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सुख-दुख

यूपी में अफसरशाही का खेल : शिशिर ने इन 5 पत्रकारों को किस आधार पर दे दी मान्यता?

सेवा में,
श्रीमान मुख्य सचिव महोदय
उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ

महोदय,

मैं आपको जनहित में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक श्री शिशिर की संस्तुति एवं उप निदेशक प्रेस ओ पी राय की मिली भगत से फर्जी पत्रकार मान्यता से अवगत कराना चाहता हूं।

उत्तर प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में नियम-कानून एवं अपने ही बनाए गए मानकों को नजरअंदाज करके 6000, 15000, 20000 प्रसार संख्या के समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों की राज्य मुख्यालय की मान्यता दी गई है।

इन मान्यताओं के चलते न सिर्फ राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकारों की गरिमा को कलंकित करने का षड्यंत्र किया गया है बल्कि अति सुरक्षित शासन प्रशासन के भवनों में अनाधिकृत व्यक्तियों को प्रवेश दिलाने का षड्यंत्र भी किया गया है। षड्यंत्रकारी व्यक्तियों द्वारा पत्रकारिता का चोला ओढ़कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फर्जी ईमेल आईडी बना कर विज्ञापन मांगने का काम किया गया जिसमें फ्रीलांस पत्रकार मनोज कुमार सेठ नाम के शख्स को गिरफ्तार भी किया गया। ऐसे में वरिष्ठ पत्रकार और फ्रीलांस पत्रकार की राज्य मुख्यालय की मान्यता नियमों और मानकों को नजरअंदाज करके किया जाना न सिर्फ गैरकानूनी है बल्कि इस पूरे प्रकरण की गंभीर जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही भी किया जाना न्याय संगत होगा।

राज्य मुख्यालय की मान्यता देने में सिर्फ प्रसार संख्या को नजरअंदाज नहीं किया गया बल्कि जो समाचार पत्र लखनऊ से प्रकाशित ही नहीं होते हैं उनके प्रतिनिधियों को मान्यता दिए जाने का एक बड़ा खुलासा भी सामने दिखाई देता है। जिस समाचार पत्र का शीर्षक ही लखनऊ के नाम से RNI द्वारा आवंटित नहीं किया गया है ऐसे समाचार पत्र के 5 प्रतिनिधियों को लखनऊ से मान्यता किन नियमों के तहत दी गई है इसका जवाब तो सूचना निदेशक के पास भी नहीं होगा।

क्रम संख्या 356, 357, 358, 359, 360 पर जिन समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों को मान्यता प्रदान करते हुए 61 पृष्ठो की सूची पर सूचना निदेशक द्वारा अपने हस्ताक्षर बना कर अनुमोदन किया गया हैं उस समाचार पत्र के विषय में लखनऊ से प्रकाशन किया जाना साफ-साफ अल्फाजों में लिखा गया है परंतु उस हिंदी दैनिक समाचार पत्र के विषय में भारत सरकार के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय की वेबसाइट से जानकारी प्राप्त करने पर यह प्रमाणित होता है समाचार पत्र कानपुर से प्रकाशित किया जाता है और लखनऊ से उक्त हिंदी समाचार पत्र का कोई शीर्षक ही नहीं आवंटित किया गया है। ऐसे में 5-5 लोगों की मान्यता, वो भी राज्य मुख्यालय की प्रदान कर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग पत्रकारिता जगत को क्यों कलंकित करने पर आमादा है, यह एक गंभीर जांच का विषय है।

एचए इदरीसी
अध्यक्ष
मान्यता प्राप्त उर्दू मीडिया एसोसिएशन, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

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