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Just Dial वाले डाक्टरों से पैसे लेकर उन्हें टॉप पर डिस्प्ले करते हैं!

Avyact Agrawal : एक काम का सच… अमिताभ बच्चन जस्ट डायल के एड में कहते दिखते हैं न कि, बेस्ट डॉक्टर आप जस्ट डायल के एक क्लिक से ढूंढ सकते हैं। शहरों में अब बहुत लोग डॉक्टर्स की रेटिंग एवं जानकारियां इन एप्प्स से लेने लगे हैं। लेकिन सच यह है कि यह एक झूठ मात्र है।

इस तरह के विभिन्न एप्प्स में यदि आप किसी भी शहर या speciality का चिकित्सक ढूंढना चाहेंगे तो आपको उन्ही चिकित्सकों के नाम पहले डिस्प्ले होंगे या फ़ोन पर बताए जाएंगे जिन्होंने इन कंपनियों को पैसे दिए होंगे। यह कीमत आम तौर पर मिडल सिटी में 6000 सालाना से 18000 सालाना तक होती है। मुम्बई, बैंगलोर , दिल्ली जैसे शहरों में इससे 2 से 4 गुना अधिक। मतलब 50000 सालाना तक हो सकती है।

साथ ही किस मरीज़ ने सर्च किया, यह जानकारी भी डॉक्टर को तुरंत मैसेज एवं email कर दी जाएगी। किस फिक्स पोजीशन पर डॉक्टर को दिखाया जाएगा, इसके हिसाब से कीमत तय होती है। जैसे 1 साल तक टॉप 2 प्लेस पर मुझे दिखना है तो अधिक पैसे लगेंगे। बहुत से अच्छे चिकित्सकों को सामने डिस्प्ले ही नहीं किया जाएगा। बहुत स्क्रॉल करने पर आपको नाम दिख सकेगा।

आप जितना सर्च करेंगे इन एप्प्स पर डॉक्टर्स से, अस्पतालों से उतने ही पैसे लिए जा सकेंगे। इसकी भरपाई अंततः आप ही करेंगे। मेरे पास लगभग हर हफ्ते फोन आता है इस ‘payed membership’ को लेने के लिए। इसलिए भारत के लोगों, अब आप पूछेंगे फिर किस पर भरोसा करें। हाँ यह कठिन है। कुछ भी सही चुनना कठिन ही होता है चाहे वह कैरियर हो, जीवनसाथी हो, वकील हो या चिकित्सक हो या सरकार हो।

लेकिन इन सबमें गूगल सर्विस बेहद ईमानदार, विश्वसनीय है। गूगल सर्च पर टाइप किया कीजिये। डॉक्टर का नाम या specialty, शहर का नाम। इसमें दी गई star ratings, comments भी genuine होते हैं। साथ ही चाहे तो आप अपने चिकित्सक से प्रश्न भी पूछ सकते हैं। गूगल की community guidelines बेहद strict हैं। ऐसा मैं यूट्यूब के अपने अनुभव के आधार पर भी कह रहा हूँ। और सबसे अच्छा तो भैया, पड़ोसी से, मोहल्ले से ज़रा मेल मिलाप रख लो, वो भी बहुत है। लेकिन फिऱ भी गलती हो सकती है। भीड़ के कहने से डॉक्टर अच्छा है या कम अच्छा है, यह मत जज कीजिये। न ही हर बार तुरंत रिज़ल्ट्स से जज कीजिए।

उसका आत्मविश्वास, क्वालिफिकेशन (हालांकि क्वालिफिकेशन लॉजिकल होने की गारंटी नहीं), समझाने का तरीका, इमरजेंसी में साथ (ज़ैसे फ़ोन उठाना या कोई और बैकअप) एवं लॉजिकल explanation है या नहीं। उपरोक्त बातों पर ध्यान दीजिए। इससे चिकित्सकों को भी वैज्ञानिक रूप से updated रहने, sincere रहने की ज़िम्मेदारी का अहसास होगा। यह एक स्वस्थ सकारात्मक प्रतियोगिता होगी। न कि उन्हें चीप मार्केटिंग टेक्टिक्स से भीड़ जुटाने का मोह होगा।

आपका
Dr Avyact

फेसबुक के चर्चित राइटर डाक्टर अव्यक्त अग्रवाल की वॉल से.

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