यूपी के पत्रकारों, साथी पत्रकार जगेंद्र सिंह की शहादत को भूल मत जाना, सपा को जरूर हराना

आज यूपी में कई पत्रकार सपा की दलाली करने में व्यस्त हैं। ये लोग पत्रकार जगेंद्र सिंह की शहादत को भुलाकर उनका अपमान कर रहे हैं। लेकिन यूपी के ढेर सारे पत्रकार याद रखें हुए हैं वो बर्बरता जिसे सपा के लोगों ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के साथ की थी। अगर सपाइयों की कमर न तोड़ी गई तो वो बर्बरता कल के दिन आपके साथ भी होगी। तब आपको पश्चाताप होगा कि हम उन लोगों की दलाली कर रहे थे जिन्होंने यूपी में कानून का नहीं, गुंडों एवं हत्यारों का राज चला रखा है। इसीलिए यूपी के पत्रकारों को शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या को याद रखकर इस चुनाव में पत्रकारिता करने की जरूरत है। सपा के गुंडाराज, बलात्कारराज, लूट, हत्या, भ्रष्टाचार, दबंगई, अपहरण को यूपी की जनता के सामने ना लाकर सपा की दलाली करने वाले पत्रकारों पर धिक्कार है।

पत्रकार जगेंद्र केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर कोर्ट में बयान का बना रहे हैं दबाव

बरेली : शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह मर्डर केस में आरोपी पुलिसकर्मी बरेली क्राइम ब्रांच पर जबरन दो गवाहों के कोर्ट में बयान कराने का दबाव बना रहे हैं। इन गवाहों के बयान के जरिए वह खुद को केस से बचाना चाहते हैं, लेकिन बरेली के पुलिस अधिकारियों ने आईओ को बिना किसी दवाब के सही जांच करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

जगेंद्र हत्याकांड मामले पर प्रेस काउंसिल ने यूपी सरकार और यूपी पुलिस की कड़ी आलोचना की

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक पत्रकार की हत्या पर जारी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) की एक रिपोर्ट में यूपी पुलिस की और प्रशासन की भूमिका की निंदा की गई है। प्रेस काउंसिल ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए गंभीर उपाय करने की भी मांग की है। 8 जून को शाहजहांपुर में एक स्वतंत्र पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के बाद पीसीआई ने जांच के लिए एक टीम का गठना किया था। पीड़ित पत्रकार ने मरने से पहले दिए गए अपने बयान में कहा था कि मंत्री राम मूर्ति वर्मा के खिलाफ लिखने के कारण स्थानीय पुलिस ने उन्हें जिंदा जला दिया। रिपोर्ट में राज्य सरकार से एक निष्पक्ष एजेंसी द्वारा मुकम्मल जांच करवाने की अनुशंसा की गई है। रिपोर्ट में लिखा है-

पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भेजा यूपी सरकार को नोटिस

उत्तर प्रदेश में पत्रकार जगेंद्र सिंह को जलाकर मारे जाने के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने यह नोटिस उस याचिका पर सुनवाई के बाद जारी कि जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर की गुहार लगाई गई है. सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार को जलाए जाने और उनकी हत्या के मामले की स्वतंत्र जांच के लिये जगेंद्र के बेटे द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने की परिस्थितियों की सीबीआई जांच हेतु दायर याचिका पर विचार करने का निश्चय किया. इससे पहले याचिका दायर कर पत्रकारों की सेफ्टी के लिए गाइडलाइंस बनाए जाने की बात कही गई है.

Scribe Jagendra Singh burning case : SC seeks response from Centre, UP on PIL

New Delhi: The Supreme Court on Friday decided to entertain a plea seeking CBI probe into the circumstances leading to the withdrawal of a petition by a journalist’s son, who had sought an independent probe into the alleged burning and murder case of his father in which a state minister and five others have been booked. An application filed by a Lucknow scribe has claimed that the son of slain journalist, Jagendra Singh, was pressurised and threatened by the alleged killers of his father, following which he had written a letter to his lawyer on July 23 wishing to withdraw the petition.

पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के गवाहों को बचाना जरूरी : आईपीएस अमिताभ

लखनऊ : शाहजहांपुर के दिवंगत पत्रकार जागेंद्र सिंह के बेटे के अचानक मंत्री राममूर्ति वर्मा के पक्ष में बयान देने के बाद आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस मामले में जागेंद्र के लड़कों सहित सभी गवाहों की रक्षा करने और सच्चाई सामने लाने के लिए राज्य सरकार को उपयुक्त माहौल बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया है।

यूपी सरकार ने जगेंद्र सिंह के परिवार को 30 लाख क्यों दिए!

टाइम्स ऑफ इंडिया में एक खबर है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के बेटे ने कहा है कि उसे सीबीआई जांच नहीं करानी क्योंकि उसके पिता कन्फयूज्ड थे और इसी मतिभ्रम के कारण उन्होंने आत्मदाह किया था। उन्हें किसी ने जलाया नहीं और मंत्री एकदम निर्दोष है।

जगेंद्र के घर वालों को धमका रहे आरोपी, पीएम से गुहार, पूरा परिवार यूपी छोड़ने की फिराक में

शाहजहांपुर (उ.प्र.) : जिंदा जलाकर मारे गए पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार को धमकाया जा रहा है। घटना की सीबीआई जांच करने की मांग करते हुए जगेंद्र के बेटे राहुल ने पिछले दोनो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। तभी से परिवार पर दबाव डाला जा हा है कि वे समझौता कर लें अन्यथा उनके साथ अच्छा न होगा। बताया जा रहा है कि जगेंद्र के दोनो बेटे पिछले कई दिनो से लापता हैं। उनका कोई पता नहीं चल रहा है। जगेन्द्र के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। 

पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च 8 जुलाई को, आप भी आइए

अब हमारे और आपके सड़क पर उतरने का वक्त है… पत्रकारों की लगातार जघन्य हत्याओं और उत्पीड़न के खिलाफ नोएडा से दिल्ली तक पैदल प्रोटेस्ट मार्च का कार्यक्रम तय किया गया है जो 8 जुलाई को यानि कल होना है. इसमें आप भी आइए. चुप रहने, घर बैठे का वक्त नहीं है अब. देश भर में पत्रकारों की लगातार जघन्य तरीके से हत्याएं हो रही हैं. जगेंद्र सिंह, संदीप कोठारी, अक्षय सिंह… समेत दर्जनों हत्या-उत्पीड़न के मामले हैं. यह सिलसिला बदस्तूर जारी है.

संविधान के मौलिक अधिकारों का वजूद खतरे में, कसौटी पर नाकारा यूपी सरकार

अभी तक तो यूपी सरकार की किरकिरी कराने वाले चाचा जान ने कल्वे जव्वाद पर हमला बंद  भी नहीं किया था कि उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राम मूर्ति वर्मा का पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड में नामजद होना यूपी सरकार के लिए एक चिंता का सवाल बन गया है । सरकार पत्रकार हत्याकांड में नामजद मंत्री पर कत्तई एक्शन न लेने के मूड में है । अगर नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों पर गौर किया जाय तो प्रतिवर्ष जितने पत्रकारों के देश भर में उत्पीड़न के मामले  प्रकाश में आते हैं, उसके 72 % मामले अकेले यूपी के होते हैं, जो राज्य के वजीर ए आलम अखिलेश के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करते हैं। क्या अखिलेश के अंदर शासन व सत्ता को सुचारु रूप से चल़ाने का म़ाद्दा खत्म हो चुका है? क्या युवा शक्ति के आकलन में कोई सेंध है?

मुआवजा मिल गया न, तो अब जंग छेड़ो दोस्‍तों, ताकि जगेन्‍द्र की चिता को न्‍याय मिले

कुछ मित्रों को लगता है कि जागेन्‍द्र के परिवारों को 30 लाख रूपये, दो बच्‍चों को सरकारी नौकरी और उसके घर की दूसरे से कब्‍जायी पांच एकड़ जमीन को छ़ुडवाने के सरकारी फैसले के बाद उनका परिवार संतुष्‍ट है और सरकार भी हल्‍की हो गयी है। ऐसे लोगों को लगता है कि यह तो धोखाबाजी हो गयी। जागेन्‍द्र के लिए जंग लड़ी हम सब लोगों ने और मलायी काट लिया उसके घरवालों ने, सरकार ने और सरकारी दलाल पत्रकारों ने। उन्‍हें लगता है कि अब यह सारा मामला ठण्‍डा हो चुका है और इस देश में अब इसके बाद कुछ भी नहीं हो सकता है। क्‍योंकि लोगों ने एक-दूसरे को खरीद-बेच लिया है।

