तेलंगाना के 570 लोगों पर हुई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा, विटामिन D, B2, B6 और B12 की कमी वालों में डिमेंशिया का जोखिम ज्यादा मिला
भारत में तेजी से बदलती जीवनशैली और खराब खानपान का असर अब सीधे दिमागी सेहत पर भी दिखने लगा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन की एक नई रिसर्च में पाया गया है कि कुछ जरूरी विटामिनों की कमी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती है। यह अध्ययन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में तेलंगाना के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 570 लोगों को शामिल किया गया जिनकी उम्र 40 से 80 वर्ष के बीच थी। शोधकर्ताओं ने उनके ब्लड सैंपल, खानपान की आदतों और दिमागी क्षमता का मूल्यांकन किया। अध्ययन में पाया गया कि करीब 40 प्रतिशत प्रतिभागियों में भविष्य में डिमेंशिया विकसित होने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक था।
रिसर्च के दौरान यह सामने आया कि जिन लोगों में विटामिन D, विटामिन B2, विटामिन B6 और विटामिन B12 की कमी थी, उनमें डिमेंशिया से जुड़े जोखिम कारक ज्यादा पाए गए। वहीं जिन लोगों का भोजन विविधतापूर्ण था और जिनके आहार में फल, हरी सब्जियां तथा अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद थे, उनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम देखा गया।
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों में विटामिन की कमी और डिमेंशिया का जोखिम शहरी लोगों की तुलना में अधिक था। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, धूम्रपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसे कारक भी जोखिम बढ़ाने वाले तत्वों के रूप में सामने आए।
आईसीएमआर-एनआईएन के वैज्ञानिक डॉ. जी. भानुप्रकाश रेड्डी के अनुसार भारत की बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2050 तक डिमेंशिया के मामलों में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। ऐसे में पोषण और संतुलित आहार को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की जरूरत है।
हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल विटामिन की कमी और डिमेंशिया के जोखिम के बीच संबंध दिखाता है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि केवल विटामिन की कमी ही डिमेंशिया का सीधा कारण है। इसके लिए आगे और दीर्घकालिक शोध की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित भोजन, पर्याप्त धूप, नियमित व्यायाम, फलों और सब्जियों का सेवन तथा जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से विटामिन सप्लीमेंट लेना दिमागी सेहत को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकता है।
स्रोत: ICMR-NIN अध्ययन, The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित शोध।


