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आयोजन एक, खबर दो, रिपोर्टर तीन यानी सिफारिशी खबर !!

आज (13.07.2015) के हिन्दुस्तान टाइम्स में एक दिलचस्प चूक है। उषा उत्थुप से जुड़े एक आयोजन की खबर एक ही अखबार में दो जगह छपी है। इन दो खबरों में एक खबर दो संवाददाताओं ने की है और एक खबर तीसरे संवाददाता ने। वैसे तो यह कोई बड़ी बात नहीं है और अखबारों में एक ही खबर दो जगह या दो बार छपती रहती हैं। ऐसा अखबार बनाने वालों की लापरवाही के साथ-साथ उनके अति उत्साह में भी होता है। प्रस्तुत मामला अति उत्साह का ज्यादा लगता है क्योंकि खबर हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार को प्रकाशित करने वाले संस्थान के अन्य उपक्रम या प्रयास एचटी – पेस (पार्टनरशिप फॉर ऐक्शन इन एजुकेशन) से जुड़ी हुई है। इसके तहत मुख्य रूप से स्कूलों की गतिविधियों को प्रकाशित करने, स्कूलों में बच्चों के बीच अखबार को लोकप्रिय बनाने और इसके तहत स्कूलों से जुड़े विज्ञापन बटोरने के काम किए जाते हैं। 

आज (13.07.2015) के हिन्दुस्तान टाइम्स में एक दिलचस्प चूक है। उषा उत्थुप से जुड़े एक आयोजन की खबर एक ही अखबार में दो जगह छपी है। इन दो खबरों में एक खबर दो संवाददाताओं ने की है और एक खबर तीसरे संवाददाता ने। वैसे तो यह कोई बड़ी बात नहीं है और अखबारों में एक ही खबर दो जगह या दो बार छपती रहती हैं। ऐसा अखबार बनाने वालों की लापरवाही के साथ-साथ उनके अति उत्साह में भी होता है। प्रस्तुत मामला अति उत्साह का ज्यादा लगता है क्योंकि खबर हिन्दुस्तान टाइम्स अखबार को प्रकाशित करने वाले संस्थान के अन्य उपक्रम या प्रयास एचटी – पेस (पार्टनरशिप फॉर ऐक्शन इन एजुकेशन) से जुड़ी हुई है। इसके तहत मुख्य रूप से स्कूलों की गतिविधियों को प्रकाशित करने, स्कूलों में बच्चों के बीच अखबार को लोकप्रिय बनाने और इसके तहत स्कूलों से जुड़े विज्ञापन बटोरने के काम किए जाते हैं। 

ऐसे में एचटी पेस के आयोजन की खबरें हिन्दुस्तान टाइम्स में छपती रहती हैं। शनिवार की शाम ऐसा ही एक आयोजन था जिसमें उषा उत्थुप भी थीं। जाहिर है, यह छपने लायक कार्यक्रम था और संस्थान में संबंधित लोगों ने एक दूसरे से खबर प्रकाशित करना सुनिश्चित करने के लिए कहा होगा। इसी चक्कर में यह खबर दो जगह छप गई। हो सकता है दिल्ली में वितरित अखबार में यह गलती ना हो। पर गाजियाबाद और नोएडा में बंटे अखबारों में तो यह चूक है ही। रोज अखबार बनाने वाले तो जानते हैं कि उन्हें क्या करना है, क्या सावधानियां बरतनी हैं आदि। पर दूसरे विभाग के किसी अधिकारी का आग्रह या आदेश हो और संपादकीय विभाग के लोग अधिकारी की सेवा में तत्पर हों तो ऐसी गलतियां हो ही जाती हैं। गनीमत यह रही कि दोनों खबरें दो पन्नों पर जाने के लिए अलग-अलग रिपोर्टर की लिखी हैं इसलिए बहुत खराब नहीं लग रही हैं। उषा उत्थुप की फोटो अलग पर एक सी है और इसी से मेरी नजर में आया। अगर किसी एक में फोटो नहीं होती तो भी शायद गलती पकड़ में नहीं आती। लेकिन मामला सिफारिशी जो था। 

सिफारिशी खबरें अगर दो प्रसार क्षेत्रों से संबंधित हों तो ऐसी गड़बड़ी हो ही जाती हैं। होता यह है कि अखबार वाले ज्यादा से ज्यादा खबरें देनें और पाठकों को उनके इलाके की खबरें देने के लिए अलग क्षेत्रों के अलग संस्करण या पन्ने देते हैं। इन पन्नों पर उसी क्षेत्र की खबर होती है। अगर उस क्षेत्र का कोई आयोजन अखबार के प्रकाशन के मुख्य केंद्र पर हो तो सिफारिशी होने के कारण अखबार के मुख्य संस्करण में तो छपेगी ही जहां की है वहां भी छापने के लिए सिफारिश रहेगी। कायदे से जहां की खबर है वहां वाले संस्करण से मुख्य केंद्र वाली खबर हटा देनी चाहिए पर सिफारिशी होने के कारण हटाई नहीं जाती और जहां की खबर है, वहां के संस्करण में भी रह जाती है। यह आयोजन दिल्ली और एनसीआर के स्कूलों के प्रिंसिपल से संबंधित था और ताजपैलेस दिल्ली में हुआ था। दिल्ली मेट्रो के पन्ने पर यह खबर दिल्ली के एडिशन के लिए रहनी थी और एनसीआर वाले पन्नों पर एनसीआर के लिए। गाजियाबाद में मुझे जो अखबार मिला उसमें दोनों खबर है।

जनसत्ता अखबार में लंबे समय तक कार्य कर चुके और अब आजाद पत्रकार के बतौर सोशल मीडिया पर सक्रिय संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

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