के. विक्रम राव, हेमन्‍त तिवारी और सिद्धार्थ कलहंस जैसों को दूर रखना अन्यथा पूरा मिशन तबाह कर देंगे

Kumar Sauvir : अखिलेश जी। मुझे अपनी मौत का मुआवजा एक कराेड़ से कम मंजूर नहीं… अपने मुआवजा सेटलमेंट के बंटवारे का पूरा प्‍लान तय कर लिया है मैंने…  पत्रकार-समिति के लोगों, 10-20 पेटी अलग ले लेना, पर मेरे हिसाब से नहीं… मैंने कर रखा है एक करोड़ मुआवजा के एक-एक पैसा का हिसाब प्‍लान… मेरी चमड़ी खिंचवाना व उसमें भूसा भरके मेरी प्रतिमा स्‍थापित कराना मित्रों… 

संदीप-जगेंद्र हत्याकांड : खनन माफिया के सरपरस्त आम इंसान नहीं

उत्तरप्रदेश के जगेंद्र सिंह और मध्यप्रदेश के संदीप कोठारी की हत्याओं में एक समानता है और वह है दोनों अपने—अपने राज्यों के खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिख रहे थे। ये वो माफिया है जिसकी सरपरस्ती भारत के हर राज्य में पॉवरफुल मंत्रियों नेताओं के पास होती है। ये माफिया इतना बेखौफ है कि पत्रकार तो बहुत दूर की बात है अगर कोई पुलिस अधिकारी, तहसीलदार या अन्य कोई इनके क्षेत्र में कार्रवाई के लिये घुस जाये तो ये दिनदहाडे ट्रेक्टर, डंफर से उसे कुचलने में कोताही नहीं बरतते।

जगेन्द्र प्रकरण : याचिकाकर्ता सतीश जैन और दिल्ली के पत्रकार विशेष ध्यान दें

मैं हमेशा कहता हूँ कि अच्छा, बुरा कुछ नहीं होता। अति ही बुराई है। सद्कर्म की भी अति हो जाये, तो परिणाम नकारात्मक ही आता है। आप आगे को भागिए और भागते रहिये, तो एक दिन लौट कर वहीं आ जायेंगे, जहां से चले थे, ऐसे ही पीछे को दौड़ने पर होगा। पीछे को दौड़ने वाला भी रुके न, तो वो भी एक दिन वहीं आ जायेगा, जहां से भागा था, इसीलिए बीच की अवस्था को शिखर कहा जाता है, संतुलन जीवन की सर्वश्रेष्ठ अवस्था है। शिखर पर ठहरे रहना होता है, मतलब संतुलन बनाये रखना होता है, लेकिन कोई शिखर पर पहुंचने के बाद भी संतुलन न बना सके, तो उस पार नीचे जाने का ही रास्ता होता है फिर। खैर, मन धर्म-अध्यात्म और कर्म पर चर्चा का नहीं है। मन है शाहजहांपुर के पत्रकार जगेन्द्र कांड पर बात करने का। इस प्रकरण में भी समाजसेवा की थोड़ी अति हो गई, जिससे परिणाम अपेक्षित नहीं आ पा रहा है। लखनऊ के चर्चित अधिवक्ता प्रिंस लेनिन ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में ही गहन अध्ययन के बाद जगेन्द्र प्रकरण में जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सरकार से जवाब माँगा गया। आशा थी कि बहस के बाद सीबीआई जांच के आदेश हो जायेंगे, उससे पहले दिल्ली के पत्रकार सतीश जैन ने उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर दी, जिस पर उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और प्रदेश सरकार से जवाब माँगा है।

यह रहा जगेंद्र हत्याकांड के कातिल के फोन कॉल का ऑडियो सच, खुदकुशी का दावा सफेद झूठ

