विकास मिश्रा-
- खबर नंबर-1- सोनम रघुवंशी नाम की लड़की ने हनीमून टूर के दौरान ही अपने पति की हत्या करवा दी।
- खबर नंबर-2- सिया गोयल नाम की लड़की ने अपने मंगेतर केतन अग्रवाल को लोहागढ़ किले के पास खाई में धक्का देकर मार डाला।
- सबसे ताजा खबर नंबर-3– रेवाड़ी में तनु नाम की महिला ने प्रेमी के साथ मिलकर पति मोनू को मार डाला।
ये तीनों खबरें अलग-अलग समय और अलग-अलग स्थान की हैं, लेकिन सबमें एक समानता है। सभी लड़कियां शादी से पहले किसी और के प्यार में डूबी हुई थीं। सभी की शादी उनकी मर्जी के खिलाफ की गई थी। कहीं इज्जत का वास्ता देकर तो कहीं जबरन। ये तीनों लड़कियां हत्यारिन हैं, लेकिन क्या दोष सिर्फ उनका ही है..? क्या वे माता पिता या परिवार वाले जिम्मेदार नहीं हैं, जिन्होंने जान बूझकर अपनी बेटियों की प्रेम कहानियां छिपाईं और उनकी शादियां करवा दीं। इसकी वजह से तीन परिवार बर्बाद हो गए।
दिल्ली में हमारे एक करीबी वकील साहब हैं। करोड़ों की दौलत है उनके पास। उनका इकलौता बेटा मल्टीनेशनल कंपनी में करीब 3 लाख रुपये महीने कमाता है। बेटे की शादी उन्होंने बहुत धूमधाम से की। दहेज बिल्कुल नहीं लिया।
पति-पत्नी हनीमून मनाने हफ्ते भर के लिए स्विटजरलैंड गए थे। पत्नी कोई न कोई बहाना बनाकर पति से कन्नी काट रही थी। किसी से व्हाट्सएप कॉल पर बातें करती थी। देर रात तक चैट भी करती थी। लड़के को कुछ संदेह हुआ, लेकिन कुछ कह भी नहीं सकता था।
एक रोज पत्नी नहाने के लिए वॉशरूम गई। उसके भीतर जाते ही उसके फोन के व्हाट्सएप पर मैसेज आया। फोन अभी लॉक हुआ नहीं था. पति ने मैसेज देख लिया। फिर तो लंबी चैट मिली। कहानी यह थी कि वह किसी और के साथ प्रेम में थी और प्रेमी से सब्र रखने की बात कह रही थी। वादा भी कर रही थी कि वे दोनों जरूर मिलेंगे। लड़के ने समझदारी दिखाई। उसे भनक नहीं लगने दी। स्विटजरलैंड से वापस आया। घर वालों को पूरी बात बता दी। लड़की के मायके वाले भी आए। पंचायत हुई।
लड़की के घर वालों ने बहुत मुश्किल से कबूल किया कि उन्हें बेटी के इश्क के बारे में पता था, लेकिन इज्जत बचाने के लिए उन्होंने उसकी मर्जी के खिलाफ शादी की थी। यह भी सोचा था कि अमीर घर में जाएगी, सुख-सुविधाओं में रहेगी, तो पिछली बातें भूल जाएगी। अब दोनों तरफ की इज्जत उछल रही थी। तलाक का मामला कोर्ट गया। छह महीने के भीतर तलाक हो गया। वकील साहब को हर्जाने के तौर पर 20 लाख रुपये लड़की को देने पड़े।
दो साल बाद लड़के की दूसरी शादी हुई। फिलहाल पति पत्नी आनंद से रह रहे हैं। तीन दिन पहले वकील साहब से बात हो रही थी। सिया-चेतन-केतन कांड का जिक्र करते हुए बोल रहे थे कि समय रहते ही सब पता चल गया, वरना क्या पता मेरा बेटा भी किसी खाई में मिलता।
एक और मेरे करीबी हैं। बेटी अपने मन से विवाह करना चाह रही है, लेकिन उसके पिताजी ने किसी को वचन दे दिया है कि वे अपनी बेटी की शादी उनके बेटे से करेंगे। दिक्कत यह है कि जिस लड़के से उनकी बेटी प्यार करती है, वह उनकी हैसियत का नहीं है। मैंने उन्हें समझाया तो इज्जत की दुहाई देने लगे। मैंने कहा कि बेटी की बात मान लो। अगर कहीं दबाव में उसकी शादी कर दी। बाद में ससुराल में उसने कोई अनहोनी कर दी तो इज्जत उस वक्त ज्यादा जाएगी।
