Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

राजस्थान

मनुवादी एवं धार्मिक अंधविश्वासों के चलते हर दिन बेमौत मारे जा रहे लोग !

सोशल मीडिया के मार्फ़त देशभर में मनुवाद के खिलाफ एक बौद्धिक मुहिम शुरू हो चुकी है। जिसका कुछ-कुछ असर जमीनी स्तर पर भी नजर आने लगा है! लेकिन हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विचारणीय सवाल यह है कि यदि हमें मनुवाद के खिलाफ इस मुहिम को स्थायी रूप से सफल बनाना है तो हमें वास्तव में इस देश के बहुसंख्क लोगों को और विशेषकर आम लोगों को साथ लेना होगा, जिनको बामसेफ और बसपा वाले बहुजन कहते और लिखते हैं।

सोशल मीडिया के मार्फ़त देशभर में मनुवाद के खिलाफ एक बौद्धिक मुहिम शुरू हो चुकी है। जिसका कुछ-कुछ असर जमीनी स्तर पर भी नजर आने लगा है! लेकिन हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण और विचारणीय सवाल यह है कि यदि हमें मनुवाद के खिलाफ इस मुहिम को स्थायी रूप से सफल बनाना है तो हमें वास्तव में इस देश के बहुसंख्क लोगों को और विशेषकर आम लोगों को साथ लेना होगा, जिनको बामसेफ और बसपा वाले बहुजन कहते और लिखते हैं।

हकीकत में मनुवाद बामसेफ और बसपा के नेतृत्व द्वारा परिभाषित देश के बहुसंख्यक अर्थात बहुजनों के कंधे पर पर ही ज़िंदा है। इसलिए हमें ऐसा सरल और व्यावहारिक रास्ता निकालना होगा, जिससे कि दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक अर्थात सभी अनार्य भारतीय केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि दैनिक व्यवहार में भी मनुवाद के विरुद्ध स्वेच्छा से एकजुट हो सकें, जिसके लिए मनुवाद के विरुद्ध केवल अतिवादी सोच या अतिवादी लेखनी मात्र से कुछ नहीं होगा। बल्कि ऎसी अतिवादी सोच या लेखनी हमें हमारे आम लोगों से दूर भी ले जा सकती है। यह मुहिम दोधारी तलवार जैसी है। 

मेरा मानना है कि हमें हमारे अनार्य लोगों के साथ सीधा संवाद कायम करना होगा। वातानुकूलित कक्षों से बाहर निकलकर हमें लोगों के बीच जाना होगा, क्योंकि चालाक आर्यों ने मनुवाद को हजारों सालों से धर्म की चासनी में लपेट रखा है। समस्त अनार्य, आर्यों के मनुवादी षड्यंत्र के शिकार होते आये हैं। आज भी मानसिक रूप से हमारे लोग मनुवादियों के गुलाम हैं और सबसे दुखद तो यह है कि उनको इस गुलामी का अहसास ही नहीं है, बल्कि इस मानसिक गुलामी को अनार्य लोग धार्मिक स्वाभिमान और आस्था का प्रतीक मान चुके हैं। उनके अवचेतन मन पर मनुवाद ही धर्म के रूप में स्थापित हो चुका है। हमारे ही लोगों को मनुवाद का विरोध, पहली नजर में धर्म का विरोध नजर आता है, ऐसे में हमें यह विचार करना होगा कि हम किस प्रकार से अपने लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहात किये बिना, उनको किस प्रकार से मनुवाद से मुक्ति दिला सकते हैं? 

