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सियासत

निशिकांत दुबे के खिलाफ न्यायाधीशों को अवमानना की कार्रवाई करनी चाहिए!

शिवानी कुलश्रेष्ठ-

2020 में प्रशांत भूषण ने ट्विट किया और उस ट्विट पर उनके ऊपर अवमानना कार्यवाही की गयी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की एक तस्वीर को लेकर कटाक्ष किया, जिसमें वह एक हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल पर बैठे दिखे थे। उन्होंने कहा कि CJI बिना मास्क और हेलमेट के बाइक पर बैठे हैं, जबकि कोर्ट लॉकडाउन के दौरान बंद हैं और आम लोगों को न्याय नहीं मिल रहा। इसके बाद कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी मानते हुए एक रुपये का जुर्माना लगाया।

चूंकि संसदीय विशेषाधिकार के अंतर्गत निशिकांत दुबे का वक्तव्य प्रोटेक्टेड है। परन्तु जब वह संसद से बाहर निकल कर वक्तव्य देते हैं या कोई अन्य नागरिक सीजेआई पर मानहानिकारक वक्तव्य देता है तो वह संसदीय विशेषाधिकार के अंतर्गत संरक्षित नहीं है। अत: मेरी सीजेआई से अपील है कि वह तथाकथित लोगों के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही करने की महती कृपा करें। ताकि भविष्य में अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तथा तानाशाहपूर्ण ताकतों को रोका जा सके।

इसी क्रम में यह उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्यवाही तथा सांसदों के आचरण पर टिप्पणी करने का एक वोटर तथा नागरिक को अनुच्छेद 19 में अभिव्यक्ति तथा आलोचना का अधिकार है। मुझे हमारे नेताओं पर खेद है कि वह न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। और मैं इन सभी नेताओं की कठोर आलोचना करती हूं। यह रूल ऑफ लॉ पर सीधे तौर पर हमला है। जिसके दूरगामी परिणाम भयावह है। इनके वक्तव्य से एक गरीब तथा वंचित तबके में निराशा की भावना पैदा हुई है। इससे आपराधिक मनोप्रवृत्ति में बढ़ोतरी की आशंका है।

इनके वक्तव्य से न्यायपालिका की गरिमा तथा कानून के खौफ समाप्त होने की कगार पर है। अब अपराधी लोग न्यायपालिका को हल्के में लेंगे इसलिए न्यायधीशों को नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही में आगे बढ़ना चाहिए।

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