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मजीठिया पर फैसले की डेट करीब आते ही सुप्रीम कोर्ट के जजों पर उमड़ रहा मीडिया मालिकों का प्रेम

जैसे-जैसे सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले पर अंतिम सुनवाई की तिथित नजदीक आती जा रही है, मीडिया मालिकों सर्वोच्च अदालत के जजों के लिए प्रेम उमड़ता जा रहा है।  पिछले दिनो सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एनवी रमण इनाडु समाचार पत्र के मालिक रामोजी राव के घर अतिथि बन कर पहुंचे थे। अब राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा के साथ एक मीडिया सेमीनार को सम्बोधित करने वाले हैं।  

जैसे-जैसे सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया मामले पर अंतिम सुनवाई की तिथित नजदीक आती जा रही है, मीडिया मालिकों सर्वोच्च अदालत के जजों के लिए प्रेम उमड़ता जा रहा है।  पिछले दिनो सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एनवी रमण इनाडु समाचार पत्र के मालिक रामोजी राव के घर अतिथि बन कर पहुंचे थे। अब राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा के साथ एक मीडिया सेमीनार को सम्बोधित करने वाले हैं।  

इस सेमीनार का आयोजन वकीलों की संस्था  बार कौन्सिल ऑफ राजस्थान ने 17 -18 अप्रैल को जयपुर मैं किया है। अरुण मिश्रा भी सीनियर जज रंजन गोगई के साथ सुप्रीम कोर्ट की  उस बैंच में शामिल रहे हैं, जिसने सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेतनमान बोर्ड्स की सिफारिशों और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू न करने के खिलाफ याचिका की सुनवाई की थी. 

राजस्थान पत्रिका के मालिक गुलाब कोठारी के खिलाफ पत्रकारों ने सुप्रीम कोर्ट मैं अवमानना की याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई चल रही है। अगली तारीख 28 अप्रैल है। गुलाब कोठारी इन दिनो सुप्रीम कोर्ट के जजों के नजदीक रहने का कोई भी मौका तलाशते रहते हैं।  उन्होंने केसीजे अवार्ड समारोह मैं भी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आर एम लोढ़ा को बुलाया था। कोठारी को लग रहा है कि ऐसा करके वे जेल जाने से बच जाएंगे। पत्रकारों ने इस तरह के निमंत्रणों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को दे दी है। 

