डबल इंजन से चला भ्रष्टाचार
संजय कुमार सिंह
तृणमूल कांग्रेस में तोड़फोड़ की कोशिश में लगाए गए भाजपा के केंद्रीय मंत्री, भूपेन्दर यादव के चार करीबी सहायकों को केंद्र सरकार द्वारा अचानक हटा दिए जाने की चौंकाने वाली ‘सफाई’ के बाद बंगाल में भाजपा की सरकार और केंद्र सरकार टीएमसी के साथ जो सब कर रही है आज उससे संबंधित कई खबरें हैं – अलग-अलग। एक खबर हो सकती थी, उत्तर प्रदेश बिहार की राह पर। लेकिन ऐसी कोई खबर नहीं है। तृणमूल को तोड़ने में भाजपा घायल हुई या शहीद होना छिपा रही है यह तो बाद में समझ में आएगा लेकिन खबरें छिपाई और दबाई जा रही हैं। भाजपा की मनमानी और पक्षप्रचार जारी है। विपक्ष को कुचलने के उसके अभियान में कोई कमी नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर छपी खबर के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पीएमएलए जांच के तहत टीएमसी के 440 करोड़ रुपए फ्रीज कर दिए हैं। तृणमूल पार्टी के ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले समूह ने इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई कहा है। वैसे भी यह कार्रवाई बागी विधायक ऋतूब्रत बनर्जी की शिकायत पर की गई है। यह खबर अमर उजाला में भी है। यहां इसका शीर्षक है, ममता को झटका, तृणमूल के खातों में जमा 440 करोड़ फ्रीज। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री भूपिन्दर यादव के चार निजी सहायकों को हटाए जाने से किसे झटका लगा पता ही नहीं चल रहा है। यह खबर ही नहीं है, सो अलग। पश्चिम बंगाल की एक खबर द हिन्दू में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है। इसके अनुसार, हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार से दोपहर का खाना इस्कॉन द्वारा दिए जाने पर उसका स्टैंड जानना चाहा है। चढ़ावा चोरी पर आज किसी अखबार में खबर नहीं है। लेकिन अमर उजाला के अनुसार, रिश्तेदारों के खातों से आरोपी सफेद करते थे चोरी की रकम।
ममता बनर्जी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल की पुलिस भाजपा का हथियार बन गई है। तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में बालीगंज फाड़ी से बाजरा मोड़ तक मार्च का आयोजन किया था। मार्च के दौरान वहां पहुंचे भाजपा कार्यकर्ताओं से टीएमसी कार्यकर्ताओं की भिड़ंत हो गई। पहले तीखी बहस हुई जो बाद में धक्का मुक्की में बदल गई। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता एक दूसरे को धक्का देते हुए चोर-चोर के नारे लगाए। असल में बारुईपुर में नाबालिग लड़की से बलात्कार और उसकी हत्या के विरोध को लेकर मामला कुछ समय से गर्म चल रहा है। हाल में खबर थी कि पुलिस ने ममता बनर्जी के घर को घेर लिया था और उन्हें प्रदर्शन के लिए निकलने ही नहीं दिया। कलकत्ता हाईकोर्ट ने रैली की इजाजत दी तो कल रैली हो रही थी लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाधा डाली। जाहिर है, सत्ता भाजपा की है तो नियंत्रित या संयमित भाजपा को रहना है और अगर रैली या जुलूस निकालने की अनुमति थी तो विरोध का कोई मतलब नहीं था लेकिन भाजपा का मकसद डर फैलाना लगता है। ऐसे में सही हो या गलत, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा है कि पश्चिम बंगाल पुलिस भाजपा का हथियार बन गई है। पुलिस की मनमानी यहीं खत्म नहीं होती है। बारुईपुर दुष्कर्म और हत्या मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। जाहिर है, पुलिस मुठभेड़ में मौत पश्चिम बंगाल की भाजपाई राजनीति में नया है और इस लिहाज से यह बड़ी खबर है। आज देशबन्धु में यह खबर पश्चिम बंगाल में फिर बवाल शीर्षक से छपी है। इसी के साथ ममता बनर्जी का आरोप भी है।
