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टाइम्स ग्रुप ने इन चार अखबारों से झाड़ा पल्ला, कहा- हमारा कोई लेना-देना नहीं!

देश के सबसे बड़े मीडिया समूहों में शामिल बेनेट, कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर चार प्रमुख प्रकाशनों से खुद को औपचारिक रूप से अलग बताया है। इनमें Pune Times Mirror, Ei Samay, NavGujarat Samay और Ahmedabad Mirror शामिल हैं।

एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, BCCL ने बुधवार को जारी नोटिस में स्पष्ट किया कि ये चारों प्रकाशन अब न तो BCCL, न उसकी सहयोगी कंपनी MMCL (Metropolitan Media Company Limited) और न ही समूह की किसी अन्य संबद्ध इकाई के नियंत्रण, संचालन या प्रकाशन के अधीन हैं।

क्या कहा BCCL ने?

कंपनी ने पाठकों, विज्ञापनदाताओं, कॉरपोरेट्स, एजेंसियों और अन्य हितधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि:

  • Pune Times Mirror, Ei Samay और NavGujarat Samay का विनिवेश (Divestment) किया जा चुका है।
  • Ahmedabad Mirror को लाइसेंस व्यवस्था के तहत संचालित किया जा रहा है।
  • इन प्रकाशनों की संपादकीय, प्रबंधकीय और परिचालन नीतियों पर BCCL या टाइम्स ऑफ इंडिया समूह का कोई नियंत्रण नहीं है।

BCCL ने यह भी कहा कि इन प्रकाशनों की संपादकीय सामग्री, व्यावसायिक गतिविधियों, प्रतिनिधित्व, आग्रह या उनसे जुड़े किसी भी व्यक्ति के आचरण के लिए समूह की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। कंपनी ने साफ किया कि इनके साथ किसी भी तरह का लेन-देन या व्यावसायिक संबंध संबंधित पक्षों का अपना निर्णय और जोखिम होगा।

अब यह स्पष्टीकरण क्यों?

रिपोर्ट के अनुसार, इन प्रकाशनों का विनिवेश या लाइसेंस पहले ही किया जा चुका था। इसके बावजूद आम पाठकों और विज्ञापनदाताओं के बीच यह धारणा बनी हुई थी कि ये अब भी टाइम्स ग्रुप का हिस्सा हैं।

एक वरिष्ठ BCCL अधिकारी ने एक्सचेंज4मीडिया से कहा कि इस सार्वजनिक नोटिस का उद्देश्य “ब्रांड एट्रिब्यूशन और संपादकीय संबद्धता को लेकर पैदा हुए भ्रम को दूर करना” था।

अधिकारी के मुताबिक, इन प्रकाशनों की संपादकीय नीतियां अब अलग हैं, लेकिन लोग उन्हें अब भी टाइम्स समूह का हिस्सा मान रहे थे। इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी हो गया था कि समूह की आधिकारिक संपादकीय नीति और इन प्रकाशनों के बीच कोई संबंध नहीं है।

विज्ञापन बाजार पर भी असर

मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि इस घोषणा का असर विज्ञापन जगत पर भी पड़ सकता है। स्थानीय और क्षेत्रीय बाजारों में इन प्रकाशनों की मजबूत पहचान रही है और कई विज्ञापनदाता इनके पीछे टाइम्स समूह की विश्वसनीयता और वितरण क्षमता को मानकर निवेश करते रहे हैं।

ऐसे में BCCL का यह सार्वजनिक स्पष्टीकरण विज्ञापन एजेंसियों और कॉरपोरेट जगत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अब उन्हें इन प्रकाशनों को स्वतंत्र इकाइयों के रूप में देखना होगा।

क्या है बड़ा संदेश?

BCCL का यह कदम केवल कानूनी दूरी बनाने का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे ब्रांड पहचान, संपादकीय जवाबदेही और कारोबारी जोखिमों की स्पष्ट सीमांकन प्रक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है। मीडिया जगत में इस बात की चर्चा है कि आखिर ऐसी सार्वजनिक घोषणा की जरूरत अब क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या परिस्थितियां रहीं।

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