संजय कुमार सिंह
दि एशियन एज की आज की लीड सबसे अलग है। इस खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि 11 साल में सरकार ने डिजिटल इंडिया बनाने के लिए जो जोर लगाया है उससे भारत बदल गया है। खबर के अनुसार इससे शासन पुनर्पारिभाषित हुआ है और नागरिकों का सशक्तिकरण हुआ है। मुझे लगता है कि यह दावा कुछ लोगों के लिए सही होगा और यह निजी अनुभव की बात है। कुछ लोग प्रधानमंत्री की बातों पर यकीन कर लेंगे और यह अच्छा प्रचार साबित होगा। लेकिन आज ही खबर है, सरकार ने व्हाट्सऐप्प के यूजरनेम फीचर को रोक दिया है। खबरों के अनुसार, व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर आपकी प्राइवेसी को अगले स्तर पर ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी मदद से आप अपना मोबाइल नंबर छिपाकर भी दूसरों से चैट कर सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार का मानना है कि मोबाइल नंबर छिप जाने से अपराधियों को एक नई और गुप्त पहचान मिल जाएगी। इससे डिजिटल अरेस्ट स्कैम, ऑनलाइन ठगी और फिशिंग जैसी आपराधिक घटनाओं में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि जालसाजों को ट्रैक करना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे जैसे अभी सब ट्रैक कर लिए जाते हैं और व्हाट्सऐप्प पुलिस या सरकार को भी नंबर नहीं देगा। मुझे लगता है कि सरकार को आपकी सुविधा से दिक्कत है। तकनीक का लाभ आपको मिले या नहीं उसकी चिन्ता वह करती है लेकिन जो नुकसान हो रहे हैं उसे रोक पाने में उसकी योग्यता या इच्छाशक्ति संदिग्ध है। दूसरी ओर, दैनिक भास्कर की लीड है, मिशन 360 : अब डीएमके, सपा, एनसीपी में भी सेंध लगाने की तैयारी। अगर भारत बदल ही रहा है तो इस जबरदस्ती की क्या जरूरत और नहीं बदल रहा है तो बेहतरी के लिए काम कौन करेगा? जो भी हो, डिजिटल इंडिया की सच्चाई हम डिजिटल ठगी, लूट और अरेस्ट के रूप में भी जानते हैं। यह भी कि डिजिटल इंडिया के लिए इंटरनेट जरूरी है और सेवा प्रदाओं में प्रमुख जियो का कनेक्शन दक्षिण दिल्ली के एक मोहल्ले के उपभोक्ता का 30 जून से खराब है। अभी तक ठीक नहीं हुआ है। रात में शिकायत करने पर 15 मिनट में ठीक करने का आश्वासन था लेकिन कल दिन भर कुछ नहीं हुआ। रात में मैसेज आया कि कल यानी शुक्रवार रात 3 जुलाई 9:40 तक अपडेट मिलेगा। जहिर है ऐसा सबके साथ नहीं होता होगा और होने लगे तो जीना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन हो रहा है और इसका पता तब चला जब मैंने एक्स पर लिखा, दक्षिण दिल्ली के एक मोहल्ले में हूं। जियो का कनेक्शन 30 जून से खराब है। कल दिन भर कुछ नहीं हुआ। रात में मैसेज आया कि कल (शुक्रवार) रात 3 जुलाई 9:40 तक अपडेट मिलेगा। जियो कमाल है। विकास तो हुआ है। डिजिटल इंडिया में तो गजब का! जाहिर है, शिकायत पर अपडेट संभवतः 72 घंटे में दिया जाता है जबकि गाजियाबाद के वैशाली में मेरे पास जमाने से एयरटेल का कनेक्शन है। पूरा गांव भाई लोगों ने खोद डाला है पर इंटरनेट एकाध बार बंद हुआ तो मैसेज तुरंत आया बिना शिकायत। कुछ घंटे में ठीक भी हो गया। पर जियो कमाल है। शिकायत पर कार्रवाई होनी नहीं थी क्योंकि मैंने अपना लोकेशन नहीं बताया था, जियो आईडी का विवरण तो नहीं ही दिया थ। लेकिन शिकायतें दो-चार ही होतीं तो ठीक किया जा सकता था, प्राथमिकता मिल सकती थी। लेकिन वे मुझसे आईडी मांग रहे हैं जो मेरे पास नहीं है और इसके बिना डिजिटल इंडिया में (शायद) कुछ हो नही सकता।
