नई दिल्ली। दिल्ली बीजेपी के मीडिया ग्रुप से करीब 200 पत्रकारों को हटाए जाने की खबर ने मीडिया हलकों में चर्चा तेज कर दी है। बताया जा रहा है कि पार्टी के मीडिया सेल ने बड़ी संख्या में पत्रकारों को अपने ग्रुप से बाहर कर दिया है।
पत्रकारों को ग्रुप से हटाए जाने को लेकर जब सवाल उठा तो दिल्ली बीजेपी के मीडिया सेल की ओर से सफाई दी गई कि ग्रुप में वही पत्रकार रखे जाएंगे जो पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया कार्यक्रमों में नियमित रूप से आते हैं। मीडिया सेल के मुताबिक, जिन पत्रकारों की मौजूदगी कभी-कभार होती है, उन्हें ग्रुप से हटाया गया है।
यानी मामला किसी खबर या पत्रकार की रिपोर्टिंग से जुड़ा है या महज मीडिया ग्रुप को व्यवस्थित करने की कवायद है, यह सवाल फिलहाल चर्चा में है। बीजेपी की ओर से इसे नियमित तौर पर पार्टी की गतिविधियों को कवर करने वाले पत्रकारों तक मीडिया संवाद सीमित रखने की कवायद बताया जा रहा है।
हालांकि, एक साथ बड़ी संख्या में पत्रकारों को किसी राजनीतिक दल के मीडिया ग्रुप से बाहर किए जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि राजनीतिक दलों के मीडिया ग्रुप आखिर किस आधार पर बनाए और संचालित किए जाते हैं? क्या किसी पत्रकार की किसी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नियमित मौजूदगी ही उसे पार्टी के आधिकारिक मीडिया ग्रुप में बने रहने का पैमाना होगी?
दिल्ली बीजेपी के मीडिया ग्रुप से पत्रकारों को हटाए जाने का मामला इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि इससे पहले भी दिल्ली में राजनीतिक दलों के व्हाट्सऐप मीडिया ग्रुप से पत्रकारों को हटाने के मामले सामने आ चुके हैं। मार्च 2025 में दिल्ली बीजेपी के एक व्हाट्सऐप ग्रुप से तीन महिला पत्रकारों को हटाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय हटाए गए पत्रकारों ने सवाल उठाए थे कि उन्हें हटाने की वजह क्या थी।
फिलहाल इस नए मामले में दिल्ली बीजेपी की ओर से दी गई सफाई यही है कि ग्रुप से हटाए गए पत्रकार नियमित रूप से पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं होते थे। अब सवाल यह है कि करीब 200 पत्रकारों को हटाने के लिए अपनाया गया यह नया ‘रेगुलर पत्रकार’ वाला पैमाना आगे किस तरह लागू होता है और क्या हटाए गए पत्रकारों को दोबारा ग्रुप में शामिल किया जाएगा।


