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सुख-दुख

ये मेरी पत्नी कंचन की आखिरी सेल्फी है; जिसे लखनऊ के अपोलो हॉस्पिटल और एक पद्मश्री अवार्ड पाए डॉक्टर ने मार डाला!

Woman in a patterned hospital gown seated in a clinical room with an IV stand behind her.
Poster honoring late Smt. Kanchan Gupta with her portrait framed in gold, candles and flowers surrounding it, for a memorial anniversary.

पुनीत गुप्ता-

ये सेल्फी मेरी पत्नी स्वर्गीय कंचन गुप्ता द्वारा आज से ठीक दो माह पूर्व 21 अप्रैल को अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ में केवल कुछ घंटों के लिए एडमिट होने के दौरान ली गईं थीं। ये उनके स्वयं के द्वारा ली गई आख़िरी फ़ोटो हैं। शायद सेल्फी लेते समय उन्हें किंचित मात्र भी यह अहसास नहीं हुआ होगा कि यह उनकी आख़िरी सेल्फी बन जाएगी।

हम पेट में दर्द के बाद “पित्त की थैली की जगह पर पथरी“ डायग्नोज होने पर एक सुपर स्पेशियल्टी हास्पिटल में एक पद्मश्री एवार्डी डॉक्टर से ऑपरेशन का तरीका व उनका ऑपरेशन का स्टीमेट (सम्भावित खर्च) पता करने गए थे।

पद्मश्री एवार्डी डॉक्टर व एक नामी हॉस्पिटल में जाने के फ़ैसले ने मेरा जो हश्र किया है वो आप सभी से साझा कर रहा हूँ –

पहले दिन – डायग्नोज में गलती

ग़लत डायग्नोज के आधार पर की गई प्रक्रिया ई आर सी पी (इण्डोस्कोपी) के दौरान अन्दर आँत में कट लग जाना।

दूसरा दिन – बिना सीटी स्कैन व बिना ऑपरेशन के जनरल वार्ड में भर्ती रखना

तीसरा दिन – शरीर में इंफ़ेक्शन व अन्दरूनी दिक़्क़तें बढ़ने पर सीटी स्कैन, पेट में ड्रेन नली व आई सी यू में शिफ़्ट

पाँचवाँ दिन – पहले दिन डाले गए ग़लत स्टंट को निकाल कर बड़ा मैटल स्टंट डाला

आठवाँ दिन – रात पेट का एक बड़ा ऑपरेशन और पेट से इंफ़ेक्टेड फ्लूड निकालने के लिए 5 जगह से ड्रेनेज नली व लिक्विड फ़ूड देने के लिए आँत से जुड़ा फ़ूड पाइप डाला

तेरहवाँ दिन – एक नस से फ्लूड बैग में प्योर ब्लड आने पर इंज्योग्राफी की तरह नस को ब्लॉक करना

मुख्य मंत्री जन सुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने पर मरीज़ का इलाज अगले 25-30 दिन तक चलने व प्रतिदिन ₹1.25 -1.5 लाख का खर्च आने की जानकारी हॉस्पिटल द्वारा देना

अभी तक ₹17 लाख से ज़्यादा का बिल बन चुका है और लगभग ₹ 40 लाख और व्यवस्था करने के लिए कहना

जबरन मेडिकल कॉलेज या पीजीआई में रेफर करने की कोशिश

सोलहवाँ दिन- जबरन पीजीआई रेफर व लामा साइन कराना

सत्रहवाँ दिन से तीसवाँ दिन – पीजीआई में लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट, धीमें धीमें हार्ट, लिवर, लंग्स, किडनी, पैनक्रियाज सब कुछ सपोर्ट पर।

20/05/26 को पूरे एक महीने के संघर्ष के बाद शाम को सभी संघर्षों से उन्हें मुक्ति मिल गई और वह वह इस नश्वर संसार को छोड़कर प्रभुचरणों में विलीन हो गईं।

और मृत्यु का कारण बना पांचवें दिन अपोलो के डॉक्टर द्वारा डाला गया मैटल स्टंट जो ग़लत जगह डाल दिया गया था जिसका उपचार किसी के पास नहीं था।

Family of five wearing jackets stands on a dock with ferries in the background at a harbor.
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