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डिजिटल विज्ञापन का बाज़ार दौड़ रहा, पर न्यूज़ वेबसाइटों के हिस्से आ रही धीमी चाल!

देश में डिजिटल विज्ञापन का कारोबार तेज़ी से फैल रहा है, लेकिन ख़बरें बनाने वाली वेबसाइटों तक इस बढ़त का छोटा हिस्सा ही पहुंच रहा है।

2026 की एक विज्ञापन बाज़ार रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025 में डिजिटल विज्ञापन पर कुल ख़र्च, क्विक कॉमर्स और छोटे-मझोले कारोबारियों को जोड़कर, 93,156 करोड़ रुपये रहा। यह देश के कुल विज्ञापन ख़र्च का लगभग 60 फ़ीसदी है। इन हिस्सों को हटा दें तो मूल डिजिटल बाज़ार 53,342 करोड़ रुपये का था। 2026 में यह बड़ा आंकड़ा करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो अभी सिर्फ़ अनुमान है।

टैम एडेक्स के आंकड़े भी डिजिटल की रफ़्तार दिखाते हैं। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच डिजिटल विज्ञापन इम्प्रेशन पिछले साल की इसी अवधि से 44 फ़ीसदी ज़्यादा रहे, और इनमें 96 फ़ीसदी ख़रीद प्रोग्रामेटिक तरीके से हुई। जुलाई से सितंबर के बीच डिजिटल की विज्ञापन गतिविधि का सूचकांक 124.5 रहा, जबकि टीवी 91.4 और प्रिंट 94.7 पर सिमटे रहे।

जहां पूरा डिजिटल विज्ञापन बाज़ार करीब 20 फ़ीसदी बढ़ रहा है, वहीं डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म की बढ़त 7–8 फ़ीसदी के आसपास आंकी गई है। यानी पैसा डिजिटल में तो जा रहा है, पर उसका बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया, सर्च, वीडियो और ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म की झोली में गिर रहा है।

न्यूज़रूम के लिए इसका मतलब सीधा है। जब कमाई की रफ़्तार बाज़ार से आधी से भी कम हो, तो उसका असर तनख़्वाह, भर्ती और रिपोर्टिंग के बजट पर पड़ना तय है। डिजिटल को भविष्य बताने वाले मालिकों से यह पूछा जाना चाहिए कि इस भविष्य में ख़बर बनाने वालों का हिस्सा कितना होगा।

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