लखनऊ: पत्रकारों और पुलिस के बीच एक बार फिर तनातनी की स्थिति सामने आई है। पत्रकारों ने डीसीपी साउथ मोहम्मद मुस्ताक की प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार कर दिया। पत्रकारों का आरोप है कि हाल ही में एक शव मिलने की घटना की कवरेज के दौरान डीसीपी साउथ की ओर से पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और खबरों को लेकर धमकी दी गई।
मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें गोमती नगर एक्सप्रेस के एस-1 कोच में टीन के एक बड़े बक्से के भीतर युवती का शव मिला था। घटना के बाद लखनऊ समेत कई जगहों पर इसकी कवरेज हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में युवती की पहचान करते हुए हत्या के आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया।
पत्रकारों का कहना है कि घटना की रिपोर्टिंग के दौरान डीसीपी साउथ ने कुछ पत्रकारों के सामने खबरों को लेकर आपत्ति जताई। आरोप है कि पत्रकारों को ‘सनसनीखेज खबर’ चलाने के नाम पर कार्रवाई और एफआईआर की चेतावनी दी गई। पत्रकारों के मुताबिक, इसी व्यवहार और कथित धमकी के विरोध में डीसीपी साउथ की प्रेस कॉन्फ्रेंस का बहिष्कार किया गया।
मामले में पत्रकारों की नाराजगी सिर्फ किसी एक खबर को लेकर नहीं, बल्कि रिपोर्टिंग के दौरान पुलिस अधिकारियों के रवैये को लेकर बताई जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि पुलिस को किसी खबर पर आपत्ति होने पर उसका तथ्यात्मक खंडन या आधिकारिक पक्ष देना चाहिए, लेकिन एफआईआर की धमकी देकर पत्रकारों को दबाव में लाना उचित नहीं है।
गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस की जांच आगे बढ़ने के बाद सामने आया कि बक्से में मिला शव 15 वर्षीय किशोरी का था। टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज के आधार पर बक्सा ट्रेन में रखने वालों की पहचान की और बाद में पिता को हत्या के आरोप में पकड़ा।
फिलहाल पत्रकारों के बहिष्कार और डीसीपी साउथ पर लगाए गए अभद्रता व धमकी के आरोपों पर पुलिस की ओर से कोई स्वतंत्र विस्तृत पक्ष मुझे उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि के लिए पत्रकारों या पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना जरूरी है।


