बिहार पुलिस ने NEET-UG पुनर्परीक्षा में धांधली और नकल कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। मामला लखीसराय जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों से जुड़ा है, जहां संगठित तरीके से फर्जी अभ्यर्थियों के माध्यम से परीक्षा दिलाने की साजिश रची जा रही थी।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए लोगों में 9 सॉल्वर (फर्जी अभ्यर्थी), एक वास्तविक उम्मीदवार, दो सहयोगी तथा बायोमेट्रिक सत्यापन कार्य में लगे 18 कर्मचारी शामिल हैं। कार्रवाई केंद्रीय विद्यालय, केआरके हाई स्कूल समेत जिले के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर की गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि पकड़े गए सॉल्वरों में कई एमबीबीएस छात्र और छात्राएं शामिल हैं, जो असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से 10 से 12 लाख रुपये तक की रकम वसूलता था।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक बायोमेट्रिक सत्यापन में तैनात कुछ कर्मचारियों की भी इस पूरे खेल में मिलीभगत थी। आरोप है कि वे पैसे लेकर वास्तविक उम्मीदवारों की पहचान छिपाने और फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने में मदद कर रहे थे।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और वित्तीय लेनदेन के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
पुष्य मित्र-
प्रश्न पत्र हवाई जहाज से मंगाए गए। हमारे मुख्यमंत्री बेहतर परीक्षा करवाने के लिए तीन रात सोए नहीं। मगर खेला जमीन पर हो गया। वह भी पुराने स्टाइल में। पटना में 30-35 साल पहले भी ऐसे ही सेटिंग होती थी। मेडिकल के छात्र दूसरों के बदले एग्जाम देते थे, एग्जाम दे देकर अपनी पढ़ाई की फीस जुटाते थे। पहले फोटो मिक्स कराया जाता था, हस्ताक्षर मिलान की प्रैक्टिस होती थी। इस बार सीधे बायोमेट्रिक्स वालों को मिला लिया गया।
लखीसराय में ऐसे एक दो नहीं नौ परीक्षार्थी पकड़े गए हैं। सभी मेडिकल के छात्र हैं। 21 बायोमैट्रिक्स कर्मी समेत कुल 30 गिरफ्तारियां सिर्फ लखीसराय जिले से हुई है। और यह सिर्फ शुरुआत है।
प्रभात खबर ने रिपोर्ट प्रकाशित की है कि हर जिले में ऐसे स्कॉलर परीक्षा में बैठे थे। एक सीट की कीमत 60 लाख थी और हर स्कॉलर को 25 लाख मिलने थे। लगभग 200 ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनके बदले फर्जी परीक्षार्थियों के बैठने का अनुमान है। बाकी जानकारी पुलिस की इस प्रेस विज्ञप्ति में।
उड़ती चिड़िया को हल्दी लगाना इसे कहते हैं…कैसे सिस्टम में सुराग कर दिया। देश भर में NEET री एग्जाम होता रहा। हवाई जहाज से पेपर आते रहे, यहां जमीन पर ही खेला हो गया। भला हो लखीसराय पुलिस का, जिसने बहादुरी का काम किया।
तीन FIR और 30 गिरफ्तार। इससे बढ़िया उद्भेदन क्या होगा। इससे पहले भी पटना पुलिस ने तीन साल पहले पूरा मामला खोला था। बिहार से झारखंड तक गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन तब कुछ एक्शन नहीं हुआ था।
अब सोचिए, सॉल्वर गैंग की इतनी मजाल, सिस्टम में ही छेद कर दिया। बायो मैट्रिक तक बदलवा दिया।
-शैलेंद्र कुमार