मुख्‍यमंत्री और उनकी पुलिस का कहना है कि जागेन्‍द्र सिंह दाह-हत्‍याकाण्‍ड की अभी जांच की जाएगी। लेकिन इसके पहले ही मैं आप मित्रों को सुना-दिखा रहा हूं कि किस तरह घेर कर मारा गया था जाबांज पत्रकार जागेन्‍द्र सिंह। मैं दे रहा हूं इससे जुड़े पुख्‍ता प्रमाण, जबकि हमारे मुख्‍यमंत्री ऐलान कर चुके हैं कि जांच के बाद ही किसी पर कोई कार्रवाई की जाएगी। पेश है उस रोंगटे खड़े कर देने वाले काण्‍ड के एक अभियुक्‍त की अपने एक परिचित से हुई बातचीत का ब्‍योरा—- 

मुआवजे ने किया सिद्ध किया, मंत्री दोषी

अमर शहीद पत्रकार जगेन्द्र सिंह के परिवार द्वारा मुआवजा स्वीकार कर लेने व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बात को मानकर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही जाँच से संतुष्ट होने की बात को दिल का ताड़ बनाकर पेश करने वाले साथियों से मेरा एक प्रश्न है। इन बातों को स्वीकार करने के अलावा उन गरीब, कमजोर, डरे हुए लोगों के पास क्या कोई दूसरा विकल्प था। जगेन्द्र को जिन्दा जला देने वाली घटना को आत्महत्या साबित करने में जुटी यूपी पुलिस के कार्य क्षेत्र में उनको सुरक्षित रहना है या नहीं? इनका फैसला समाजवादी पार्टी के तथाकथित गुंडों एव खाकी के द्वारा ही तो किया जाना है। जिन्दा रहना है तो बात मानो वर्ना कौन बचायेगा हम जगेन्द्र के परिवार को कही भी दोषी साबित नहीं कर सकते। 

जगेन्द्र सिंह हत्याकांड : प्रेस परिषद के खलीफाओं तक ने खूब फायदा उठाया

लाश पर रोटियां कैसे सेंकी जाती हैं, उसका सबसे ज्वलंत प्रमाण है जगेन्द्र सिंह हत्याकांड। छुटभैये पत्रकारों और नेताओं से लेकर प्रेसकौंसिल के खलीफाओं तक ने खूब फायदा उठाया इस प्रकरण का। जिन सरदार शर्मा के खिलाफ अपने जीवित रहते जगेन्द्र सिंह मोर्चा खोले रहे, हर कोई उन्ही से जाके पूछता रहा- जगेन्द्र पत्रकार था, तो कैसे? 

फिर वहीं पर जीमेंगे जागेन्‍द्र सिंह की तेरहवीं का भोज

देख्‍यौ भइया, तेवरिया ऐण्‍ड कम्‍पनी वालों ने तो शाहजहांपुर में जिन्‍दा फूंक डाले गये जागेन्‍द्र सिंह वाला मामिला को 20 लाख रूपया में डन ( नक्‍की-पक्‍का ) कराया था। सरकार और अफसरों के सामने डींगें खूब मारी थी कि,” यह बड़ा मुश्किल काम है। आजकल पत्रकार खुद को बहुत ईमानदार बनते हैं। ऐसे में इन पत्रकारों को सेट करना बड़ा मुश्किल होता है। खुद की छवि की भी बलि देनी पड़ती है।”

जगेंद्र की फोरेंसिक रिपोर्ट से घटनाक्रम में नया मोड़, हत्या नहीं, खुदकुशी !!

लखनऊ की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट ने जगेंद्र हत्‍याकांड को खुदकुशी करार दिया है। बताया गया है कि जगेन्द्र ने खुद आग लगाई थी. छाती के बाईं तरफ से आग से जलने के निशान पाए गए हैं. गौरतलब है कि जगेन्द्र ने घायल होने के बाद बयान दिया था और यूपी के मंत्री राममूर्ति वर्मा और यूपी पुलिस पर आग लगाने का आरोप लगाया था। 

पत्रकार आधी जंग जीते, जगेंद्र के परिजनों को 30 लाख मुआवजा, दो को नौकरी का भरोसा दिया सीएम अखिलेश यादव ने

नई दिल्ली: पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड के आरोपी मंत्री पर तो अभी तक कार्रवाई नहीं हुई लेकिन परिवार से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीस लाख रुपए के मुआवजे और घर के दो लोगों को नौकरी का भरोसा दे दिया है. इसके बाद परिवार ने धरना खत्म कर दिया है.

