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चित्रा त्रिपाठी एक बार फिर क्रोधित हो चुकी हैं!

एंकर चित्रा त्रिपाठी एक बार फिर गुस्सा हो चुकी हैं। इससे पहले वह रवीश कुमार पर क्रोधित हुईं थीं। इस बार कन्हैया और दैनिक भास्कर के पत्रकार पर नाराज हुई हैं। चित्रा ने इन दोनों में एक को टौग करते हुए लीगल एक्शन की बात लिखी है तो दूसरे की शिकायत कर दी है दैनिक भास्कर में। चित्रा को यह भी लग रहा है कि उनका नाम लेकर लोग अपनी दुकानें चलाते हैं। नीचे पढ़िए चित्रा ने क्या कुछ ट्वीट किया है…


चित्रा त्रिपाठी-

मैंने किसी भी छात्र को ना आतंकी कहा और ना ही पाकिस्तानी, कन्हैया भेलारी (bhelari1) जी इस तरह की मेरे ऊपर की गई टिप्पणी पर आप माफ़ी मांगे, वरना लीगल एक्शन के लिये तैयार रहें.

Dainik Bhaskar आपका पत्रकार के पी मलिक (TheKPMalik) एक चैनल की जर्नलिस्ट को लेकर इस तरह की टिप्पणी कैसे कर सकता है. मैंने जो बात कही नहीं उसको लेकर मेरे खिलाफ ये व्यक्ति एजेंडा चला रहा है. आप इसका ट्वीट खुद डीलीट करायेंगे या मैं लीगल एक्शन लूँ?

Twitter post showing a Hindi news graphic: headline questions who gave the right to beat journalists, with 'Chitra Tripathi, ABP News' and a photo of a woman in a white blazer.
Twitter profile for KP Malik: circular profile photo with blue verified badge, header banner, display name 'K P Malik' and handle '@TheKPMalik', bio lines, location 'New Delhi, India', join date, and follower counts ('220 Following', '21.1K Followers').

कुछ लोगों को अगर इस बात की ग़लतफ़हमी हो गई है कि मेरे बारें में झूठ फैलाकर अपनी दुकान चला लेंगे तो मैं ऐसा कत्तई होने नहीं दूँगी. मुझे लेकर कुंठा से ग्रस्त मत हों.

(और मेरी ओरिजनल फोटो भी ठीक ही रहती है, तो AI से नक़ली फोटो बनाने की जरुरत नहीं है)


के पी मलिक का ट्वीट-

देश के करोड़ों छात्रों को ‘पाकिस्तानी’, ‘आतंकी’, ‘उपद्रवी’ और ‘गुंडा’ कहने का अधिकार आपको किसने दिया?

लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं होती। सवाल पूछना देशद्रोह नहीं होता। अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण विरोध करने वाले लाखों-करोड़ों छात्रों को ऐसे अपमानजनक और गंभीर विशेषणों से संबोधित करना सिर्फ़ छात्रों का नहीं, लोकतांत्रिक मूल्यों का भी अपमान है।

यदि किसी के पास ऐसे आरोपों के समर्थन में सबूत हैं, तो उन्हें कानून के सामने रखा जाना चाहिए। लेकिन बिना प्रमाण के पूरे छात्र समुदाय को कटघरे में खड़ा करना क्या उचित है?

देश का ZenG और हर नागरिक जानना चाहता है कि क्या सरकार की चाटुकारिता करने वाला देशभक्त और सवाल पूछने या विरोध करने वाला नागरिक अब उपद्रवी , गुंडा और दुश्मन घोषित कर दिया जाएगा?

बुरा मत मानिए टेलिवीजन की ज़मीन पर ज़हर की खेती करते हो आप!

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