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हरदोई के शहंशाह नरेश अग्रवाल का शिकार बना पत्रकार विजय पांडेय

उत्तर प्रदेश में विधान सभा क्षेत्र वार और जिले वार पुलिस की ठेकेदारी नेताओं को दे दी गई है, इसीलिए हालात भयावह होते जा रहे हैं। संवैधानिक दायित्व के निर्वहन की जगह पुलिस ठेकेदारों के प्रति समर्पित भाव से कार्य करती नजर आ रही है, जिससे ठेकेदार प्रसन्न हैं, पर आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। जिला हरदोई में तो पुलिस ने और दो कदम आगे बढ़ कर कार्य किया है। सांसद नरेश अग्रवाल की दुकान से किरायेदार को निकालने के लिए पुलिस ने पूरी दुकान ही खत्म करा दी और इस सब कारनामे को कवर कर रहे एक पत्रकार को न सिर्फ मौके पर अपमानित किया, बल्कि उसके विरुद्ध जानलेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है।

पीड़ित पत्रकार विजय पांडेय

उत्तर प्रदेश में विधान सभा क्षेत्र वार और जिले वार पुलिस की ठेकेदारी नेताओं को दे दी गई है, इसीलिए हालात भयावह होते जा रहे हैं। संवैधानिक दायित्व के निर्वहन की जगह पुलिस ठेकेदारों के प्रति समर्पित भाव से कार्य करती नजर आ रही है, जिससे ठेकेदार प्रसन्न हैं, पर आम जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। जिला हरदोई में तो पुलिस ने और दो कदम आगे बढ़ कर कार्य किया है। सांसद नरेश अग्रवाल की दुकान से किरायेदार को निकालने के लिए पुलिस ने पूरी दुकान ही खत्म करा दी और इस सब कारनामे को कवर कर रहे एक पत्रकार को न सिर्फ मौके पर अपमानित किया, बल्कि उसके विरुद्ध जानलेवा हमले का मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है।

पीड़ित पत्रकार विजय पांडेय

हरदोई निवासी विजय पांडेय लखनऊ से प्रकाशित एक अखबार के संवाददाता हैं एवं जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। उन्होंने बताया कि सांसद नरेश अग्रवाल की दुकान विजय अग्रवाल व अभिषेक अग्रवाल पुत्रगण मामन चंद्र अग्रवाल के पास है, इस दुकान के किराये और खाली कराने को लेकर दोनों के बीच विवाद है, जिसका मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। इस दुकान के बराबर उनकी पांडेय गन हाउस के नाम से शस्त्र की दुकान है।

पीड़ित पत्रकार ने बताया कि 17 मई की रात करीब 8 बजे उन्हें सूचना मिली सांसद नरेश अग्रवाल का भाई उमेश अग्रवाल पुलिस व कुछ निजी गुंडों को लेकर जेसीबी मशीन आदि लेकर घटना स्थल पर पहुंच गया है। सूचना पाकर वे मौके पर गये और किसी से कुछ कहे बिना शांत भाव से फोटो व वीडियो बनाने लगे, तो सीओ सिटी राम लाल राय ने उनके साथ अभद्रता शुरू कर दी, साथ ही कैमरा व मोबाइल छीन कर फोटो व वीडियो डिलीट कर दिए। उन्होंने बताया कि कुछ ही देर में पूरा भवन ध्वस्त कर दिया गया और उसका मलवा एक तालाब में डाल दिया।

पीड़ित पत्रकार ने बताया कि कवरेज करने के साथ वे मौके पर इसलिए भी गये कि बराबर में उनकी दुकान है, जिसका ध्यान रखना था कि बराबर वाली दुकान टूटते समय जेसीबी से क्षतिग्रस्त न हो जाये। बोले- बराबर की दीवार उनकी ही है, उसमें अगर छेद भी हो जाता, तो दुकान में लाखों रूपये कीमत के अस्त्र-शस्त्र हैं, जो चोरी हो जाते, तो वे बर्बाद ही हो जाते। पीड़ित पत्रकार ने बताया कि पुलिस के साथ उमेश अग्रवाल और उनके गुर्गों ने जमकर मनमानी की, इसके बावजूद उन्हीं के विरुद्ध 18 जून को मुकदमा दर्ज करा दिया। राहुल द्विवेदी नाम का युवक वादी बना है, जिसका कहना है कि 17 जून की शाम को वह कुमार साईकिल स्टोर पर साईकिल खरीदने  गया, जहां लेन-देन को लेकर विवाद हो गया, तभी उस पर जान से मारने की नीयत से रॉड से हमला किया गया, जबकि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। सवाल यह भी उठता है कि जिस कुमार साईकिल स्टोर को घटना स्थल बताया जा रहा है, वह स्टोर है कहाँ?

अब पीड़ित पत्रकार अफसरों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन हरदोई के स्वयं-भू शहंशाह सांसद नरेश अग्रवाल के चलते पीड़ित पत्रकार की गुहार कोई सुनने तक को तैयार नहीं है। शाहजहांपुर के चर्चित जगेन्द्र हत्या कांड की तरह ही घटनाओं की पुनरावृत्ति होती नजर आ रही है, जबकि गृह सचिव व डीजीपी की ओर से बयान आ चुका है कि पत्रकारों का शोषण नहीं होने दिया जायेगा। बता दें कि हरदोई में सत्ताधारियों और पुलिस का आतंक है। पिछले दिनों थाना हरियावां के प्रभारी राकेश गुप्ता ने सांसद से अभद्रता की थी एवं पत्रकारों के संबंध में अपशब्द कहे थे। एक यौन शोषण की शिकार महिला को भी अपमानित किया था। राकेश गुप्ता को पत्रकारों के विरोध के बाद हटा दिया गया, लेकिन पुलिस की मानसिकता अब भी वही है। मनमानी और उत्पीड़न करने में सत्तापक्ष के लोगों का खुल कर साथ देती नजर आ रही है। (साभार- गौतमसंदेश डॉट कॉम)

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