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137 करोड़ का मौसम मशीन स्कैम : क्या तत्कालीन OSD डॉ. मनोज कुमार थे पूरी ‘डील’ के सूत्रधार? दस्तावेज़ों से उठे कई सवाल!

IMD ने कहा- मशीनें गलत डेटा दे रही हैं, भुगतान रोकिए… लेकिन आपदा प्रबंधन के अफसरों ने कंपनी पर लुटा दिए 137 करोड़ रुपये!

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित 137 करोड़ रुपये के मौसम मशीन स्कैम की परतें अब धीरे-धीरे खुलती दिखाई दे रही हैं। सरकारी दस्तावेज़, शिकायतें और विभागीय पत्राचार कई ऐसे सवाल खड़े कर रहे हैं, जिनके केंद्र में तत्कालीन राहत आयुक्त कार्यालय में तैनात OSD डॉ. मनोज कुमार का नाम बार-बार सामने आ रहा है।

मामला सिर्फ खराब मशीनों का नहीं है। सवाल यह है कि जब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने साफ-साफ लिख दिया था कि ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) और ऑटोमेटिक रेन गेज (ARG) सही डेटा नहीं दे रहे हैं, तब आखिर 137 करोड़ रुपये का भुगतान किसके इशारे पर किया गया?

IMD ने कहा- मशीनें गलत हैं, भुगतान मत कीजिए

मौसम विज्ञान विभाग ने राहत आयुक्त कार्यालय को लिखित रिपोर्ट देकर बताया कि मशीनें वास्तविक मौसम की जगह गलत आंकड़े भेज रही हैं। कहीं 44 डिग्री तापमान को 50 डिग्री से अधिक दिखाया जा रहा था तो कहीं हल्की फुहार को भारी बारिश दर्ज किया जा रहा था। विभाग ने स्पष्ट सुझाव दिया कि पहले सत्यापन कराया जाए, उसके बाद ही भुगतान पर विचार किया जाए।

लेकिन आरोप है कि इस चेतावनी को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और कंपनी को लगभग 137 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया।

झांसी के होटल में क्या हुई थी ‘डील’?

दिल्ली के अधिवक्ता अभिषेक सिंह द्वारा की गई शिकायत में दावा किया गया है कि 3 अक्टूबर 2024 को झांसी के एक होटल में तत्कालीन राहत आयुक्त भानुचंद्र गोस्वामी, उनके OSD डॉ. मनोज कुमार और कंपनी के एमडी के बीच बैठक हुई। शिकायत में आरोप है कि इसी बैठक में भुगतान का रास्ता साफ किया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मशीनें भुगतान योग्य नहीं थीं, फिर भी करोड़ों रुपये जारी कर दिए गए।

सिर्फ मौसम मशीन स्कैम नहीं, शिकायतों की पूरी फाइल

भड़ास को मिले दस्तावेज़ बताते हैं कि डॉ. मनोज कुमार के खिलाफ यह अकेली शिकायत नहीं थी।

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के रिकॉर्ड बताते हैं कि उनके खिलाफ प्राप्त शिकायतों को शासन स्तर पर गंभीरता से लिया गया और जांच के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया।

दस्तावेज़ों के अनुसार—

  • उनकी प्रतिनियुक्ति पर सवाल उठाए गए।
  • भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए।
  • जनप्रतिनिधियों से अभद्र व्यवहार की शिकायतें की गईं।
  • अनुशासनहीनता के आरोप लगाए गए।
  • सूचना विभाग से जुड़े कई अधिकारियों और शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

11 फरवरी 2026 को सूचना निदेशक कार्यालय ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पत्र भेजकर अभिषेक सिंह, अंकिता भाटी, मोहित सिंह और सुरेश राही सहित विभिन्न शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई करने का अनुरोध भी किया।

140 करोड़ की योजना कैसे बनी सवालों के घेरे में?

प्रदेश सरकार ने लगभग 140 करोड़ रुपये की लागत से पूरे उत्तर प्रदेश में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमेटिक रेन गेज लगाने का निर्णय लिया था। यह परियोजना किसानों, आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई थी।

लेकिन जांच रिपोर्टों में सामने आया कि—

  • सेंसर खराब थे।
  • कैलिब्रेशन समय पर नहीं हुआ।
  • मेंटेनेंस नहीं हुआ।
  • कई मशीनें गलत डेटा भेज रही थीं।
  • कंपनी ने निर्देशों के बावजूद सुधार नहीं किए।
  • फिर भी भुगतान होता रहा।
सबसे बड़ा सवाल

यदि मशीनें खराब थीं…

यदि IMD ने भुगतान रोकने की सलाह दी थी…

यदि कंपनी ने टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया…

यदि विभागीय अधिकारियों ने लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं…

तो आखिर 137 करोड़ रुपये किसके दबाव में जारी हुए?

क्या राहत आयुक्त कार्यालय में बैठे कुछ अधिकारियों ने पूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया?

क्या झांसी की कथित होटल बैठक महज संयोग थी?

क्या करोड़ों रुपये के इस भुगतान के पीछे कोई संगठित तंत्र काम कर रहा था?

अब जवाब किसे देना होगा?

अब निगाहें जांच एजेंसियों पर हैं। दस्तावेज़ एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। सवाल यह है कि क्या मौसम मशीन स्कैम की असली कहानी कभी सामने आएगी, या फिर 137 करोड़ रुपये का यह मामला भी सरकारी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा?

भड़ास इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज़, शिकायतें और नए खुलासे लगातार प्रकाशित करता रहेगा।


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