पत्रकार जगेंद्र हत्याकांड पर केंद्र और यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

नई दिल्ली : शाहजहांपुर के जुझारू पत्रकार जगेंद्र सिंह की हत्या के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। इससे हत्याकांड के आरोपी मंत्री और पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी आसान होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। कोर्ट ने हत्याकांड के संबंध में यूपी सरकार, केंद्र सरकार और प्रैस काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भेजकर दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब कर लिया है। 

जगेंद्र हत्याकांड पर डीजीपी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे कुमार सौवीर

वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है – ”यूपी के डीजीपी अरविन्‍द जैन की पुलिस का कमाल यहां शाहजहांपुर में देखें तो आप दांतों तले उंगलियां कुचल डालेंगे, जहां मंत्री का इशारा था, अपराधी मोहरा बना था और अपराधी बना डाला गया हत्‍या का जरिया। सिर्फ दो दिन तक पुलिस ने एक सीधी-सच्‍ची एफआईआर को टाल दिया और उसकी जगह में एक नयी रिपोर्ट दर्ज लिख डालीा ताना-बाना इतना जबर्दस्‍त बुना गया कि उसके बल पर मंत्री-अपराधी-पत्रकार और पुलिस की साजिशों से जगेन्‍द्र सिंह के खिलाफ डेथ-वारण्‍ट तामील करा दिया। अब मैं इस प्रकरण पर सीधे अदालत में ही पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा हूं, जिसमें डीजीपी अरविन्‍द जैन भी शामिल होंगे, जिन्‍होंने जान-बूझ कर भी एक असल मामले की तहरीर को मनचाहे तरीके से बदलवा दिया।

जलाकर मारे गये पत्रकार जगेंद्र और संदीप की हत्या का ज़िम्मेदार कौन?

उत्तर प्रदेश में एक पत्रकार की जलने के बाद हुई मौत से ठीक पहले पत्रकार के अंतिम बयान में यह कहा जाना कि “मुझको गिरफ्तार करना था… तो कर लेते मगर पीटा क्यों ? और आग क्यों लगा दी?”, इतने सवालों को खड़ा कर देता है कि न तो उत्तर प्रदेश सरकार उनका जवाब दे पाएगी न ही पत्रकारिता जगत के दिग्गज! अभी ये मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था, कि मध्य प्रदेश में भाजपा शासित सरकार की नाकामी के तौर पर एक पत्रकार की जली हुई लाश बरामद हुई, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि खनन माफिया ने पहले पत्रकार का अपहरण किया और बाद में जलाकर मारा और लाश को दबा दिया। सरकार सपा की हो या बीजेपी की, पत्रकार कहां सुरक्षित है..? ये समझ में नहीं आ रहा ! और इसके लिए दोषी कौन है..? ये भी साफ नहीं हो रहा है !

पत्रकार जगेंद्र और संदीप, दोनो की हत्या के पीछे खनन माफिया

बालाघाट (मप्र) : पत्रकार संदीप कोठारी हत्याकांड के संबंध में कटंगी के अनुविभागीय अधिकारी पुलिस जे एस मरकाम ने बताया कि पुलिस को पता चला है कि तीनों गिरफ्तार आरोपी अवैध खनन और चिटफंड के कारोबार से जुड़े हुए हैं और पत्रकार पर उनके खिलाफ अवैध खनन का एक स्थानीय अदालत में दर्ज प्रकरण वापस लेने का दबाव बना रहे थे। संदीप इसके लिए राजी नहीं था और संभवत: उसे इसकी ही कीमत चुकानी पड़ी है।

जगेन्द्र के परिवार को लालच और धमकियां, डीएम दफ्तर के सामने पत्रकारों ने की तेरहवीं

शाहजहांपुर : पत्रकार जगेंद्र सिंह की मौत के बाद उनके परिवार को धमकी और लालच देने का सिलसिला जारी है। मृतक के परिजनों ने धमकाने की शिकायत पुलिस में दी है। पिछले सात दिनों से धरने पर बैठे परिजनों ने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार भी कर दिया। जिले के तमाम पत्रकारों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने जगेन्द्र का तेहरवीं संस्कार किया। इस दौरान पत्रकारों ने हवन पूजन कर 13 ब्राह्मणों को भोजन भी कराया। 

जगेंद्र हत्याकांड : मंत्री, पुलिस और दलाल पत्रकार चौकड़ी की करतूतों का ये है जिन्‍दा सुबूत !

