विश्व दीपक-
गड्डे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर नहीं हमारी आपकी चेतना में पड़े हैं नहीं तो एथनॉल मंत्री नितिन गडकरी को अब तक कुर्सी छोड़कर नागपुर भागना पड़ता.
कम लोगों को मालूम है कि गडकरी को महान साबित करने के लिये चलाये गये तमाम प्रॉपगंडा के बावजूद भारत सड़क निर्माण के मामले में बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया जैसे देशों के समकक्ष है. चाहे बात लागत की हो या गुणवत्ता की.
एथनॉल मंत्री ने 12000 करोड़ की लागत से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे बनवाया. प्रधान उद्घाटन मंत्री, नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को उसका उद्घाटन किया. अभी तीन महीने भी नहीं बीते कि उसमें गड्ढे पड़ गये.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे की लंबाई है 213 किलोमीटर. लागत – 12000 करोड़. मतलब करीब 57 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे बना.
अमरीका में भी फोर लेन एक्सप्रेस वे बनाने की लागत लगभग इतनी ही आती है. लेकिन गुणवत्ता में ज़मीन आसमान का फर्क है. अमरीका का नाम इसलिये लिख रहा हूं क्योंकि गडकरी ने कहा था कि 2024 के अंत तक भारत का रोड इन्फ्रॉस्ट्रक्टर अमरीका के बराबर होगा. हुआ? अब तो 2026 भी आधा बीत गया.
अमरीका छोड़िए कई बार तो तस्वीरें देखकर लगता है कि पाकिस्तान की सड़कें भी भारत से बेहतर हैं.
भारत उन देशों में शामिल हैं जहां सड़कें सबसे खराब हैं लेकिन निर्माण लागत सबसे ज्यादा है. इसलिये नहीं कि सड़के बहुत अच्छी क्वालिटी की बनाई जाती हैं बल्कि इसलिये क्योंकि भ्रष्टाचार बहुत है. आज भारत में सड़क निर्माण में हो रही लूट कल्पना से परे है.
एक छोटा सा उदाहरण याद आ रहा है. जब द्वारका एक्सप्रेव बनाने का प्रस्ताव पास हुआ तब यह अनुमान लगाया गया था कि 18 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत आएगी. लेकिन जब बनकर तैयार हुआ तो पता चला कि एथनॉल मंत्री, जिनके पास सड़क बनवाने का ठेका मंत्रालय भी है, उन्होंने द्वारका एक्सप्रेव का एक किलोमीटर बनवाने में 250 करोड़ रुपये खर्च किये.
कहां 18 करोड़, कहां 250 करोड़?
हंगामा हुआ तो सफाई दी गई कि बाद में एक्सप्रेव वे को एलिविटेड बना दिया गया इसलिये लागत बढ़ गई. क्यों बना दिया एलिविटेड? अगर एलिविटेड भी बनवाया तो क्या उसमें सोना-चांदी मढ़वाया था?
18 करोड़ प्रति किलोमीटर की लागत बढ़कर 250 करोड़ प्रति किलोमीटर कैसे हो सकती है? प्रति किलोमीटर 232 करोड़ का खर्चा. इस आंकड़े को फिर से पढ़िए – द्वारका एक्सप्रेव वे बनवाने में निर्माण लागत 232 करोड़ प्रति किलोमीटर बढ़ गई.
यह पैसा कहां गया होगा? कौन है जो इस देश को लूट रहा है?
सड़क निर्माण में लागत के मामले में बांग्लादेश, श्रीलंका, नाइजीरिया जैसे देश हैं जो भारत से आगे हैं. आप समझ सकते हैं कि तीसरी दुनिया के इन छठे, सातवें दर्जे के देशों में सड़क निर्माण क्यों महंगा है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि ढाका बीआरटी कॉरिडोर दुनिया का सबसे महंगा कॉरिडोर है.
सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि इस समय भारत में हो रहे सड़क/एक्सप्रेस वे निर्माण में भ्रष्टाचार का आलम क्या होगा. गडकरी जी उसी के दुनिया के आलमगीर हैं.
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे में जो गड्ढे पड़े हैं उनको देखकर दुखी मत होइये. बस यह याद रखिये कि गड्ढे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर नहीं हमारी आपकी चेतना में पड़ चुके हैं जो हर दिन और गहरे और विकराल होते जा रहे हैं.