प्रधानमंत्री जब डिजिटल इंडिया की तारीफ कर रहे हैं तब दैनिक भास्कर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रो का एक लेख छापा है, हमें बच्चों को डिजिटल दुनिया से बचाना होगा। हमारे यहां बच्चे पर्चे लीक और बेरोजगारी से परेशान हैं। नीट की परीक्षा में सेना को भी लगाना पड़ा। फिर भी खबर आई कि बिहार में दूसरे लोगों ने परीक्षा दी। बच्चे ऐसे शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं है और यह ज्यादातर शिकायतों के मामले में है। शासन प्रशासन की हालत यह है कि 12,000 करोड़ रुपए के बने दिल्ली – देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल को किया और एक जुलाई को इसमें भयानक गड्ढे हो गए। पहली बारिश भी नहीं झेल पाया। यह और चाहे जो हो, भ्रष्टाचार तो है ही। फिर भी सरकार का दवा है कि, ….शासन पुनर्पारिभाषित हुआ है। असल में पत्रकारिता और नैतिकता पुनर्पारिभाषित हुई है। द हिन्दू की लीड के अनुसार, पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बुधवार को कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें ₹183.5 तक घटा दीं और 5-किलो फ्री-ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें ₹13 तक घटाई, जो चार महीने से चले आ रहे पश्चिम एशिया संघर्ष के संभावित अंत के साथ एलपीजी की सप्लाई में सुधार का संकेत है। इसके साथ छपी खबर के अनुसार, आयात पर निर्भरता के बीच जून में जीएसटी की आय 14% बढ़ी। वैसे तो जीएसटी वसूली में वृद्धि का मतलब यह बताया जाता रहा है कि सब ठीक है लेकिन इस बार तो शीर्षक में ही आयात पर निर्भरता है। वास्तविकता जो भी हो, इस स्थिति को आप चाहे जैसे देखिए, खबर यह भी है कि 117 प्रमुख हस्तियों ने मोदी-शहबाद को पत्र लिखकर मांग की है कि भारत-पाकिस्तान में शुरू हो बातचीत। यह खबर देशबन्धु में ली़ड है।
नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, (दिल्ली में) प्रदूषण रोकने के लिए मास्टर प्लान अधिसूचित। एक और दिलचसप खबर है, आरोपी के कमरे से मिला राम राज्य कोष का संदूक। जाहिर है, चढ़ावा चोरी करने वाले अपने लिए थोड़े पैसों की चोरी नही कर रहे होंगे और यह किसी योजना का हिस्सा है। इसलिए, शक तो उनपर ही होता है जिन्होंने इन्हें काम पर रखा था। चढ़ावा चोरी पर प्रतिक्रिया ऐसी ही है लेकिन जांच ऐसी नहीं है इसलिए मुझे तो कोई उम्मीद भी नहीं लगती है। लेकिन वह अलग मामला है। पारदर्शिता नहीं है और यह आरटीआई कानून देने वाली सरकार के बाद की ‘बेहतर’ स्थिति है। इसमें वेनेजुएला में मरे भारतीय नाविक का शव एक महीने बाद वापस आया तो उसमें से मस्तिष्क, दिल, फेफड़ा और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंग गायब पाए गए है। नाविक के परिवार ने यह मुद्दा उठाया तो फॉर्वार्ड सी मैन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने सरकार से मामले की जांच करने की मांग की है। खबर के अनुसार, नाविक की मृत्यु हृदयघात के कारण होना बताया गया था। अमर उजाला की लीड के जरिए बताया गया है कि वाणिज्यिक सिलेंडर 183 रुपए सस्ता, नायरा ने पेट्रोल व डीजल के दाम घटाए। द टेलीग्राफ ने शादी के मामले में गुजरात हाईकोर्ट के एक फैसले की खबर को पहले पन्ने पर छापा है। इसके अनुसार, गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल मैरिज सर्टिफिकेट या रजिस्ट्रेशन बनवा लेने से कोई हिंदू विवाह कानूनी रूप से वैध नहीं माना जाएगा। