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ये दो मामले पढ़िए : रोजगार के नाम पर अडानी का दस हजार करोड़ रुपये टैक्स माफ, अडानी के सामने बिल्कुल लाचार हैं मोदी के मंत्री!

अदिति शर्मा

दानी एंटरप्राइजेज़ को बीजेपी सरकार द्वारा 10,000 करोड़ रुपये की कर छूट दी गई थी, इसका आधार, यह दावा था कि इससे रोजगार सृजन में वृद्धि होगी। लेकिन अदानी एंटरप्राइजेज़ में केवल 8,676 लोगों को रोजगार मिला है, इसके अनुसार प्रति नौकरी टैक्स में छूट 1.15 करोड़ रुपये है।

इस तरह का लाभ किसी अन्य व्यक्ति/उद्योग को नहीं दिया गया /दिया भी नहीं जा सकता! प्रति रोज़गार यदि एक करोड़ पंद्रह लाख रुपए की छूट सरकार देने लगे तो उसको दिवालिया होने से कोई नहीं बचा सकता!

यहाँ एक बड़ा सवाल उठता है कि जब अदानी एंटरप्राइजेज़ को इतनी बड़ी कर छूट दी जा सकती है, तो देश के सारे बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के लिए या स्वास्थ्य सेवाओं को मुफ़्त करने के लिये सरकार के पास पैसे क्यों नहीं हैं?

यह एक ऐसा बड़ा विरोधाभास है जो सरकार की प्राथमिकताओं /नीतियों और अदानी से मिलीभगत का खुलासा करता है।

संलग्न सूची अदानी ग्रुप की सारी कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या स्पष्ट करती है कि यह महाकाय कारपोरेट कितने कम रोज़गार सृजित करता है!


मोदी सरकार ने एक भी ऐसा रास्ता नहीं छोड़ा जिससे अदानी की झोली भरी जा सके। हर जगह सरकारी खज़ाने को चोट पहुँचाई गई, भारतीय नागरिकों के टैक्स से हासिल की गई रकम मोदी ने अपने यार पर लुटाई। देखिए कि कैसे दस हज़ार करोड़ रुपए रोज़गार पैदा करने के नाम पर दिए गए, मगर अडानी ने वहाँ भी चूना लगा दिया। और सीनाज़ोरी देखिए कि न कोई उस पर बहस कर सकता है और न ही जाँच की मांग। मोदी सरकार में कोई जवाबदेही मानती ही नहीं है। उसने इस शब्द को प्रदूषित यमुना के कीचड़ में फेंक दिया है। उसी के साथ लोकतंत्र भी फेंका गया है। -डॉ मुकेश कुमार


सुप्रिया श्रीनेत-

अडानी के सामने बिल्कुल लाचार हैं मोदी के मंत्री.

कांग्रेस सांसद डा. शश‍ि थरूर ने केरल के विझिंजम पोर्ट जो अगले महीने कमीशन होने वाला है, लेक‍िन जिसकी रोड की कनेक्‍ट‍िव‍िटी ही नहीं है का अहम मुद्दा उठाया.

मतलब- ‘पोर्ट विदाउट रोड’.

इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा: “समस्या यह है कि ये पोर्ट अडानी ने लिया था और रोड बनाने का वादा किया था. लेक‍िन अब अडानी ने रोड बनाने से मना कर दिया है. समस्‍या का समाधान ढूंढने की कोशिशें जारी हैं”.

यह है मोनोपॉली बनाने का नतीजा – सब कुछ एक आदमी को देने का नतीजा. वो जब मर्जी हो पलट जाएगा, और आप हाथ पर हाथ धरे बैठे रहिएगा.

वैसे अगर अडानी के बजाय कोई और कांट्रेक्टर पोर्ट कमीशन होने से एक महीने पहले पल्ला झाड़ लेता तो सरकार क्या करती? ऐसी रियायत तो नहीं दिखाती जैसी तोते को दिखा रही है!

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