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उत्तर प्रदेश

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सुपुत्र आ रहे हैं, DM-एसपी जूता पटक कर सैल्यूट करें, देखें पत्र

“लोकतंत्र में जनता असली मालिक होती है—यह बात किताबों और भाषणों में खूब सुनाई देती है, लेकिन हकीकत यह है कि असली मालिक तो मंत्रीपुत्र और नेता-बेटियां ही हैं। जिले की टूटी सड़कों, अधूरे स्कूलों और खाली अस्पतालों के लिए शासन-प्रशासन कभी नोटिस नहीं लेता, मगर जैसे ही ‘मान्यवर सुपुत्र’ के आगमन की भनक लगती है, डीएम-एसपी से लेकर पूरा अमला हरकत में आ जाता है। मंत्रीजी का बेटा घूमने आए, तो उसकी आने-जाने की व्यवस्था पुख्ता करने के लिए बाकायदा पत्र जारी कर दिया जाता है।

अब यह लोकतंत्र है या सामंती राज, समझना मुश्किल है। आम लोग लाइन में खड़े होकर अपनी बारी के इंतज़ार में रहते हैं और वीआईपी बच्चे बिना कुर्सी हिलाए पूरा सिस्टम अपने पैरों में खड़ा कर लेते हैं, जिनकी खातिर सरकारी मशीनरी दिन-रात सलामी बजाने को तैयार रहती है।”


इस मामले को लेकर वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने मंत्रीपुत्र के लिए जारी किया गया पत्र पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा है-

स्वतंत्र देव जी बोल दीजिए कि आपके बेटे अभिषेक सिंह को मिला ये सरकारी प्रोटोकॉल झूठ है! बोल दीजिए कि जालौन और उरई के अधिकारियों को मार्क की गई ये चिट्ठी फ़र्ज़ी है!!

बोल दीजिए कि ये आपको बदनाम करने की साजिश है! आपको योगी आदित्यनाथ की अनंत सेवा, अविराम सानिध्य और अथाह समर्पण में डूबे एक एक पल की क़सम, बोल दीजिए कि पढ़ने वालों की आँखों में रतौंधी या मोतियाबिंद हो गया, बोल दीजिए कि इस चिट्ठी में फ़िल्म स्टार अभिषेक बच्चन का नाम लिखा हुआ है और वे इसे आपके लाडले बेटे अभिषेक सिंह से जोड़ रहे हैं!

कुछ तो बोलिए स्वतंत्र देव जी, आज तो पूरा का पूरा ‘कुटुंब’ सम्मान में 90 डिग्री पर नज़रें झुकाए आपकी ओर निहार रहा है! स्वतंत्र देव जी, आपने तो “कुटुंब” के जलवे का वास्तविक अर्थ साकार कर दिया!!!


वहीं वरिष्ठ पत्रकार ममता त्रिपाठी लिखती हैं-

‘पापा मंत्री हैं हमारे’– हाल ही में OTT प्लेटफार्म पर एक फ़िल्म आई थी “चाचा विधायक हैं हमारे”

उसी फ़िल्म से प्रेरित होकर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह के पुत्र… नहीं नहीं सुपुत्र.. अभिषेक सिंह ने यही कहा होगा कि “पापा मंत्री हैं हमारे”!!

ख़ैर!!! कम से कम ये तो पता चला मंत्री जी के बेटे का भी प्रोटोकॉल जारी हो सकता है….

तो जालौन के अफसरों पूरी तरह से मुस्तैद रहना कोई चूक ना होने पाए आख़िर पढ़ाई लिखाई करके अफसर इसीलिए तो बनें हो कि मंत्री तो मंत्री उनके सुपुत्र को भी जूता पटक कर सेल्यूट करो…

योगी जी के कुछ खास मंत्रियों में शामिल स्वतंत्र देव सिंह पटेल कुर्मी बिरादरी से आते हैं लेकिन अपनी बिरादरी के लोगों की भी पैरवी करने में सबसे निचले पायदान पर पाए जाते हैं… अब समझ में आया परिवारवाद से ऊपर प्रोटोकॉल है।

…ये सब जानकर-सुनकर-पढ़कर आमजन की आत्मा का दक्षिणी हिस्सा (केस दक्षिणपंथियों से जुड़ा है) घोर स्पंदन से दोलित हो उठता है!

जब ‘हमारे चाचा विधायक हैं’ भर से माहौल टाईट हो जाता है तब ‘ पिता जी मंत्री हैं’ टाईप में भौकाल एवरेस्ट से भी चार फ़ीट ऊपर हो जाना नैसर्गिक है-आवश्यक भी है!

मेरी तो मांग है कि संविधान में संशोधन करके ‘बड़े’ मंत्रियों की संतानों के लिए एक्सट्रा प्रोटोकॉल की व्यवस्था करवा देनी चाहिए ताकि विरोधियों की आलोचना से मंत्री के ‘परम वैभव’ की रक्षा हो सके।

बाकी ऐसी सिफारिशों से ‘परिवारवाद’ ‘वंशवाद’ की धार कुंद हो जाती है( कैसे ये बात तो मोदीजी-योगीजी ही समझा सकेंगे)!!

-ज्ञानेंद्र शुक्ला


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