ब्रिटेन के सार्वजनिक प्रसारक BBC के पूर्व पत्रकार Sean McGinty को रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) से बड़ा झटका लगा है। सोशल मीडिया पर की गई पोस्टों के कारण नौकरी से निकाले गए मैकगिन्टी की अनुचित बर्खास्तगी (Unfair Dismissal) और दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव से जुड़ी याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दी हैं।
शॉन मैकगिन्टी करीब 22 वर्षों तक BBC Radio Lancashire में प्रस्तोता और प्रोड्यूसर समेत विभिन्न पदों पर काम कर चुके थे। BBC ने उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर की गई कई पोस्टों को लेकर बर्खास्त कर दिया था। BBC का कहना था कि उनकी पोस्टें संस्थान की सोशल मीडिया और संपादकीय आचार संहिता का उल्लंघन करती थीं।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि मैकगिन्टी ने ट्रांसजेंडर मुद्दों और हमास जैसे संवेदनशील विषयों पर कई विवादित पोस्ट की थीं। इसके अलावा उन्होंने BBC रेडियो 5 लाइव की एक टीम को ईमेल भेजकर एक प्रस्तोता के व्यवहार को “सोशियोपैथिक” बताया था। BBC ने इसे भी गंभीर कदाचार माना।
मैकगिन्टी ने अदालत में दलील दी कि उन्हें बचपन से ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) है और वह गंभीर चिंता (एंग्जायटी) से भी पीड़ित हैं। उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर उनका व्यवहार इन्हीं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का परिणाम था।
हालांकि न्यायाधिकरण ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मैकगिन्टी की दिव्यांगता और उनके द्वारा किए गए गंभीर कदाचार के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि BBC द्वारा की गई कार्रवाई उचित थी, क्योंकि संस्था के लिए निष्पक्षता (Impartiality) बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। अदालत ने कहा कि कोई पत्रकार सार्वजनिक रूप से पक्षपातपूर्ण और विवादित टिप्पणियां करता रहे और फिर भी BBC में अपनी भूमिका जारी रखे, यह स्वीकार्य नहीं हो सकता।
सुनवाई में यह भी सामने आया कि मैकगिन्टी को मार्च और नवंबर 2023 में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण अवकाश पर भेजा गया था। इस दौरान भी उन्होंने चेतावनी मिलने के बावजूद सोशल मीडिया पर पोस्ट करना जारी रखा। आखिरकार 25 जुलाई 2024 को उन्हें गंभीर कदाचार के आधार पर नौकरी से हटा दिया गया।
हालांकि ट्रिब्यूनल ने माना कि अनुशासनात्मक सुनवाई से पहले उनकी ADHD संबंधी मेडिकल रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी, लेकिन बाद में हुई अपील सुनवाई में इस पहलू पर विस्तार से विचार किया गया। इसलिए प्रक्रिया में हुई कमी को दूर मान लिया गया।
अदालत ने यह भी खारिज कर दिया कि BBC ने उनकी वापसी के दौरान उन्हें पर्याप्त सहयोग या आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराईं।
न्यायाधिकरण ने अंततः मैकगिन्टी की सभी प्रमुख दावों को खारिज करते हुए BBC के फैसले को सही ठहराया।


