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साहित्यकार सतीश जमाली नहीं रहे

हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार और ‘कहानी’ तथा ‘नयी कहानियाँ’ पत्रिका के सम्पादन से सम्बद्ध रहे श्री सतीश जमाली के निधन की सूचना अत्यंत दुखद है. इन दिनों कानपुर में रह रहे सतीश जमाली कुछ दिन पहले अपने पुश्तैनी शहर पठानकोट गए थे जहां बताते हैं कि ठोकर लगने से उन्हें चोट आयी थी और नाक से खून आने लगा था. दिल्ली लाकर एम्स में उन्हें भरती कराया गया. यहाँ वे कुछ दिन कोमा में रहे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया न जा सका.

हिंदी के महत्वपूर्ण कथाकार और ‘कहानी’ तथा ‘नयी कहानियाँ’ पत्रिका के सम्पादन से सम्बद्ध रहे श्री सतीश जमाली के निधन की सूचना अत्यंत दुखद है. इन दिनों कानपुर में रह रहे सतीश जमाली कुछ दिन पहले अपने पुश्तैनी शहर पठानकोट गए थे जहां बताते हैं कि ठोकर लगने से उन्हें चोट आयी थी और नाक से खून आने लगा था. दिल्ली लाकर एम्स में उन्हें भरती कराया गया. यहाँ वे कुछ दिन कोमा में रहे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया न जा सका.

कल सुबह उनका निधन हुआ. वे लगभग 77 वर्ष के थे. श्री सतीश जमाली ‘जंग जारी’, ‘नागरिक’, ‘बच्चे तथा अन्य कहानियां’, ‘ठाकुर संवाद’, ‘प्रथम पुरुष’ जैसे कहानी-संग्रहों और ‘प्रतिबद्ध’, ‘थके-हारे’, ‘छप्पर टोला’ तथा ‘तीसरी दुनिया’ जैसे उपन्यासों के लिए जाने जाते हैं. साहित्यिक पत्रकार के रूप में तो उनकी पहचान थी ही. जनवादी लेखक संघ दिवंगत कथाकार के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है.

मुरली मनोहर प्रसाद सिंह
(महासचिव)
संजीव कुमार
(उप-महासचिव)
जनवादी लेखक संघ

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