कोलकाता के अंग्रेजी अखबार, द टेलीग्राफ ने इस मुठभेड़ को बंगाल में पुलिसिया मुठबेड़ के प्रवेश के रूप में प्रकाशित किया है और लिखा है कि बंगाल में यूपी मॉडल का परीक्षण किया गया है। अखबार ने इसके साथ उत्तर प्रदेश की हाल की कुछ मुठभेड़ की घटनाओं का भी उल्लेख किया है और इसे चौंकाने वाला डेटा कहा है। मुझे लगता है कि आज के लिए यह दिल्ली के अखबारों में भी लीड हो सकती थी। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, बलात्कार के बाद हत्या की शिकार लड़की के पिता ने कहा कि वे बेहद खुश हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने जो आश्वासन दिया था उसे पूरा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को मुझसे कहा था, बस इंतजार करो और देखो कि मैं क्या करता हूं। मैं बहुत खुश हूं कि उन्होंने अपना वादा पूरा किया। मुझे प्रशासन में पूरा भरोसा है और वह हमारे साथ रहा है। दादा ने हर संभव तरीके से मेरी सहायता भी की है। सरकार की सहायता के बिना हम यहां तक नहीं पहुंच पाते। बंगाल की सरकार कैसे मतदाताओं को खुश रख रही है इसका अंदाजा इस खबर से होता है फिर भी यह खबर आज प्रमुखता से नहीं छपी है। द हिन्दू में यह खबर चार कॉलम में छपी है। दि एशियन एज में यह खबर दो कॉलम की फोटो के साथ चार कॉलम में छपी है। शीर्षक है, बारुईपुर बलात्कार-हत्या मामले का मुख्य आरोपी पश्चिम बंगाल में भाजपा शासन की पहली मुठभेड़ में मारा गया। बेशक यह लीड या पहले पन्ने की खबर जैसा शीर्षक है। हालांकि, दि एशियन एज की लीड प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा और वहां के पीएम के साथ संभावित वार्ता की खबर है। नवोदय टाइम्स की लीड अलग है। असल में लीड दो हिस्से में है। पहला हिस्सा है, सीजफायर (अमेरिका ईरान युद्ध विराम) झुलसा। उपशीर्षक है, अमरीका के 80 हमलों के जवाब में ईरान ने 85 ठिकानों को निशान बनाया। दूसरा हिस्सा है – शेयर बाजार तबाह। कहने की जरूरत नहीं है कि शेयरबाजार की तबाही में युद्ध का भी योगदान होगा ही पर वह अलग मुद्दा है। सीजफायर झुलसा से अगर आपको मामला नहीं समझ आए तो दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक स्पष्ट है। फिर भड़की जंग के तहत अखबार ने बताया है, ईरान ने बहरीन-कुवैत पर मिसाइलें दागीं, ईरानी तेल पर अमेरिका की रोक। मुख्य शीर्षक है, 20 दिन ही टिकी शांति…. अमेरिका ने 80 जगह हमले किए, ईरान ने 85 जगह। आज यह खबर कई और अखबारों की लीड है।
इनमें अमर उजाला शामिल है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने बहरीन-कुवैत में दागी मिसाइलें, ट्रम्प ने कहा – समझौता खत्म। आज टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू की लीड अमेरिका ईरान युद्ध और समझौता खत्म होने से संबंधित खबरें हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने ट्रम्प के हवाले से लिखा है कि समझौता खत्म हो गया है लेकिन युद्ध फिर शुरू हो यह जरूरी नहीं है। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, ट्रम्प ने और हमलों की चेतावनी दी लेकिन युद्ध फिर शुरू करने की बात नहीं की। अब इसका क्या मतलब हो सकता है यह सब समझना मुश्किल है। तीसरा शीर्षक ट्रम्प का तीसरा चेहरा दिखाता है – ट्रम्प ने युद्धविराम संधि खत्म होने की घोषणा की पर कहा कि वे वार्ता चलने देंगे।
इंडियन एक्सप्रेस की लीड का शीर्षक है निज्जर की हत्या : अमेरिका ने बिश्नोई, बरार पर आरोप लगाया कनाडा ने कहा : भारत सरकार का कोई संबंध नहीं। नवोदय टाइम्स ने इस खबर को और स्पष्ट रूप से छापा है। शीर्षक है, “निज्जर हत्याकांड में भारत सरकार की संलिप्तता का सबूत नहीं : कनाडा”। देशबन्धु की लीड का शीर्षक दिल्ली के किसी और अखबार की लीड नहीं है। कल मैंने लिखा था कि नई बनीं सड़कें देश भर में धंस या टूट रही हैं और इस कारण सड़कों पर भारी जाम लग रहे हैं उसकी सबसे अच्छी फोटो हिन्दुस्तान टाइम्स ने छापी थी। वैसे ही आज खबर है, देश भर में बारिश से कई जगहों पर जान-माल का नुकसान। मुख्य शीर्षक है, पुणे-दिल्ली में इमारत ढहीं, कई लोग दबे। उपशीर्षक है, सूरत में बारिश का कई सालों पुराना रिकार्ड टूटा, करोड़ों का नुकसान। इसके अलावा पहले पन्ने की खबरों में एक है, अब यूजीसी-नेट पेपर लीक होने के दावे से मचा हड़कंप। