अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के बाद राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद पर बहस और तेज हो गई है। ट्रस्ट ने अपने बयान में बताया है कि महामंत्री चंपत राय और न्यासी अनिल मिश्रा से त्यागपत्र प्राप्त हो गया है, जिस पर ट्रस्ट की आगामी बैठक में विचार किया जाएगा। साथ ही ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि मंदिर को समर्पित चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य सामग्री सुरक्षित हैं तथा दानपात्र से प्राप्त राशि से जुड़े मामले में एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इसी बीच सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। आलोचकों का तर्क है कि यदि मंदिर के कोष और दान राशि से जुड़े मामले में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं और चंपत राय व अनिल मिश्रा ने इस्तीफे सौंप दिए हैं, तो वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले कोषाध्यक्ष की जवाबदेही पर भी चर्चा होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर साझा की जा रही प्रतिक्रियाओं में कहा जा रहा है कि यदि दान और कोष से जुड़े विवाद गंभीर हैं, तो केवल अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफों तक मामला सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वित्तीय निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।
हालांकि, ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि के इस्तीफे या उनके खिलाफ किसी कार्रवाई का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। ट्रस्ट ने अपने बयान में कहा है कि वह मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है तथा श्रद्धालुओं से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
फिलहाल ट्रस्ट की आगामी बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्रा के त्यागपत्रों पर फैसला लिया जाना है। वहीं, कोषाध्यक्ष की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा तय था। उनके पास बचाव का कोई रास्ता नहीं बचा था।
मगर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि का क्या?
सोचिए! राम लला का कोष चोरी हुआ है, वे कोषाध्यक्ष हैं।
सो उन्हें अपने इस्तीफ़े की विज्ञप्ति जारी करनी चाहिए थी, या ग़ैर के?
मर्यादा पुरूषोतम राम का जीवन और आचरण क्या सिर्फ़ व्यास गद्दी पर बैठकर आम जनता को सुनाने के लिए है?
या उनकी मर्यादा का एक फीसदी सही, अपने भी जीवन में लाने के लिए है?
-अभिषेक त्रिपाठी, वरिष्ठ पत्रकार



