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जम्मू के रिहायशी इलाके में ‘मामूली असर’ वाली इस फोटो को मेरे आठ अखबारों में सिर्फ अमर उजाला ने पहले पन्ने पर छापा है!

संजय कुमार सिंह-

मीडिया में जब यह प्रचार है कि भारत ने पाकिस्तानी हमलों को बेअसर कर दिया, सरकार विरोधी मीडिया संस्थानों की नकेल कसने के तमाम उपाय किये गये हैं तो जम्मू के रिहायशी इलाके में ‘मामूली असर’ वाली इस फोटो को मेरे आठ अखबारों में सिर्फ अमर उजाला ने पहले पन्ने पर छापा है। विशेष किस्म की यह पत्रकारिता भारत की आम जनता और लोकतंत्र के लिए तो नहीं हो रही है।

एंटायर जर्नलिज्म का कोई पाठ तैयार हो रहा हो तो मैं नहीं कह सकता। मुझे लगता है कि यह एक दुर्लभ तस्वीर है। इसमें लाशें नहीं हैं और नुकसान ने खड़ी गाड़ियों को रंग दिया है।

युद्ध की बहुत मामूली कही जा सकने वाली विभीषिका बताने के लिये इससे अच्छी फोटो हो नहीं सकती लेकिन यह पहले पन्ने पर नहीं है। सोशल मीडिया पर भी कम है। दूसरी ओर इस तरह की फोटो और कैप्शन से हम खुश होते हैं और पाठकों को भी खुश करने की कोशिश करते हैं। उन्हें सच नहीं बताते।

कहने की जरूरत नहीं है कि संबित पात्रा को राजनीति (और अर्थशास्त्र) सिखाने के लिये कांग्रेस की खोज प्रो. गौरव बल्लभ पंत घोषित रूप से प्रचारक हो गये हैं और एक्स पर यह वीडियो तथा कैप्शन उसके (इस) स्टिल फोटो से ज्यादा असर करेगा।

कहा जा सकता है कि भारत की जनता एक खास किस्म की संचार क्रांति की शिकार है।

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