यदि हम बिना विचारे मनुवाद और मनुवादी धार्मिक प्रतीकों का सीधा विरोध करते रहे तो ऐसे में सबसे बड़ा खतरा यह है कि आर्य-मनुवादियों तथा अनार्य मनुवादी अंधभक्तों द्वारा हमारी मुहिम को कमजोर करने के लिए हमारे मनुवाद विरोधी सही, सच्चे और तार्किक विचारों को भी हिन्दू धर्म विरोधी करार दिए जाने के लिए पूरे प्रयास किये जायेंगे। बल्कि किये भी जा रहे हैं। जातीय खाप पंचायतों को हमारे खिलाफ खडा किया जा सकता है। जिनमें न तर्क सुने जाते हैं और न ही वहां पर, उनसे न्याय की अपेक्षा की जा सकती है! यही नहीं धर्म के नाम पर हमारे ही लोग हमारे खिलाफ खड़े हो सकते हैं! जिससे हमारी मुहिम पहले दिन से कमजोर हो जाती है। अत: हमको आत्मचिन्तन करना होगा कि मनुवाद के दुश्चक्र को कैसे परास्त किया जाए? 

इसके लिए हर उस व्यक्ति को जो मनुवाद से आहात है, उसको गहन चिन्तन और मनन करना होगा! यद्यपि मेरा निजी अनुभव है कि मनुवाद से सर्वाधिक आहत मेहतर जाति के लोग तक मनुवाद का खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं हैं! लेकिन यह भी सच है कि मनुवाद से मुक्ति के बिना भारत के अनार्यों, मूल निवासियों और वंचित वर्गों के लिए संविधान के अनुसार सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थापना असम्भव है! इसलिए हमें हर हाल में, लेकिन बौद्धिक तरीके से मनुवाद मुक्त समाज की स्थापना के लिए अनेक स्तरों पर लगातार प्रयास करने होंगे! सबसे पहले हम धर्म के नाम पर संचालित अवैज्ञानिक-अंधविश्वासों और स्वास्थ्य के साथ किये जाने वाले खिलवाड़ के प्रति आम लोगों में जागरण लाना होगा! जैसे उदाहरण के लिए हमें हमारे लोगों को समझाना होगा कि-रात दिन मंदिर, मस्जिद या चर्च में रहने वाला पुजारी, मौलवी या पादरी जब बीमार होता है तो वह अपना उपचार करवाने के लिए सीधा डॉक्टर के पास जाता है, जबकि अनार्य अनपढ़ और भोले लोग बीमार होने पर पुजारी, मौलवी या पादरी के पास जाते हैं! 

जहां इनको-झाड, फूंक, व्रत, भजन, कीर्तन, पाठ, सवामणी, कथा, गंदा, ताबीज आदि उपचार बतलाये जाते हैं और इस प्रकार मनुवादी धार्मिक अन्धविश्वास के चक्कर में हमारे लोग अपनी बीमारी को असाध्य बना लेते हैं! दुष्परिणामस्वरूप बीमारी इतनी असाध्य हो जाती है, जिसका डॉक्टर भी उपचार करने से इनकार कर देते हैं! बीमार की अकाल मौत हो जाती है! लेकिन मनुवादी इसे भी ईश्वर की इच्छा मानकर स्वीकार करने और बीमार की अकाल मृत्यु पर भी पुण्य-दान करने की सलाह देते हैं! एक कडवी सच्चाई यह भी है कि ऐसे मनुवादी-धार्मिक-अंधविश्वासों के चलते हर दिन सैकड़ों लोग बेमौत मारे जा रहे हैं! ऎसी मौतों के बाद भी मनुवादियों द्वारा हमें बतलाया जाता है कि दान-पुण्य करने से मृतक को मोक्ष मिलेगा और मृत-आत्मा को पाप नीच योनी से मुक्ति मिलेगी! यदि और कुछ नहीं कर सकते तो हम ऎसी पोंगापंथी धूर्त मनुवादी कहानियों से तो हम अपने अनार्य बन्धुओं को बचा ही सकते हैं! शुरूआत में ऐसे प्रयोग मनुवादी शिकंजे से मुक्ति के पुख्ता आधार बन सकते हैं!

लेखक डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ई-मेल संपर्क : [email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन