इंदु मिश्रा-
18 जून को मेरी माँ पूरी उम्मीद और विश्वास के साथ SGPGI लखनऊ गई थीं। उन्हें लगा था कि अब उनका पूरा इलाज अच्छे से होगा और वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी।
मेरी माँ के heartके आसपास पानी जमा हो जाता था। इससे पहले KGMU में दो बार पानी निकाला जा चुका था। दोनों बार प्रक्रिया सफल रही थी और वह ठीक होकर घर लौट आई थीं। KGMU में डॉक्टर उनसे बात करते हुए ही प्रक्रिया करते थे और उन्होंने कभी ऐसी कोई गंभीर समस्या नहीं देखी।
हम SGPGI इसलिए आए क्योंकि हमें लगा कि यहाँ बेहतर सुविधाएँ, बेहतर मशीनें और विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। KGMU में पानी तो निकल जाता था, लेकिन आगे की बीमारी का कारण पता नहीं चल रहा था। कैंसर और टीबी सहित कई जाँचें negative आ चुकी थीं। SGPGI के डॉक्टरों ने भी कहा था कि पानी निकलवा लीजिए, बाकी इलाज और जाँच यहाँ हो जाएगी।
18 जून को मेरी माँ ने अपने हाथों से खाना बनाया। वह घर से बिल्कुल सामान्य तरीके से निकलीं। अस्पताल पहुँचने से पहले और वहाँ पहुँचने के बाद भी उन्होंने मेरे भाई के साथ बैठकर खाना खाया। वह खुश थीं। उन्हें कोई ऐसी परेशानी नहीं थी जिससे लगे कि उनकी जान को तत्काल खतरा है।
करीब शाम को उन्हें भर्ती किया गया। मेरे भाई ने डॉक्टरों से कहा कि हमारे पिता रास्ते में हैं, कृपया उनके आने तक इंतज़ार कर लीजिए। लेकिन परिवार की बात सुने बिना उन्हें जल्दबाज़ी में अंदर ले जाया गया। मेरी माँ ने भी कहा था कि मेरा बेटा मेरे साथ रहेगा, लेकिन यह अनुरोध भी नहीं माना गया।
कुछ समय बाद हमें बताया गया कि उनकी हालत बिगड़ गई है। मेरे भाई ने देखा कि उन्हें blood चढ़ाया जा रहा था। मेरी माँ काँप रही थीं। फिर अचानक वह बिल्कुल शांत हो गईं। जब मेरे भाई ने पूछा कि वह reaction क्यों नहीं दे रही हैं, तो उसे बताया गया कि यह anesthesia का असर है।
मैं यह जानना चाहती हूँ कि मेरी माँ की जान बचाने के लिए अस्पताल द्वारा कौन-कौन से प्रयास किए गए? उनकी हालत बिगड़ने के बाद क्या उपचार दिया गया, कौन-कौन से डॉक्टर मौजूद थे, और उन्हें बचाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए गए?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्थिति इतनी गंभीर थी, तो हमें स्पष्ट जानकारी तुरंत क्यों नहीं दी गई? हमें कई घंटों तक इंतज़ार क्यों कराया गया?
मैंने इकोकार्डियोग्राफी रिपोर्ट शेयर की है—एक उस समय की है जब मेरी माँ सच में काफी गंभीर हालत में थीं, लेकिन बाद में उनकी तबीयत ठीक हो गई और वे बेहतर हो गईं। दूसरी रिपोर्ट उस समय की है जब उनकी हालत में कोई इमरजेंसी जैसी स्थिति नहीं थी और वे अपेक्षाकृत स्थिर थीं। Pink वाली रिपोर्ट मई की है। उस समय मम्मी के हार्ट के आसपास बहुत ज़्यादा पानी जमा हो गया था। लेकिन SGPGI में बेड खाली नहीं था, इसलिए हम उन्हें KGMU लेकर गए। वहाँ डॉक्टरों ने बिना किसी परेशानी के पूरा प्रोसीजर किया और हाथ से सारा पानी निकाल दिया था, वो भी मेरे भाई के सामने।



और जो yellow वाली रिपोर्ट है, वो 18 जून की है, यानी SGPGI में भर्ती होने से ठीक पहले की। अगर दोनों रिपोर्टों को ध्यान से देखेंगे, तो 18 जून वाली रिपोर्ट में पहले के compare में हालत बेहतर दिख रही है। यानी मई की तुलना में चीज़ें इम्प्रूव होती नज़र आ रही थीं। इसके अलावा एक स्क्रीनशॉट भी है जिसमें दिख रहा है कि पोर्टल से patient की सारी जानकारी हटा दी गई है या फिर दिखाई नहीं दे रही है।
हमारे पास कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका कोई उत्तर नहीं मिला है—
- हमें मौखिक रूप से जो बताया गया और मृत्यु प्रमाण पत्र में जो लिखा है, उनमें अंतर क्यों है?
- मृत्यु के समय को लेकर अलग-अलग जानकारी क्यों सामने आई?
- पूरी मेडिकल फाइल और प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज़ परिवार को क्यों नहीं दिए गए?
- अस्पताल के पोर्टल से मरीज की जानकारी क्यों गायब हो गई?
- आखिर मेरी माँ के अंतिम क्षणों में वास्तव में क्या हुआ?
हम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच रहे हैं। हम केवल सच जानना चाहते हैं। जो माँ अपने पैरों पर चलकर अस्पताल गई थीं, जिन्होंने उसी दिन अपने परिवार के लिए खाना बनाया था, जो ठीक होने की उम्मीद लेकर गई थीं — वह कुछ ही घंटों में हमसे हमेशा के लिए कैसे बिछड़ गईं?
मैं SGPGI प्रशासन, प्रो. आर. के. धीमन जी, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित अधिकारियों से विनम्र निवेदन करती हूँ कि इस मामले की निष्पक्ष जाँच कराई जाए और हमारे परिवार को सभी मेडिकल रिकॉर्ड, प्रक्रिया का विवरण तथा पूरी सच्चाई बताई जाए।
एक बेटी होने के नाते मैं सिर्फ अपनी माँ के लिए जवाब चाहती हूँ।