यह है एक निर्भीक पत्रकार को जिन्‍दा फूंकने के लिए हत्‍यारे मंत्री-माफिया-पुलिस और पत्रकारों की चौकड़ी का जिन्‍दा सुबूत। यह सुबूत है कि कैसे जगेन्‍द्र सिंह को मंत्री और पुलिसवालों ने अंतहीन उत्‍पीड़न और मारक तनाव दिये, बल्कि यूपी सरकार में सच बोलने वालों को हश्र क्‍या होता है।

मध्य प्रदेश के पत्रकार संदीप कोठारी को जिंदा जलाकर जमीन में दफना दिया

एक बहुत बड़ी खबर मध्य प्रदेश से आ रही है. यहां बालाघाट के एक पत्रकार संदीप कोठारी को माफियाओं ने जला कर मार डाला है. नई दुनिया और पत्रिका जैसे अखबारों में काम कर चुके संदीप की खबरों से माफिया नाराज थे. संदीप बालाघाट के कटंगी कस्बे में कार्यरत थे. बताया जा रहा है कि माफियाओं ने इन्हें किसी बहाने से बुलाया और बहका कर महाराष्ट्र के नागपुर की तरफ ले गए. मध्य प्रदेश की सीमा से बाहर निकलने ही सूनसान इलाका देखकर माफियाओं ने पहले संदीप कोठारी को जिंदा जलाया उसके बाद जमीन में दफना दिया. इस सनसनीखेज और हृदयविदारक घटना जिसकी मिल रही है वह स्तब्ध है.

अखिलेश सरकार सीबीआई से नहीं कराएगी जगेंद्र हत्याकांड की जांच, अब हाईकोर्ट की सुनवाई का इंतजार

शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग को प्रदेश सरकार ने ठुकरा दिया है। अब देश-प्रदेश के आंदोलित पत्रकारों और संगठनों की निगाह 25 जून को इस मामले की हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। हत्याकांड का मुख्य आरोपी प्रदेश सरकार का एक आरोपी राममूर्ति वर्मा के होने से इस मांग को ठुकराए जाने की मुख्य वजह माना जार हा है। हत्याकांड में कोतवाली प्रभारी समेत पांच पुलिस वाले भी अभियुक्त हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है लेकिन एक भी हत्यारोपी अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है।

शाहजहांपुर में धरने पर बैठे पत्रकार जगेंद्र सिंह के पत्नी बच्चे व अन्य

पत्रकारिता को उसका पुराना मिशन और चेहरा दिया जगेन्द्र ने

लगता है लोगों का इतिहासबोध कमजोर पड़ता जा रहा है। पढ़ने की शगल खत्म होती जा रही है, खास तौर पर राजनीतिक जीवधारी, अब किताबों से दूर होते जा रहें हैं। राजनीति की नई कोपलें तो अपनी इतिहास और भूगोल दोनों की सामान्य जानकारी से भी दूर होती जा रही हैं। वर्तमान में जीने वाली पीढ़ी अतीत से शायद कुछ सीखना ही नहीं चाहती। जबकि पहले के राजनेता अध्ययन में रूचि लेते थे और देश व दुनिया के इतिहास और आंदोलन की कहानी पढ़ते थें, पढ़ते ही नहीं थे, बल्कि अध्ययन से अपनी विचारधारा को भी परिपक्व और पुष्ट करते थें। गाँधी, नेहरू, लोहिया, जे.पी, दीन दयाल उपाध्याय आदि अनेक राजनेता और ‘जननायक’ स्वअध्ययन में गहरी रूचि लेने वाले थे।

जगेंद्र हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं, खूनियों के खिलाफ आज से आरपार की लड़ाई शुरू : सौवीर

चौरी-चौरा हत्‍याकाण्‍ड में पकड़े गये 170 लोगों पर भी जघन्‍य आरोप लगे थे और अंग्रेजी हुकूमत ने इन सब को फांसी पर लटका देने का हुक्‍म दे दिया था। लेकिन उस समय महामना मदनमोहन मालवीय ने अपनी शिक्षक की नौकरी छोड़कर इन वकालत की पुरानी डिग्री निकाली और बिना कोई पारिश्रमिक हासिल किये, इनमें से 151 लोगों को फांसी के फंदे से आजाद कराने के लिए जी-जान लड़ा दिया।