जनतंत्र टीवी की पूर्व एंकर मीनाक्षी सिसौदिया ने चैनल के प्रधान संपादक जितेंद्र शर्मा पर श्रम आयुक्त कार्यालय में सुनवाई के दौरान भी तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। मीनाक्षी का कहना है कि मामले की सुनवाई के दौरान तथ्यों के बजाय भ्रामक और झूठी कहानियां प्रस्तुत की गईं।
मीनाक्षी सिसौदिया के अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय में उनके साथ बातचीत के दौरान पेशेवर आचरण का पालन नहीं किया गया। उनका आरोप है कि उनके लिए अपमानजनक और असम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि कई बार आपत्ति जताने के बावजूद संबोधन की भाषा नहीं बदली गई, जिससे एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंची।
मीनाक्षी ने यह भी आरोप लगाया कि जनतंत्र टीवी में कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान यानी पीआईपी का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने सुनवाई के दौरान बार-बार यह बात रखी कि पीआईपी मूल रूप से प्रदर्शन सुधारने का एक प्रबंधन उपकरण होता है, न कि अनुशासनात्मक कार्रवाई या नौकरी समाप्त करने का नोटिस।
मीनाक्षी के मुताबिक प्रधान संपादक जितेंद्र शर्मा पीआईपी को नोटिस की तरह बताते रहे, जबकि नोटिस और पीआईपी के बीच का अंतर समझाने में उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी। उनका दावा है कि कई बार समझाने के बाद ही इस अंतर को स्वीकार किया गया।
पूर्व एंकर ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भांजे की मृत्यु जैसी पारिवारिक आपात स्थिति को भी सुनवाई के दौरान कमतर दिखाने की कोशिश की गई। उनका कहना है कि इससे उनकी भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची।
मीनाक्षी सिसौदिया ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने अधूरे फुल एंड फाइनल सेटलमेंट की गणना और उसका विस्तृत ब्योरा ईमेल के माध्यम से मांगा था। उनके अनुसार अब श्रम विभाग ने भी संबंधित पक्ष से उसी कैलकुलेशन और ब्रेकअप की मांग की है।
गौरतलब है कि यह सभी आरोप मीनाक्षी सिसौदिया की ओर से लगाए गए हैं। मामले में जनतंत्र टीवी प्रबंधन और प्रधान संपादक जितेंद्र शर्मा का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।


