साल 2015 में मोदीजी ने एक स्कीम लॉन्च की थी। नाम था प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)। लेकिन मोदीजी की ये स्कीम स्कैम का सबसे बड़ा जरिया बन गई।
इस स्कीम के तहत 2015 से 2022 के बीच 10,194 करोड़ रुपये खर्च किए गये। अब इस स्कीम की सीएजी रिपोर्ट सामने आई है।
पीएमकेवाई नामक इस योजना से टोटल 95 लाख बच्चे ट्रेंड हुए। लेकिन आप सोच भी नहीं सकते इसमें किस लेवल का फ्रॉड हुआ है। जिसमें बैंक अकाउंट के जरिए स्कैम को अंजाम दिया गया।
दरअसल, योजना के तहत सभी बच्चों के बैंक अकाउंट में 500-500 रुपये दिए जाने थे। 95 लाख लोगों में 90 लाख लोगों का बैंक अकाउंट नंबर लिखा ही नहीं गया था।
अब बचे 5 लाख लोगों का बैंक अकाउंट लिखा गया उसमें भी 52 हजार लोगों का बैंक अकाउंट नंबर बार बार रिपीट किये गये थे। इसी तरह की हेराफेरी फोन नंबर और ई-मेल आईडी में भी पाया गया।
योजना में शामिल एमएनपी कंपनी ने 10 हजार लोगों को ट्रेंड किया था। सभी बच्चों की ग्रुप फोटो भी साझा की गईं थीं। लेकिन कंपनी ने एक ही तस्वीर को कई कई एंगलों में बदलकर साझा कीं। वही फोटो बिहार की, वही फोटो यूपी और राजस्थान की बताकर चेंप दी गईं।
इसी तरह का फर्जीवाड़ा प्रेजेंट मीडिया प्राइवेट लि. नामक कंपनी के जरिए किया गया। सबसे मजेदार कहानी है सर्वे करने वाले अधिकारी की। जिसने एक ही दिन में कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में जाकर इंस्पेक्शन कर लिया।
पूरी कहानी इस लिंक पर देखें- PMKVY महाघोटाला
अब इस भाई को कौन समझाए कि अमृतकाल में भ्रष्टाचार नहीं होते। यह स्कैम नहीं, राष्ट्र निर्माण का मोदी मॉडल है। मैं तो कहता हूँ ये बंदा एंटी नेशनल है, इसकी बातें एंटी नेशनल है और जिस कैग रिपोर्ट को कोट किया जा रहा, वो भी एंटी नेशनल है।
वैसे एक मजेदार आइडिया आया है। क्यों न अब स्कैम/घोटाले का नाम बदलकर राष्ट्र निर्माण कर दिया जाए। आखिरकार सब घोटालेबाजों को जाना अंततः बीजेपी में ही है, तो राष्ट्रभक्त प्रमाणन स्वतः हो ही जाना है। अच्छा रहे कौशल विकास योजना में एक कौशल घोटाला भी ऐड कर दें।
-सुभाष सिंह सुमन


