संजय शर्मा-
मैंने जितनी उम्मीद की थी, गवर्नर उससे कई गुना बेहतर फिल्म निकली.
फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी अद्भुत टाइमिंग है. जिस समय देश में सोने के भंडार और आर्थिक फैसलों को लेकर बहस चल रही है, ठीक उसी समय इतिहास के पन्नों से वह कहानी निकलकर बड़े पर्दे पर आ गई है, जिसने चंद्रशेखर जी के प्रधानमंत्री काल में पूरे देश को झकझोर दिया था.
यह सिर्फ एक राजनीतिक घटना की कहानी नहीं है, बल्कि उस दौर की चुनौतियों, मजबूरियों और देश को आर्थिक संकट से निकालने की कोशिशों का जीवंत दस्तावेज़ है.
और मनोज वाजपेयी… उनके बारे में क्या कहूँ! उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वे भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े अभिनेताओं में क्यों गिने जाते हैं.
फिल्म देखते हुए बार-बार यही लगा कि यह किरदार उनके अलावा शायद कोई और निभा ही नहीं सकता था. उन्होंने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि उस चरित्र को पूरी तरह जी लिया है.
अदा शर्मा का काम भी विशेष रूप से प्रभावित करता है. शायद इसलिए भी कि उन्होंने एक पत्रकार की भूमिका निभाई है और पत्रकारिता मेरे अपने पेशे से जुड़ी हुई है.
इसलिए उनके अभिनय को देखते हुए बार-बार लगा कि उन्होंने इस किरदार को समझने और महसूस करने में काफी मेहनत की है.
उनके हाव-भाव, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस बेहद स्वाभाविक लगती है. उन्होंने यह साबित किया है कि वह सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाओं तक सीमित अभिनेत्री नहीं हैं, बल्कि गंभीर और चुनौतीपूर्ण किरदारों को भी पूरी मजबूती के साथ निभा सकती हैं.
फिल्म का लेखन, निर्देशन और प्रस्तुति दर्शकों को अंत तक बाँधे रखते हैं। लंबे समय बाद ऐसी फिल्म देखने को मिली जो मनोरंजन के साथ-साथ इतिहास और राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय को समझने का अवसर भी देती है.
कल से यह फिल्म सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है. अगर आप अच्छी फिल्मों, इतिहास और राजनीति में रुचि रखते हैं, तो यह फिल्म बिल्कुल मिस नहीं करनी चाहिए.
संयोग देखिए, दो दिन पहले ही मुझे मनोज वाजपेयी जी के साथ एक लंबा और बेहद दिलचस्प पॉडकास्ट करने का अवसर मिला. इस बातचीत में उन्होंने अपने संघर्ष, अपने जीवन, अभिनय और गवर्नर से जुड़े कई ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जिन्हें सुनना किसी भी सिनेमा प्रेमी के लिए बेहद दिलचस्प होगा.


