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उत्तर प्रदेश

पीलीभीत में एडीएम की कमिश्नर से शिकायत करना पड़ गया भारी, जेल गए विहिप के विभाग संगठन मंत्री

निर्मलकांत शुक्ला-

उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री प्रिंस गौड़ को अपर जिला अधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ऋतु पुनिया की मंडलायुक्त से शिकायत करना भारी पड़ गया। एडीएम के खिलाफ जांच का परिणाम सामने आता, उससे पहले ही एडीएम ने पलटवार करते हुए पुलिस अधीक्षक को तहरीर दे दी। एसपी के आदेश पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। सारी कार्रवाई बेहद गुपचुप तरीके से अंजाम दी गई। आनन फानन में आरएसएस के इस बड़े नेता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया। इसके बाद न्यायालय ने उनको जेल भेज दिया।

प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी से लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भूचाल आ गया। अधिकारियों ने इस काम को इतनी खामोशी से अंजाम दिया कि ना तो किसी को मुकदमा दर्ज होने की भनक लगी और ना ही प्रिंस गौड़ की गिरफ्तारी की। जब प्रिंस गौड़ को अदालत में पेश किया गया, तब उन्होंने अपनी मदद के लिए कुछ अधिवक्ताओं को किसी तरह से सूचना भेजी, तब जाकर इस मामले का लोगों को पता चला।

उत्तर प्रदेश में शायद यह पहला मामला होगा, जब किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महत्वपूर्ण पद पर आसीन किसी पदाधिकारी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया और आनन आनन में गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे करा दिया। पीलीभीत में किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी की इस हिमाकत को संगठन ने बेहद गंभीरता से लिया है और मामला मुख्यमंत्री के दरबार तक जा पहुंचा है।

एडीएम ऋतु पुनिया ने पुलिस अधीक्षक को दी तहरीर में कहा कि प्रिंस गौड़ ने अपने पत्र में उन पर स्टांप मामलों में अनियमितता और कॉलोनियों के मामलों में दखल का आरोप लगाया, जबकि यह पूरी तरह तथ्यहीन और झूठे हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित प्रकरण न्यायिक हैं, जिनकी समीक्षा केवल प्रवर न्यायालय में ही संभव है, किसी व्यक्ति द्वारा इस पर टिप्पणी करना न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बनाना है।

एडीएम ने तहरीर में कहा कि पत्र में उनके मृतक माता एवं ससुर के नाम से बैनामे कराने का घिनौना आपराधिक आरोप लगाया गया, जो न केवल मानहानिकारक है बल्कि यह भी दर्शाता है कि आरोपी किसी गिरोह के साथ मिलकर उन पर हमला या किसी अन्य आपराधिक कृत्य को अंजाम दे सकता है। तहरीर के अनुसार मामले में एडीएम द्वारा शिकायत की प्रति विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष को भेजी गई। जिलाध्यक्ष ने जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि प्रिंस गौड़ द्वारा जारी पत्र परिषद का आधिकारिक पत्र नहीं है, बल्कि कूट रचित दस्तावेज है। तहरीर के अनुसार परिषद ने बताया कि संगठन की ओर से किसी को ऐसे पत्राचार का अधिकार नहीं दिया गया था। संगठन ने एडीएम के कार्यों को उत्तम और निष्पक्ष बताते हुए आरोपी के कृत्य की निंदा की। बकौल एडीएम विश्व हिंदू परिषद ने यह भी स्वीकार किया कि प्रिंस गौड़ ने संगठन के नाम और लेटर पैड का दुरुपयोग किया। संगठन ने इस संबंध में पहले ही प्रांत स्तर पर पदों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर रखे हैं।

कोतवाली पुलिस का कहना है कि पुलिस ने जांच में शिकायत को सत्य एवं प्रमाणित पाते हुए आरोपी प्रिंस गौड़ के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूट रचना और शासकीय कार्यों में बाधा डालने की धाराओं में एडीएम की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया। शनिवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। न्यायालय ने उनको न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जेल भेज दिया। इस घटनाक्रम से जिले से लेकर प्रदेश और केंद्र तक हलचल मची हुई है।

वरिष्ठ पत्रकार निर्मलकांत शुक्ला की रिपोर्ट.

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