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह एक पवित्र संस्कार है, इसलिए विवाह की वैधता के लिए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-7 के अनुसार पारंपरिक रस्में, जैसे ‘सप्तपदी’ (सात फेरे) का होना अनिवार्य है। इसके बिना केवल कागज़ी प्रमाण पत्र का कोई कानूनी आधार नहीं है। यह फैसला जस्टिस इलेश जे. वोरा और जस्टिस आर.टी. वच्छानी की खंडपीठ ने एक ऐसे मामले की सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें एक महिला ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति के हस्ताक्षर ले लिए थे और बाद में कथित फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर खुद को उसकी पत्नी बता रही थी। महिला ने खुद स्वीकार किया था कि कोई रस्म नहीं हुई, जिसके बाद कोर्ट ने उस शादी को बेकार या बेमतलब घोषित कर दिया।
सरकारी प्रचार के लिए या कारण चाहे जो हो, हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, कच्चे तेल की कीमतें कम होने से एटीएफ, कमर्शियल एलपीजी रेट कम हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सेकेंड लीड है लेकिन लीड का शीर्षक है, 1800 रुपए प्रति माह से ज्यादा ईपीएफ योगदान स्वैच्छिक होगा। हालांकि, आज सरकारी प्रचार की जो खबर है उसे टाइम्स ऑफ इंडिया ने सिंगल कॉलम में छापा है जबकि अमर उजाला में यही खबर टॉप पर छह कॉलम से ज्यादा में है। कुल मिलाकर, एक तरफ अगर डिजिटल विकास का प्रचार है तो इससे हुए नुकसान की चर्चा ही नहीं है और नुकसान रोकने के नाम पर जो कानून और नियम बनाए गए हैं वे भी तानाशाहीपूर्ण हैं। आज खबर है कि व्हाट्सऐप्प के प्रस्तावित यूजर नेम खासियत को रोक दिया गया है। सरकार ने तीन दिन में जवाब मांगा है और चेतावनी दी है कि बगैर इजाजत यह खासियत या सुविधा शुरू नहीं की जाए। आप जानते हैं कि डिजिटल इंडिया में सबसिडी और सरकारी लाभ यहां तक कि मनरेगा की मजदूरी भी लाभार्थियों को सीधे खाते में दी जा सकती है और इस तरह भ्रषटाचार रोका जा सकता है। लेकिन इसमें भी चोरी के तरीके हैं और कौशल विकास योजना के अरबों रुपए सीधे अदा किए गए हैं। सीएजी का एतराज भी है। सरकार ने उसपर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन डीबीटी के जरिए भ्रष्टाचार रोकने का प्रचार और दावा करती है। इसके लिए गरीबों और अशिक्षितों के खाते खुलवाए गए और फिर उन्हें भांति-भांति की परेशानी होती रही है। ऐसी खबरें भी यदा-कदा आती रही हैं। पर सरकार सिर्फ प्रचार करती है क्योंकि मीडिया किसी अगर-मगर या सवाल के बिना प्रचार वाली खबरों को तान देता है। अभी जब प्रभु राम के मंदिर से चढ़ावा चोरी की खबरें हैं, अयोध्या के मंदिर में आस्था से खिलवाड़ हुआ है, उज्जैन और महाकाल जैसे शक्ति स्थल के आस-पास मुख्यमंत्री द्वारा ज़मीन की ख़रीद फरोख्त से पैसे कमाने के आरोप हैं, अयोध्या में भी ऐसा हो चुका है तो इसे रोकने, कार्रवाई करने की बजाय परीक्षाओं की पवित्रता बनाने के लिए कुछ खास नहीं हो रहा है। जो हुआ वह दिखावा ही सबित हुआ। इंडियन एक्सप्रेस ने आज फिर एक विशेष खबर दी है। इसके अनुसार, जबरदस्ती बांग्लादेश ‘वापस’ भेज दिेए गए महबूब शेख एक साल बाद वापस आ गए हैं। उन्होंने डर की बजाय परिवर का ख्याल रखना चुना। परिवार के ज्यादातर लोग मुंबई चले गए हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में दो जून की रोटी जुटाना मुश्किल हो रहा था।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