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार दिल्ली के रोहिणी में बिल्डिंग गिरने से एक मरा, पांच के फंसे होने का डर। आज भी रोहिणी में बिल्डिंग गिरने की सबसे अच्छी फोटो हिन्दुस्तान टाइम्स में है। शीर्षक है, रोहिणी में बिल्डिंग गिरने से मोटर साइकिल सवार की मौत। आज अमर उजाला की एक और खबर उल्लेखनीय हैं। चार कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, सेवानिवृत्त एआरटीओ के पास मिली 35 करोड़ की काली कमाई। विजिलेंस के छापे में 1.62 करोड़ नकदी, 13 किलो सोने व नौ किलो चांदी के बिस्कुट के आभूषण जब्त। जाहिर है, मुख्यमंत्री की तमाम घोषणाओं, भष्टाचार दूर करने के भाजपाई प्रचार के बावजूद ललित कुमार वसूली करते रहे होंगे। ना इन्हें पकड़े जाने का डर था ना भ्रष्टाचार खत्म करने वालों को चिन्ता हुई ना खबर। बाकी जनता शिकायत कहा करे जब कोई सुनने वाला ही नहीं है। मैंने पहले लिखा है कि मुख्यमंत्री से शिकायत करो तो जवाब आता है कि फलाने नियम के अनुसार जन शिकायतें यहां नहीं सुनी जाती। झारखंड के मुख्यमंत्री का कार्यालय डाक से भेजे पत्रों की पावती भी नहीं देता है, ई-मेल शायद काम ही नहीं करता है। ऐसे में बाबुओं की शिकायत बाबू से ही करने का क्या मतलब? हालांकि मैंने तो पोर्टल पर शिकायत करने के बाद मुख्यमंत्री को लिखा था। जाहिर है, कांग्रेस को भ्रष्ट बताकर सत्ता पर कब्जा करने वाले ज्यादा भ्रष्ट हैं। खुलेआम विज्ञापन से लेकर पद बांट रहे हैं तो कोई पत्रकार सरकार विरोधी खबर क्यों करे? पर वह अलग मुद्दा है।
अभी तो यही कि अमर उजाला ने इस खबर को छापा और बताया कि कथनी और करनी में अंतर है। यही हाल चढ़ावा चोरी का है। आप जानते हैं कि पहले गड़बड़ी से ही इनकार कर दिया गया, फिर तमाम दान गायब होने का प्रचार हुआ और बाद में सब सुरक्षित मिल गए। इस तरह, संदेश दे दिया गया है कि कुछ कर्मचारियों ने बेईमानी की उनकी जांच चल रही है सजा हो जाएगी और सब चंगा सी। पर सच्चाई यह है कि जिन लोगों कों चंदे की सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी उन्होंने लापरवाही तो की ही, भ्रम भी फैलाते रहे और कार्रवाई से पूरी तरह बरी कर दिए गए हैं। आइए, इस मौके पर याद कर लें कि जो चोरी हुई ही नहीं उसकी जांच में चोरी का पता चल रहा है और किसी को झटका नहीं लग रहा है। पुरानी खबरों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने चोरी की खबरों को पूरी तरह गलत, भ्रामक और निराधार बताया था। शुरुआती दौर के बयानों का विवरण दिलचस्प है। चंपत राय (पूर्व महासचिव, राम मंदिर ट्रस्ट) ने वित्तीय अनियमितताओं के आरोप को पूरी तरह “मनगढ़ंत और अनर्गल” करार दिया था। दिलचस्प यह था कि कोषाध्यक्ष अलग-थलग रहे और उसपर कई दिनों तक कुछ नहीं कहा गया। कोषाध्यक्ष के बिना पैसे का बंदोबस्त वैसे ही गलत है। स्वामी गोविंद देव गिरि (ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष): विवाद बढ़ने पर उन्होंने स्पष्ट किया था कि भक्तों द्वारा दान की गई सभी मूल्यवान वस्तुएं सुरक्षित हैं। उन्होंने चोरी की खबरों को खारिज करते हुए लोगों से बिना सबूत के सार्वजनिक रूप से अनर्गल आरोप न लगाने की अपील की थी। मामले की शुरुआत में जब 5 जून को आंतरिक स्तर पर गड़बड़ी का पता चला था, तब इसे सार्वजनिक करने के बजाय दबाने और “पंजीकरण में तकनीकी खामी” बताने की कोशिश की गई थी। शुरुआती बयानों में कहा गया था कि मंदिर की सुरक्षा और बैंक के साथ पैसे की गिनती की प्रक्रिया इतनी कड़ी है कि चोरी होना असंभव है। विश्व हिंदू परिषद के नेता आरोपों को राजनीति से प्रेरित और मंदिर की छवि खराब करने की साजिश बताया था। 79.85 लाख रुपए नकद बरामद हुए, तब जाकर ट्रस्ट ने माना कि गड़बड़ी हुई थी और इसके बाद चंपत राय व अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किया गया। फिर भी चंपत राय से सहानुभूति रखने वालों और उनके कारनामों की कमी नहीं है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



