मुंबई। पत्रकारों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और धमकी देने के मामले में विवादों में घिरे शिवसेना सांसद संजय दीना पाटिल ने आखिरकार सार्वजनिक रूप से खेद जताया है। पत्रकारों के विरोध, मीडिया बहिष्कार और पार्टी नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद पाटिल ने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका गहरा अफसोस है।
संजय दीना पाटिल हाल ही में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) छोड़कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों में से एक हैं। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान वह सवालों से नाराज हो गए थे और कैमरे के सामने ही अपशब्द कहने के साथ धमकी भी दी थी। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
विवाद बढ़ने पर शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने स्वयं सांसद से बात की और उन्हें मीडिया के सामने खेद जताने की सलाह दी। इसके बाद संजय पाटिल ने सार्वजनिक बयान जारी कर कहा, “मैं ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूं।”
https://twitter.com/SDPatil_16/status/2070173055238983914
उन्होंने कहा कि शिवसेना में शामिल होने के बाद से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, जब पत्रकार दोबारा उनसे इसी मुद्दे पर सवाल पूछने पहुंचे तो उन्होंने हाथ जोड़कर अनुरोध किया था कि इस विषय पर और सवाल न किए जाएं, लेकिन लगातार सवाल पूछे जाने से वह अपना आपा खो बैठे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुंबई और ठाणे के पत्रकारों ने संजय पाटिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इतना ही नहीं, उनके शाम को प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी पत्रकारों ने सामूहिक बहिष्कार कर दिया। बताया गया कि यह प्रेस वार्ता बालासाहेब भवन स्थित शिवसेना कार्यालय में आयोजित की गई थी, जहां पाटिल पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर अपना पक्ष रखने वाले थे, लेकिन मीडिया के बहिष्कार के कारण उनका संदेश प्रभावी ढंग से सामने नहीं आ सका।
गौरतलब है कि संजय दीना पाटिल पिछले कुछ दिनों से शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत के साथ भी तीखी बयानबाजी में उलझे हुए हैं। बागी सांसदों के खिलाफ चल रहे कथित ‘ऑपरेशन तुड़वा’ अभियान को लेकर दोनों नेताओं के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।
पत्रकारों से विवाद के दौरान पाटिल से उनकी बेटी और नगरसेविका राजुल पाटिल के उद्धव ठाकरे गुट में बने रहने को लेकर भी सवाल पूछे गए थे। इसी दौरान वह भड़क गए और पत्रकारों से तीखी बहस करने लगे। बाद में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पत्रकारों का अपमान करना नहीं था और यदि उनके व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका अफसोस है।
इस घटना ने महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ मीडिया जगत में भी व्यापक चर्चा छेड़ दी है। पत्रकार संगठनों ने जनप्रतिनिधियों से मीडिया के प्रति संयमित और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा जताई है।
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