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जगेंद्र हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं, खूनियों के खिलाफ आज से आरपार की लड़ाई शुरू : सौवीर

चौरी-चौरा हत्‍याकाण्‍ड में पकड़े गये 170 लोगों पर भी जघन्‍य आरोप लगे थे और अंग्रेजी हुकूमत ने इन सब को फांसी पर लटका देने का हुक्‍म दे दिया था। लेकिन उस समय महामना मदनमोहन मालवीय ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर इन वकालत की पुरानी डिग्री निकाली और बिना कोई पारिश्रमिक हासिल किये, इनमें से 151 लोगों को फांसी के फंदे से आजाद कराने के लिए जी-जान लड़ा दिया। 

चौरी-चौरा हत्‍याकाण्‍ड में पकड़े गये 170 लोगों पर भी जघन्‍य आरोप लगे थे और अंग्रेजी हुकूमत ने इन सब को फांसी पर लटका देने का हुक्‍म दे दिया था। लेकिन उस समय महामना मदनमोहन मालवीय ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर इन वकालत की पुरानी डिग्री निकाली और बिना कोई पारिश्रमिक हासिल किये, इनमें से 151 लोगों को फांसी के फंदे से आजाद कराने के लिए जी-जान लड़ा दिया। 

तो जब बिना कोई फीस वसूले मालवीय जी ने चौरीचौरा काण्‍ड में मुकदमा-पैरवी की, तो जागेन्‍द्र सिंह की मौत का मुकदमा लड़ने का फैसला अब मैंने कर दिया तो कौन सा अपराध कर दिया है भइया। कहने वालों ने तो आजकल मुझ पर यहां तक आरोप लगाने का अभियान छेड़ दिया है, कि जागेंद्र के तौर पर मैं किसी दलाल-गुण्‍डे और रंगदार की पैरवी कर रहा हूं। 

हा, कर रहा हूं, और हमेशा करता भी रहूंगा। मालवीय जी को साफ पता था कि 151 बरी हुए अभियुक्‍त निर्दोष हैं, और वे चीख-चीख कर अपना पक्ष खुली अदालत में पेश कर रहे थे। जबकि जागेन्‍द्र जिन्‍दा फूंक डालने के बादजूद चीख-चीख कर आरोप लगा रहा था कि मंत्री राममूर्ति वर्मा, कोतवाल श्रीप्रकाश राय, उसके चार साथी सिपाही, गुफरान और अमित भदौरिया ने उन्‍हें जिन्‍दा फूंक डाला है। 

अब मैं किसका साथ लेता, अपने विरोधियो के आरोपों से डर कर मैदान से भाग जाता, या फिर महामना मालवीय जी की तरह मैदान मैं लोगों को तर्क देता कि जागेन्‍द्र बेईमान, दलाल या अपराधी नहीं था।

मैंने मालवीय जी का चोला उठाया और जागेन्‍द्र की पैरवी शुरू कर दी। और उसके साथ विरोधी तो चंद मिले, लेकन असंख्‍य समर्थक-मित्र जुट गये। इन सभी के चेहरे और उत्‍साह से साफ लग रहा था कि इस मसले पर वे अलग-अलग मगर समवेत मदनमालवीय जी की भूमिका में तब्‍दील हो चुके हैं।

शाम को टाइम्‍स नाउ के ब्‍यूरा चीफ प्रांशु मिश्र, स्‍वतंत्र पत्रकार मुदित माथुर, दादा और मैंने ने तय किया कि फैसलाकुन लड़ाई छेड़ी जाएगी। आईबीएन के शलभमणि त्रिपाठी और एबीपी न्‍यूज के प्रभाष झा, नवलकांत सिन्‍हा, काशी यादव समेत अनेक पत्रकार-लेखक-समाजिक कार्यकर्तााओं ने इस प्रयास की सराहना की और हमने इस बारे में तय कर लिया कि इस बारे में अब आर-पार की ही लड़ाई छेड़ी जाएगी। 

हम आप सब साथियों, कार्यकर्ताओं, समाजसेवी, संघों के प्रतिनिधि आयें और इस आंदोलन को अपना समर्थन दें, यही है हमारी आप सब से गुजारिश। हमारा नारा है, जगेंद्र हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं। 

धरना- शनिवार 20 जून, शाम 5 बजे, जीपीओ गांधी प्रतिमा पर। पत्रकार जागेंद्र को जलाकर मार दिए जाने की निर्मम घटना के कई दिन बाद भी उनके हत्यारे खुलेआम घूम रहे हैं। सरकार खुलकर आरोपी मंत्री के पक्ष में खड़ी है। जांच के नाम पर खानापूरी की जा रही है…और जागेंद्र के परिजनों की मांग के बाद भी सरकार मामले की जांच सीबीआई को देने के लिए तैयार नहीं है। जो जागेंद्र के साथ हुआ है…कल को किसी भी पत्रकार के साथ हो सकता है। पत्रकारों पर हमले के मामले हाल के दिनों में बढ़े हैं…पर अगर आरोपों की जद में सीधे सीधे सत्ताधारी दल और पुलिस के लोगों का नाम आए तो हालात चिंताजनक हैं। ऐसे में आइए हम सब मिलकर इस हालात के खिलाफ एकजुट हों, और जागेंद्र को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाएं। 

आइए,.हम सब, शनिवार 20 जून, 2015 को हजरतगंज,जीपीओ पार्क स्थित गांधी प्रतिमा पर धरने के लिए एकत्र हों। समय शाम 5 बजे.से 7 बजे तक। आपकी उपस्थिति, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र को मजबूत करने का संबल बनेगी। समय अभाव के चलते हम चाहकर भी सभी साथियों को फोन पर सूचित नहीं कर पा रहे हैं।

कुमार सौवीर के एफबी वाल से

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1 Comment

1 Comment

  1. pankajsrivastav

    June 20, 2015 at 3:22 pm

    souber dadda sataa ke in dalaalo ke khilaaf kaarvaai me saraa desh kii media aapkey sath hai .bihar me sapa kaa koi bhii kaarkram kii cov nahi hogaa aur sapaa ke sabhii kaarkram ko roka jaaeygaa.

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