चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में जी न्यूज के स्थानीय रिपोर्टर ओंकार सिंह चंदेल के खिलाफ रंगदारी मांगने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला सरधुवा थाना में दर्ज हुआ है। आरोप है कि एक खनन कारोबारी ने बच्चे की मौत की न्यूज़ चलाये जाने से नाराज होकर ये मुक़दमा लिखाया है।
एफआईआर के अनुसार, बालू घाट संचालक रजनीश पांडेय की शिकायत पर 13 जून 2026 को ओंकार सिंह चंदेल के खिलाफ एफआईआर संख्या 0108/2026 दर्ज की गई। उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(5), 62, 49 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता से कथित तौर पर रंगदारी मांगने का प्रयास किया गया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।



रिपोर्टर ओंकार सिंह का पक्ष-
चित्रकूट जिले के सरधुआ थाना क्षेत्र के चांदी बांगर गांव में यमुना नदी पर शिवचंद्र त्रिपाठी द्वारा बालू खनन का पट्टा संचालित किया जा रहा है। इसी खनन के परिवहन के लिए 12 जून 2026 को एक रास्ता बनाया गया था, जिसके कारण वहां एक बड़ा गड्ढा बन गया। इसी गड्ढे में चांदी गांव निवासी शिव शंकर निषाद के 9 वर्षीय पुत्र गौरव की डूबने से मृत्यु हो गई थी।
इस घटना की खबर मैंने तथा जिले के अन्य अनेक पत्रकारों ने प्रमुखता से प्रकाशित और प्रसारित की थी। इसी से खुन्नस खाकर मेरे विरुद्ध सरधुआ थाने में साजिशन एक झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है और मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मेरे पास इस पूरी घटना से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य एवं दस्तावेज उपलब्ध हैं, जो सत्य को प्रमाणित करते हैं।
पिछले कई वर्षों से शिव चंद्र त्रिपाठी के द्वारा चित्रकूट और बाँदा में बालू खनन का कारोबार किया जा रहा है लेकिन इसके पहले उन्होंने कोई शिकायत या रंगदारी मांगने का आरोप नहीं लगाया। जब एक बच्चे की जान चली गयी और ख़बर चली तो पत्रकारों पर रंगदारी मांगने का आरोप लगाकर प्रताड़ित करने का कुचक्र रचा गया।
पीड़ित परिवार को ठेकेदार द्वारा 5 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया गया। यदि ऐसा हुआ है, तो यह भी जांच का विषय है कि दुर्घटना की परिस्थितियां क्या थीं और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी क्या बनती है।
मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यदि मुझ पर लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है कि मैंने ठेकेदार या उसके किसी प्रतिनिधि से धन की मांग की, तो संबंधित पक्ष मेरे द्वारा की गई किसी भी कॉल, बातचीत या मांग का प्रमाण सार्वजनिक करें। यदि ऐसा कोई प्रमाण प्रस्तुत होता है तो मैं कानून के अनुसार जो भी कार्रवाई होगी, उसे स्वीकार करने को तैयार हूं।
मैं निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच की मांग करता हूं, ताकि सच्चाई सामने आ सके। यदि जांच में मैं दोषी पाया जाता हूं तो मुझे दंड दिया जाए, लेकिन यदि आरोप निराधार हैं तो झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों के विरुद्ध भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
लोकतंत्र में पत्रकारिता का उद्देश्य जनहित के मुद्दों को सामने लाना है। यदि सच्चाई लिखने या दिखाने वाले पत्रकारों पर ही मुकदमे दर्ज किए जाएंगे, तो गरीब, पीड़ित और आमजन की आवाज कौन उठाएगा? यह अत्यंत गंभीर और चिंतनीय विषय है।
पत्रकारिता के अपने 20 वर्षों के कार्यकाल में पहली बार मुझे ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। मुझे न्यायपालिका और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया पर पूरा विश्वास है कि सत्य अवश्य सामने आएगा।
— ओंकार सिंह, रिपोर्टर, ज़ी न्यूज़, चित्रकूट




Ram Pratap
June 29, 2026 at 7:35 pm
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