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भगवान ने नौकरी छुड़वाई, इसलिए भगवान को ही बेचते हैं भूपेश कुंभारे! भड़ास करेगा सम्मानित

‘भड़ास 4 मीडिया’ के अवॅार्ड समारोह में इस बार एक ऐसे साथी भूपेश कुंभारे का भी सम्मान किया जाना तय हुआ है। उनकी कहानी हम सबको प्रेरित करती है। महाराष्ट्र के कोल्हापुर के इस साथी ने प्रेस की नौकरी से निकाले जाने के बाद अदालत की शरण ली। माननीय न्यायाधीश साहब ने फैसला हाथ से लिखा… ऐसा लिखा कि किसी को पढ़ने में न आया!

ये शायद जज साहब की मीडिया हाउस के प्रति रणनीतिक सदिच्छा का नतीजा था…. दुनिया का कोई वकील उनका हस्तलिखित फैसला नही पढ़ पाया। ऐसे में भूपेश कुंभारे को किसी ने मुंबई के पत्रकार, मजीठिया क्रांतिकारी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह के बारे में बताया।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भूपेश कुंभारे से संबंधित इस अदालती आदेश को जब शशिकांत सिंह भी नहीं पढ़ पाए, तब उन्होंने आरटीआई के जरिए कोल्हापुर की अदालत से यह जानना चाहा कि इस आर्डर में आखिर लिखा क्या है… जो लिखा है, उसकी टाइप की हुई प्रति उपलब्ध कराई जाए।

इसके जवाब में पता चला कि कुंभारे जी को तो संस्थान द्वारा एक महीने के अंदर ज्वाइन कराना था, मगर जवाब मिलने तक वह समय सीमा बीत चुकी थी! इस परिस्थिति में कुंभारे जी का संबल बनीं उनकी जीवन संगिनी, जिन्होंने पति की नौकरी छूटने के बाद कोल्हापुर के सुप्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर के बाहर सबसे पहले मिट्टी का दीया बनाकर बेचना शुरू किया तो आज पत्नी संग मिल कर भूपेश भाई भी गणपति बप्पा की मूर्तियां बेचते हैं।

आरंभिक संघर्षों के बाद आज आलम यह है कि मंदिर के बगल में कुंभारे दंपत्ति का अपना स्टाल लगता है… अब तो गणेश जी के अलावा सरस्वती-दुर्गा सहित तमाम हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाते और बेचते हैं भूपेश भाई!

भूपेश कुंभारे ने मजीठिया वेज बोर्ड का केस भी लगाया है। मजीठिया को लेकर इनका जुनून देखने लायक है… माननीय सुप्रीम कोर्ट में जब इस मामले की तारीख पड़ती थी, मुझसे और शशिकांत सिंह से भी पहले यह भाई साहब उस होटल में आकर ठहरे मिलते थे, जहां हमारी मुंबई की टीम हमेशा रुकती है। फिर वापसी में भगवान के गले का हार और मणि वगैरह खरीद लेते थे, जो दिल्ली की मार्केट में सस्ता मिलता है। जब हम कुंभारे जी से उनके संघर्ष के बारे में पूछते, अक्सर उनका यही जवाब मिलता- ‘सर, छोडूंगा नहीं… मजीठिया वेज बोर्ड तो लूंगा ही।’

इसके बाद खुद-ब-खुद हंस पड़ते- ‘भगवान ने नौकरी छुड़वाई है न… इसलिए भगवान को ही बेचता हूं !’

स्वाभाविक है कि यदि हम सकारात्मक सोच की बात करें तो कुंभारे जी एक आदर्श उदाहरण हैं… मिट्टी के भगवान गढ़ने वाला यह शख्स स्वयं न जाने किस मिट्टी का बना है !

#bhadas10

– मुंबई से मजीठिया क्रांतिकारी धर्मेन्द्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट.

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https://www.youtube.com/watch?v=UmK1ihBhbN0

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1 Comment

1 Comment

  1. संजय कुमार सिंह

    September 13, 2018 at 11:29 am

    इस परिचय को पढ़कर याद आया कि जितने लोगों को पुरस्कार मिल रहा है उनका संक्षिपत परिचय मय फोटो छप सके तो एक दस्तावेज होगा।

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