विनय मौर्या-
यह कार्यवाही सिर्फ और सिर्फ वकीलों की एकता से ही सम्भव हुई है। वकीलों की एकजुटता को सलाम पहुँचे। लोग जान लें मधुमक्खी और वकीलों में एक समानता है छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं।
बात सिर्फ बाराबंकी बवाल की नहीं है, बल्कि तकरीबन हर जगह वकील अपनी यूनियन और यूनिटी के दम पर फतह हासिल करते आए हैं। शासन हो या प्रशासन, वकीलों से भिड़ने की कत्तई हिमाकत नहीं करता और अगर कर भी ले तो बैकफुट पर वही आता है, वकील नहीं।
यही वजह है कि अब बहुत से पत्रकार भी लॉ करके वकील बनते जा रहे हैं, क्योंकि पत्रकारों में एकता और एकजुटता का नितांत अभाव हो चुका है और बौद्धिकता भी नाममात्र की बची है।
मगर मूलतः वकीलों को यह भी ध्यान देना होगा कि उनकी इस एकता-एकजुटता का फायदा उठाने के लिए कई पृष्ठभूमियों से आए सफेदपोश और आपराधिक प्रवृत्ति के “कुछ” लोग भी घुस आए हैं जो अपने अनैतिक धंधों को संरक्षण देने में लगे रहते हैं और वकीलों की यूनिटी को हथियार बनाकर इस्तेमाल करते हैं, जिससे पेशे की छवि खराब होती है।
कहना बस इतना है कि उनकी एकजुटता का दुरुपयोग न हो और पेशे की गरिमा बनी रहे। ऐसे ही कुछ पत्रकारों में भी हैं। चूंकि अधिकांश पत्रकारों में विचारधारा का बिखराव है कोई एकमत नहीं होता इसलिए वह उधर ही रुख करते हैं।
बहरहाल, वकीलों की एकता काबिले-तारीफ है और वे ऐसी नज़ीर पेश करते हैं कि भविष्य में कोई उनकी गर्दन पर हाथ रखने की हिमाकत नहीं करेगा।
क्या था विवाद?
बारा हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर वकीलों और टोल कर्मचारियों के बीच मारपीट की घटना हुई थी। आरोप है कि टोल पर फास्टैग और बैरियर को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद वकीलों ने टोल कर्मियों के साथ मारपीट की। मारपीट के दौरान बैरियर और फास्टैग स्कैनर तोड़ दिए गए, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई। घटना के बाद वाहन बिना टोल दिए गुजरते रहे, जिससे टोल संचालन ठप हो गया।
NHAI ने क्या कार्रवाई की?
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने मामले को गंभीर मानते हुए टोल संचालन कर रही कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया। साथ ही कंपनी से ₹5.3 करोड़ की बैंक गारंटी/जमानत राशि जब्त कर ली गई। टोल प्लाजा का संचालन दूसरी कंपनी को सौंप दिया गया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
मारपीट के मामले में आरोपी टोल मैनेजर समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपियों पर जानलेवा हमला, मारपीट, धमकी और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाईं।
आगे क्या हुआ?
घटना के बाद लखनऊ सहित कई जगहों से वकील टोल प्लाजा पहुंचे और प्रदर्शन किया। वकीलों ने टोल कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की। हालात बिगड़ते देख प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति संभाली।
कुल मिलाकर यह विवाद टोल प्लाजा पर वकीलों की पिटाई, फास्टैग व्यवस्था, टोल वसूली और कानून-व्यवस्था से जुड़ा था, जिसके चलते NHAI ने सख्त कदम उठाते हुए कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया और भारी रकम जब्त की।
इस घटना से जुड़े सीरियल से ये तीन वीडियो देखिए….