सुप्रीम कोर्ट के जज इनाडु अखबार के मालिक के समारोह में शामिल

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1 Comment

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  1. haal naidunia

    April 13, 2015 at 2:29 pm

    उतरने लगी आनंद की मेहंदी,
    दबाव में लगातार गलत निर्णय
    कर रहे हैं पांडे

    भास्कर से हाल ही में बड़ी उम्मीद से इंदौर नईदुनिया में लाए आनंद पांडे की मेहंदी उतरने लगी है… ऊंची और बड़ी बातों से अपनी मार्केटिंग कर रहे पांडे नईदुनिया में आ तो गए पर काम के दबाव से दो ही महीनों में सांसे फूलने लगी है… पांडे के दबाव में आने की एक बड़ी और है… गलत साथियों का चयन… पांडे के साथ रायपुर भास्कर में काम कर रहे मनोज प्रियदर्शी को मोटी सेलेरी देकर नईदुनिया लाया गया… भाषा ज्ञान और अंग्रेजी में कमजोरी के बावजूद उन्हें सेंट्रल डेस्क का प्रभारी बना दिया… स्वाभाविक था प्रतिभाशाली लोग परेशान होने लगे… भरे संपादकीय हॉल में जब सेंट्रल डेस्क के वरिष्ठ सहयोगी सचींद्र श्रीवास्तव ने मनोज को उनके कमजोर न्यूज सेंस पर आईना दिखाया तो पांडे के प्रिय पात्र प्रियदर्शी हत्थे से उखड़ गए… दोनों में जमकर तू-तू मैं-मैं हुई… सचींद्र तब और दुखी हो गए जब बेकसूर होने के बाद भी पांडे ने उन्हें आड़े हाथ लिया… अच्छे लोगों पर नजरें जमाए बैठे भास्कर ने मौके का फायदा उठाया और काम के जानकार सचींद्र को तुरंत ऑफर दे दिया… सचींद्र ने भी जमकर शॉट मारा, पद और पैसे में प्रमोशन के साथ अपना भाग्य भास्कर से जोड़ लिया… ऐसी ही कहानी उज्ज्वल शुक्ला की है… पंडित जी ने पिछले 10 सालों से नईदुनिया से नाता जोड़ रखा था… पांडे परिवार से सार्वजनिक भिडंत होने के बाद उन्होंने सधा हुआ वक्तव्य जारी किया – यदि हाड़तोड़ मेहनत के बाद जिल्लत ही सहनी हो तो ज्यादा पैसे व बड़े पद के ऑफर को क्यों ठुकराया जाए… नईदुनिया सेंट्रल डेस्क पर ऑनलाइन एडिटिंग-पेजमेकि  ंग का यह आजमाया खिलाड़ी अब भास्कर की ओर से बेटिंग कर रहा है… अब कहानी में थोड़ा आक्रामक घुमाव है… सेंट्रल डेस्क की पुरानी साथी सीमा शर्मा ने पांडे जी के पहियों से सीधा पंगा लिया… पूरे संपादकीय के सामने मनोज प्रियदर्शी का ऐसा पानी उतारा कि एकबारगी तो सभी को सांप सूंघ गया… सीमा ने तर्क के साथ अपनी बात भी रखी, तार्किक परिणाम भी निकाला… असर देखिए अब उनके नाम से, उनसे जुड़ी सारी बातें अपने आप सध जाती हैं… अब जोर का झटका धीरे से… नईदुनिया की मिट्टी में पले बढ़े मधुर जोशी ने सेलरी और थुक भरा तमाचा इस्तीफे के रूप में दे मारा… जोशी जी की सुबह अब भास्कर के उजाले में हो रही है… जानकारी के लिये बता दूं कि गजेंद्र मिटिंग से गालियां देकर नहीं गया। बस उसने पांडे की गालियां खाने से इंकार कर दिया और तमीज से बात करने की नसीहत दे डाली। जबकि पांडे को जूते लगाये जाने चाहिये थे। ऐसे ही जो जयेंद्र जी को जानता है वो सपने में भी नहीं सोच सकता कि वे गलती करें और उनको भाफी मांगना पड़े। एक मूर्ख और जाहिल को यदि किसी समझदार का हेड बनाया जाएगा तो समझदार जयेंद्र जी की तरह खुद को किनारे कर लेगा। गधे को घोड़े पर सवार होते देखना है तो अभी नईदुनिया आ जाओ।

    खुफिया विभाग पर पांडे खर्च कर रहे डेढ़ लाख रुपए महीना

    शोले का मशहूर पात्र हरिराम नाई आपको याद ही होगा… ठीक यही भूमिका में इन दिनों काम कर रहे हैं सेंट्रल डेस्क के मनोज प्रियदर्शी, सिटी डेस्क के नितिन शर्मा और रिपोर्टर प्रमोद त्रिवेदी… तीनों का कुल वेतन करीब डेढ़ लाख रुपए महीना है… लेकिन जिम्मेदारी है केवल सूचना संग्रह… कहां क्या हो रहा, कौन क्या कर रहा, किसने किससे कितनी देर क्या बात की, पल-पल के अपडेट पर नजर रखना और सीधे सिंहासन तक खुफियापंथी करना… जिम्मेदार पद-मोटा वेतन और काम केवल हरिराम नाई का… बस यही वजह है कि इन दिनों ये तीनों पूरी टीम के निशाने पर हैं… कोई आश्चर्य नहीं कि किसी दिन कोई सिरफिरा कोई बड़ी खबर दे दे…

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