जिन तीन खबरों का जिक्र मैंने ऊपर किया है, उसमें भी हुआ यही होगा। सिया, सोनम और तनु के परिवार को भी बेटी के रिश्ते के बारे में पता रहा होगा। इस मामले में समाज के एक बहुत बड़े तबके की सोच बहुत ही दकियानूसी है। पहला तो बेटे-बेटी के कहीं प्रेम करने पर खानदान की इज्जत जाने लगती है। फिर सवाल उठता है कि अगर बात बाहर गई तो लोग क्या कहेंगे..? ऐसी सोच के चलते लड़का हो या लड़की कई परिवारों में जबरन शादियां करा दी जाती हैं। 80 से 90 फीसदी मामलों में लड़कियां अपने हालात से समझौता कर लेती हैं। घर-गृहस्थी में रम जाती हैं। बाकी बगावत कर जाती हैं, अपराध कर बैठती हैं, जैसा सोनम, सिया और तनू ने किया।
जियो हॉटस्टार पर एक सीरियल आ रहा है- बरेली के बच्चन। उसमें पिता अपनी बेटी की शादी एक बद्तमीज एनआरआई से करने पर आमादा है। पिता ने शादी तय कर दी। लड़की जानती है कि उस एनआरआई के साथ उसका जीवन नरक हो जाएगा, लिहाजा वह घर से भाग गई। पिता उसे ढूंढ निकालता है। बेटी दुहाई देती है कि मैं उससे शादी नहीं कर सकती। पिता कहता है कि सारे मेहमान आ चुके हैं। अगर यह शादी नहीं हुई तो इज्जत चली जाएगी।
खानदान की इज्जत और क्या कहेंगे लोग.. वाला सवाल सारे बवाल की जड़ है। ज्ञानी कहते हैं- सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग। लोग आपका घर चलाने नहीं आते, लोग आपकी परिस्थितियां नहीं समझ सकते, लोग आपकी भावनाएं नहीं समझ सकते, लोग आपके बच्चों को समझ नहीं सकते। तो क्यों उन अदृश्य लोगों के डर से आप अपने बच्चों को जानबूझकर ऐसी आग में झोंकते हैं, जहां उनकी ही नहीं, किसी और की जिंदगी भी झुलस सकती है।
मेरी एक सहकर्मी लड़की थी। बहुत ही मेधावी। वह राजस्थान की राजपूत थी और उसे प्रेम जिस लड़के से हुआ था, वह जाट था। क्या शानदार जोड़ी थी, लेकिन जैसे ही यह बात लड़की के घर वालों को पता चली तो कोहराम मच गया। ये शादी नहीं हो सकती… का सिंहनाद हुआ। मैं बीच में पड़ा। लड़की पक्ष को मनाने के चक्कर में उन्हें भला बुरा भी कहा। एक रास्ता भी बताया।
दरअसल लड़का अपना टाइटिल लिखता था तोमर। मैंने लड़की के पिता को समझाया कि तोमर तो राजपूत भी होते हैं। आपके यहां से दिल्ली जाकर कोई पता नहीं कर पायेगा कि लड़का जाट है। लोग तो यही समझेंगे कि यह तोमर यानी राजपूत है। जब बात खुलेगी तो देखी जाएगी। शादी हो गई और अब वह लड़का उस खानदान का कुंवर जी है। दामाद नंबर-1 है।
मैं प्रेम विवाह का बहुत समर्थक नहीं हूं तो बहुत विरोधी भी नहीं हूं। पहले तो लड़के-लड़कियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके एक गलत कदम से उनके पालनहारों पर मुसीबतों का पहाड़ टूट सकता है। अगर किसी लड़की या लड़के ने अपने लिए जीवनसाथी पसंद कर लिया हो तो मैं अभिभावकों से कहना चाहता हूं कि पहले उसे परखिए। उस रिश्ते को उनके नजरिए से देखने की कोशिश कीजिए। अगर बहुत बुरा नहीं दिख रहा हो तो उन्हें उनका जीवन जीने दीजिए। जो पीढ़ी हमारे सामने है, वह जेन-जी है। इस पीढ़ी को समझिए। ये पीढ़ी आपके अरमानों का बोझ ढोने के लिए तैयार नहीं है। इस पीढ़ी को अपनी जिंदगी जीने की ललक है। बाकी सवालों से यह पीढ़ी दूर है। इसी नाते इनके विवाह में जबरदस्ती तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। जबरन रिश्ते थोपने के क्या नतीजे हो सकते हैं, ये ऊपर लिखी तीन खबरें बता रही हैं।



