पीढ़ी का खून उबाल मारता है, लेकिन हर पीढ़ी एक जैसी ही गलती भी करती है। दिलचस्प ये है कि पिछली पीढ़ी वाले अपने समय से सबक नहीं लेते और ट्रैप में फंस जाते हैं। जैसे आज आजमगढ़ के किसान पुलिसिया उत्पीड़न के खिलाफ काक्रोच का पोस्टर लेकर सड़क पर उतर गए भाई राजीव यादव के नेतृत्व में। जाने या अनजाने, नई और वाइरल परिघटनाओं से थोड़ा बचना जरूरी है जमीनी आंदोलनकारियों के लिए।

2011 का अन्ना आंदोलन अभी इतनी भी पुरानी बात नहीं हुई। याद रखना चाहिए और अपने आसपास के जेन जी वालों को कहानियाँ सुनानी चाहिए कि भाई, ऐसे ही लोकप्रियतावादी उफान के चक्कर में देश दक्खिन लग गया था। अब तक लगा हुआ है। नहीं मानो तो थोड़ा नेपाल टहल आओ। साल भर पहले की ही कहानी है। एकदम ताजा ताजा!


Collage: three men posing on a stage with a cockroach-themed banner; bottom-left man with a beard; bottom-right logo shows a cockroach at a podium.

सोशल मीडिया से पैदा हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की कल दिल्ली में पहली प्रेस कांफ्रेंस हुई. उसमें पार्टी के तीन राष्ट्रीय प्रवक्ता अवतरित हुए. उन्होंने जो कुछ कहा, उससे पार्टी और उसके राजनीतिक विचारों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब तो नहीं मिला, हां सवाल जरूर कुछ बढ़ गये!
पार्टी के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य के बारे में प्रवक्ताओं ने कुछ भी खास नहीं बताया सिवाय इसके कि उनकी पार्टी सिस्टम को क्लीन करना चाहती है. अरे भाई, लेकिन ये सिस्टम को वह क्लीन कैसे करेगी? अभी तक पार्टी ने जो एजेंडा या मैनिफैस्टो पेश किया है, उसमें कुछ भी ऐसा नहीं है, जिससे इस नवगठित पार्टी के विचार या कार्यक्रम की साफ तस्वीर उभरती हो! प्रेस कांफ्रेंस में बताया गया कि पार्टी के अध्यक्ष या संस्थापक अभिजीत डिपके 6 जून को अमेरिका से दिल्ली आयेंगे और फिर एयरपोर्ट से अपने समर्थकों के साथ पुलिस स्टेशन जाकर उसी दिन होने वाले अपने प्रदर्शन की इजाजत मांगेंगे! जो लोग दिल्ली में सामाजिक कार्य या राजनीतिक कार्य करते हैं; उन्हें निश्चय ही यह जवाब अटपटा और हास्यास्पद लगेगा! अरे भाई, यहां के तय रिवाज के अनुसार 6 जून के प्रदर्शन के लिए दो-तीन दिन या एक सप्ताह पहले भी स्थानीय पी एस को सूचना दे सकते थे! ऐसा न करने के पीछे क्या कोई खास बात है? इस सवाल का भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला! बाकी के लिए थोड़ा इंतजार करना चाहिए. देखिये, सोशल मीडिया से जमीन पर उतरने के बाद ये जोशीले युवा किस किस्म के निकलते हैं!

-उर्मिलेश, वरिष्ठ पत्रकार

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