नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके खीरे (ककड़ी) के फार्म के लिए 99.60 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली है। खास बात यह है कि यह सब्सिडी उसी मंत्रालय की योजना के तहत स्वीकृत हुई, जिसमें वह स्वयं राज्य मंत्री हैं। यह खुलासा द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह सब्सिडी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (National Horticulture Board – NHB) की ‘डेवलपमेंट ऑफ कमर्शियल हॉर्टिकल्चर थ्रू प्रोडक्शन एंड पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर क्रॉप्स’ योजना के तहत दी गई। इस योजना का उद्देश्य व्यावसायिक बागवानी को बढ़ावा देना है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, भागीरथ चौधरी राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित अपने फार्म पर इस योजना के लाभार्थी बने। उनके फार्म के बाहर लगे बोर्ड पर भी लिखा है कि परियोजना को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से सहायता मिली है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि राज्य मंत्री होने के नाते भागीरथ चौधरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष भी हैं। इसी बोर्ड ने पिछले वर्ष इस योजना के तहत उनके प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बोर्ड की स्वीकृति तय प्रक्रिया के तहत कई चरणों में दी जाती है।
एक करोड़ तक मिल सकती है सब्सिडी
रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना में परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम एक करोड़ रुपये तक सब्सिडी देने का प्रावधान है। भागीरथ चौधरी को इसी सीमा के तहत 99.60 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत हुई।
अन्य प्रभावशाली परिवार भी लाभार्थी
इंडियन एक्सप्रेस की जांच में यह भी दावा किया गया है कि राजस्थान में इस योजना के लाभार्थियों में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार की पत्नी, मां और बेटे के नाम भी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों को पिछले पांच वर्षों में मिलाकर 1.16 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली।
मंत्री पक्ष का जवाब
रिपोर्ट में मंत्री के सहयोगी के हवाले से कहा गया है कि परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। फिलहाल इस मामले में मंत्री की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Only ₹ 99 lakh subsidy for Kheera the PMO India mantri should have gone for the full crore. Remember Na khaunga na khaney doonga.
-स्वाति चतुर्वेदी, पत्रकार

खीरा की खेती लोग खेत से लेकर छपरी- टपरी और गमले में कहीं भी कर लेते हैं। मंत्री ने अपने फार्म के लिए एक करोड़ में एक लाख कम की सब्सिडी ली है तो कुछ सोचा ही होगा। अपनी सरकार है, मंत्री हैं, इतना तो करना ही चाहिए। कौन रोकने वाला है। यहाँ मंदिर में लूट हो गई उस पर कुछ नहीं हुआ। इस देश में लोग सौ सौ करोड़ का खीरा खा सकते हैं। मंत्री को खीरा रत्न का पुरस्कार मिलना चाहिए। रिपोर्ट पढ़ता हूँ। उम्मीद है खीरा फार्म की तस्वीर भी होगी और एनिमल फार्म की भी।
-रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार/यूट्यूबर
इंडियन एक्सप्रेस के ट्वीट का अनुवाद-
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को उनके व्यावसायिक खीरा (ककड़ी) खेती प्रोजेक्ट के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है। यह सब्सिडी उसी कृषि मंत्रालय की एक योजना के तहत दी गई, जिसमें वह स्वयं राज्य मंत्री हैं।
हालांकि, परियोजना को अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी ने दी, जिसमें भागीरथ चौधरी सदस्य नहीं हैं। लेकिन वह एनएचबी के पदेन (Ex-officio) उपाध्यक्ष हैं, जो बोर्ड के कामकाज की निगरानी करता है।
करीब 1.99 करोड़ रुपये लागत वाला यह प्रोजेक्ट वर्ष 2025 में इस योजना के तहत स्वीकृत 467 परियोजनाओं में शामिल था।



