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सरकार के दावों पर भरोसा करें या मीडिया पर?

नवभारत टाइम्स की वेबसाइट पर ही एक खबर छपी है जिसका शीर्षक है- ये हैं देश के 10 कोरोना हॉटस्पॉट्स जहां लगातार बढ़ रहे हैं कोविड-19 के मरीज।

इस खबर में कहा गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन में से पहला हफ्ता गुजर चुका है। इसी एक सप्ताह में कोरोना के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।

देश की राजधानी दिल्ली से लेकर केरल तक देश के तमाम दूसरे शहर कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट्स बन रहे हैं। दिल्ली ( दिलशाद गार्डन और निजामुद्दीन) समेत जिन प्रदेशों में दो-दो कोरोना हॉटस्पॉट्स पाए गए हैं, उनमें केरल (कासरगोड़ और पथनामथिट्टा), उत्तर प्रदेश (नोएडा और मेरठ) और महाराष्ट्र (मुंबई और पुणे) शामिल हैं। वहीं, राजस्थान और गुजरात में एक-एक शहर (क्रमशः भिलवाड़ा और अहमदाबाद) को कोरोनना हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है।

इस खबर में लिखा है कि एक अंग्रेजी अखबार ने इंटिग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के एक सूत्र के हाले से बताया है कि जिन इलाकों में 10 से ज्यादा मामले सामने आ जाते हैं, उन्हें क्लस्टर माना जाता है और जिन इलाकों में ऐसे कई क्लस्टर बन जाते हैं, उनकी पहचान हॉटस्पॉट्स के रूप में की जाती है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोरोना के मरीजों की तादाद जितनी तेजी से बढ़ रही है कि हम निश्चिंत नहीं हो सकते। मगर हैरत इस बात की है कि आखिर सरकार किस आधार पर दावे कर रही है कि घबराने की जरूरत नहीं, हालात नियंत्रण काबू में है।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर पर गौर करने की जरूरत है। अरुण कुमार की बाइलाइन स्टोरी जिसका शीर्षक है- कोविड-19 भारत में कोरोना वायरस की अभी तक लोकल ट्रांसमिशन स्टेज। इस खबर में यह बताया गया है कि लॉकडाउन को करीब एक हफ्ते बीच चुके हैं और भारत सरकार को इसका असर सकारात्मक दिख रहा है। सरकार ने दावा किया है कि कोरोना वायरस हमारे देश में अभी दूसरी स्टेज में ही है। सरकार ने कहा है कि अगर तीसरी स्टेज में पहुंचे तो लोगों को सावधान करने के लिए तुरंत देंगे जानकारी।

इस खबर में लिखा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय के सह-सचिव लव अग्रवाल ने बताया, फिलहाल वायरस देश में लोकल ट्रांसमिशन अवस्था में है। अगर कम्युनिटी ट्रांसमिशन का कोई भी संकेत मिलेगा, तो सबसे पहले मीडिया को ही इसकी खबर दी जायेगी जिनके जरिये हम लोगों को जागरूक और इसके प्रति सावधान कर सकेंगे।

टीवी चैनलों और अखबारों के साथ ही ट्वीटर पर भी अहम जानकारियां मिल जाती हैं। इनमें प्रधानमंत्री से संबंधित जानकारियां और वीडियो लगातार चर्चा में हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का फरमान जारी करने वाले प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित ट्वीट जंगल में आग की तरह फैल रहे है। ऐसा हो भी क्यों नहीं, पूरा देश उनकी तरफ टकटकी लगाये बैठा है। न जाने कब कौन सा फरमान जारी हो जाये।

मीडिया ही नहीं आम जनता खुद को अपडेट रखने के लिए ट्वीटर को गंभीरता से लेती है। वैसे भी सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रधानमंत्री के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे। लॉकडाउन के बीच रामायण और महाभारत का प्रसारण शुरू कर नेता भी सुर्खियों में रहें। इस घड़ी में जब देश कोरोना से जूझ रहा है ठीक ऐसे ही समय में प्रधानमंत्री मोदी योग अभ्यास के कुछ और वीडियो शेयर करते हुए कहते हैं कि तनाव में हो सकती है मददगार।

मोदी का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान खुद को फिट रखने के लिए योगासन किया जाये तो इससे शरीर को स्वस्थ और मन को प्रसन्न रखने में मदद मिलती है। पीएम की बात तो ठीक है मगर कोरोना काल में हम दिग्गज नेताओं को घर से काम करते और फिटनेस मंत्र देते हुए या टीवी पर रामायण महाभारत देख कर खुश कैसे हो सकते हैं। ऐसे समय में जब अपनी जान की फिक्र न करते हुए अनगिनत मजदूर पैदल अपने गांव की ओर चल देते हैं। उनकी सहायता तो दूर, अचानक कहीं से इन्हीं प्रवासी मजदूरों पर केमिकल का छिड़काव कर दिया जाता है। हर विषय पर अपने मतलब की राजनीति करने वाले राजनेता ये भूल जाते हैं कि उनकी बयानबाजी से कुछ फर्क नहीं पड़ता, बेचारा मजदूर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रह जाता है।

पत्रकार एसएस प्रिया का विश्लेषण

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